दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!

Entries from November 2005

रंणबाँकुरों की वापसी!!

November 28, 2005 · No Comments

टीम इंडिया, भई वाह!! आज तो कमाल ही हो गया, जिस तरह से भारतीय रंणबाँकुरों ने पाँचवें और आख़िरी मुकाबले को जीत कर श्रृंख़ला को बराबर कर भारतीय भूमि पर दक्षिण अफ़्रीका की पहली एक दिवसीय श्रृंख़ला विजय का सपना चूर किया, वह वाकई प्रशंसा के योग्य है। कोलकाता में मिली क़रारी हार के बाद बहुत से लोगों को(यहाँ तक कि मुझे भी) यही आशा थी कि आज के अन्तिम मैच में भी भारतीय टीम कुछ ख़ास न कर पाएगी और दक्षिण अफ़्रीका आख़िरकार श्रृंख़ला ले ही जाएगी। पर टीम इंडिया ने जबरदस्त वापसी करते हुए मुम्बई के वानख़ेड़े स्टेडियम में हज़ारों की तदाद में आए दर्शकों को निराश न किया और मैच 5 विकटों से जीत लिया।

पहले क्षेत्ररक्ष्ण का निर्णय लेते हुए कप्तान द्रविड़ ने दक्षिण अफ़्रीका को पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए आमंत्रित किया। चाल कामयाब रही और पठान तथा हरभजन ने दक्षिण अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों का जीना हराम कर दिया। उनका भरपूर साथ दिया मुरली कार्थिक, सहवाग और युवराज ने। भज्जी ने सिर्फ़ गेंद से ही नहीं बल्कि अपने क्षेत्ररक्ष्ण से भी कमाल दिखलाया। दक्षिण अफ़्रीका के हाल इतने बुरे थे कि पंद्रहवें ओवर के बाद, लगभग बीस ओवर तक उनसे कोई चौका या छक्का ही न लगा और वे बेचारे पिच पर ही पसीना बहते हुए रन बटोरते रहे। वह तो जैक़ कॉलिस और विकेट कीपर मार्क बाउचर ने 81 रन के योगदान से पारी को संभाल लिया वरना दक्षिण अफ़्रीका ने मुँह के बल गिरना था। आख़िरकार दक्षिण अफ़्रीका ने नोच खसोट कर 6 विकेट ख़ो कर 221 रन बनाए।

भारतीय पारी की शुरुआत गौतम गंभीर और तेंदुलकर ने की। गंभीर को न जाने क्या जल्दी थी कि वह दूसरे ओवर में ही चलते बने। तीसरे क्रमांक पर आए वीरेन्द्र सहवाग ने आते ही अपना रंग दिख़ाया और नजफ़गढ के कसाई ने ऐसे पॉलक एण्ड कंपनी की जमकर ठुकाई की कि देख़ने वाले भी वाह वाह कर उठे। अपने घरेलू मैदान पर ख़ेल रहे तेंदुलकर भी कहाँ पीछे रहने वाले थे, उन्होने भी ख़ूब आतिशबाज़ियाँ की। पर सहवाग की सुलगती पारी का जल्द ही अन्त हुआ और ” द वॉल ” का आगमन हुआ। तेंदुलकर पूरी लय में थे परन्तु एक जबरदस्त कैच ने उनके बढते कदम रोक दिए। तीन विकेट लिकल गए थे और दिल्ली अभी दूर थी, इसलिए युवराज और द्रविड़ ने संभल कर ख़ेलना शुरु किया और युवराज के वापस लौटने तक मामला काफ़ी हद तक अपने हक में आ चुका था। आज ” द वॉल ” सीना ताने ख़ड़ी रही और आख़िर में भारत 5 विकेट से विजयी हुआ, और द्रविड़ को अपने अविजीत 78 रन की वजह से मैन-ऑफ़-द-मैच के पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

अब भारतीय रंणबाँकुरे श्रीलंका में टेस्ट श्रृंख़ला के लिए जाएँगे और दक्षिण अफ़्रीका जाएगी आस्ट्रेलिया। उम्मीद है कि भारतीय टीम के प्रर्दशन में कोई कमी न आएगी और श्रीलंका से भी वे विजयी लौटेंगे।

Categories: cricket · क्रिकेट

हिन्दी में क्यों?

November 26, 2005 · 2 Comments

कुछ लोगों को जिन्हें मैंने इस ब्लाग के बारे में बताया, उनमें से कुछ को तो यह अच्छा लगा, कुछ ने तारीफ़ की तो कुछ ने मुझसे पूछा कि मैंने हिन्दी में लिख़ने का निर्णय क्यों लिया। मेरा उत्तर था कि मैंने हिन्दी भाषा को इसलिए चुना क्योंकि दुर्भाग्यवश मुझे अंग्रेज़ी और हिन्दी के अलावा कोई और भाषा नहीं आती(मैं पहला अवसर मिलते ही इस भूल को सुधारूँगा) और अंग्रेज़ी में तो मैं पहले से ही लिख़ता हूँ। परन्तु इसके आगे विस्तार करते हुए मैंने कहा कि हिन्दी लिख़ने का मेरा अभ्यास लगभग छह वर्षों से छूटा हुआ था और मैं वापस हिन्दी में लिख़ना चाहता था, हालाँकि हिन्दी तो मैं रोज़ ही बोलता-सुनता हूँ किन्तु हिन्दी बोलने में और लिख़ने में बहुत अन्तर है, बोलना बहुत आसान है और लिख़ना उतना ही कठिन है। पर समस्या यह थी कि मुझे हिन्दी टाईपिंग नहीं आती थी, परन्तु देवेंद्र परख़ के हिन्दी-राईटर सॉफ़्टवेयर ने मेरी सारी समस्या ही दूर कर दी।

इस साफ़्टवेयर की सहायता से मैं अंग्रेज़ी के अक्षरों का प्रयोग करके हिन्दी लिख़ सकता हूँ और यह सॉफ़्टवेयर उन अंग्रेज़ी अक्षरों को देवनागरी(यूनिकोड) लिपि में परिर्वतित कर देता है। यूनिकोड में होने के कारण ये हिन्दी के अक्षर विश्वव्यापी हैं क्यों कि इन्हें किसी भी आपरेटिंग सिस्टम पर देख़ा जा सकता है अगर वह यूनिकोड को पहचानता है और आज के लगभग सभी आपरेटिंग सिस्टम यूनिकोड को पहचानते हैं, तो इस लिए न किसी ख़ास फ़ाँट की ज़रूरत है(सिवाय एक यूनिकोड फ़ाँट के) और न किसी उलजलूल पेंतरे की, क्योंकि किसी भी भाषा को ब्राउज़र में दिख़ाना कठिन हो जाता है यदि उसकी लिपि अंग्रेज़ी लिपि से भिन्न है और आपको यह मालूम नहीं कि आपके श्रोता के कंप्यूटर में उस लिपि का फ़ाँट उपस्थित है कि नहीं। मैं इस क्षेत्र में कार्य कर चुका हूँ जहाँ मुझे एसी भाषाओं के श्रोताओं के लिए वेबसाईट बनानी पड़ी जिनकी लिपि अंग्रेज़ी से भिन्न थी, जैसे कि जापानी, कोरियाई और चीनी भाषाएँ, इसलिए मुझे ज्ञात है कि भिन्न लिपि का प्रयोग करना और उसे ब्राउज़र में सही दिख़ाना कितना कठिन है।

इन्ही कुछ कारणों से मैंने हिन्दी में लिख़ने का निर्णय लिया, क्योंकि यह ब्लाग ख़ाली पड़ा था और मुझे इसका कोई प्रयोग नहीं सूझ रहा था, तो मैंने सोचा कि इससे बेहतर प्रयोग और क्या हो सकता है!! :)

तो बस यही हैं इस ब्लाग और हिन्दी में लिख़ने के कुछ कारण और विचार। मैं यह नहीं जानता कि मैं कब तक ऐसा कर पाऊँगा, परन्तु मेरा पूरा प्रयत्न होगा, और आगे देख़ा जाएगा!! ;)

Categories: mindless rants · फ़ालतू बड़बड़

टीम इंडिया, वाह भई वाह - भाग 2!!

November 25, 2005 · No Comments

टीम इंडिया ने आख़िर वह कर दिख़ाया जिसकी मुझे पूरी उम्मीद थी, वो आख़िरकार दक्षिण अफ़्रीका से हार गई। और हारी भी तो कैसे? 10 विकेट से!! पहले तो स्कोर नहीं बनाया, केवल 188 रन पर सिमट गए और उसके बाद तो कमाल ही हो गया, दक्षिण अफ़्रीका ने बिना एक भी विकेट गंवाए भारतीय रणबाँकुरों का मुँह काला कर दिया!! यानि कि बल्लेबाज़ नाकाम, गेंदबाज़ नाकाम और क्षेत्ररक्षण में तो टीम इंडिया की कोई सानी है ही नहीं!! :roll:

तो अब तक जो जिह्वाएँ स्टार कोच और अँबुजा सीमेंट के मज़बूत जोड़ से बने ” द वॉल ” की मज़बूत कप्तानी पर पुष्प वर्षा करते नहीं थक रहीं थी, क्या अब इस शर्मनाक हार के बाद उन्हीं जिह्वाओं से प्रतिवाद का स्वर निकलेगा? :roll: नहीं, मैं नहीं समझता कि ऐसा होगा, होना भी नहीं चाहिए, पर लोगों में कम से कम इतनी अक्ल तो आनी चाहिए कि कोई एक ही रात में तोप नहीं हो जाता और हमारे विश्व-कप विजेता कप्तान कपिल देव भी यही कहते हैं, कि नए कोच और नए कप्तान की योग्यता को परख़नें में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, वे कितने काबिल हैं यह कुछ समय बाद ही पता चल पाएगा। :)

मेरे अनुसार भारतीय ख़िलाड़ियों को अब अपना ध्यान अठ्ठाईस(2 8) तारीख़ को मुम्बई में होने वाले आख़िरी मुकाबले पर देते हुए कमर कस लेनी चाहिए, श्रृंख़ला तो अब जीत नहीं सकते, कम से कम हारना तो नहीं चाहिए। जहाँ तक मेरा अनुमान है, मुम्बई की पिच बल्लेबाज़ों के पक्ष में होगी, तो इस लिए आवश्यक हो जाता है कि टीम इंडिया जमकर अफ़्रीकी गेंदबाज़ों की पिटाई करे और एक अच्छा स्कोर खड़ा करे जिसका हमारे गेंदबाज़ ठीक से बचाव कर सकें और श्रृंख़ला को बराबर कर दें। जाहिर सी बात है कि मेरे कहने का अर्थ है कि भारतीय रणबाँकुरों को पहले बल्लेबाज़ी करनी चाहिए और जहाँ तक मैं समझता हूँ, दक्षिण अफ़्रीकी कप्तान स्मिथ कोई मूर्ख़ नहीं है, तो आवश्यक है कि द्रविड़ टॉस भी जीतें, लेकिन इस पर उनका कोई ज़ोर नहीं, तो इस लिए अपनी किस्मत पर भरोसा रख़ें और जहाँ ज़ोर चल सकता है(बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण) वहाँ ज़ोर चलाएँ।

Categories: cricket · क्रिकेट

टीम इंडिया, वाह भई वाह!!

November 25, 2005 · 3 Comments

टीम इंडिया के क्या कहने, स्टार कोच के क्या कहने, और दक्षिण अफ़्रीका के बारे में तो पूछो ही मत!! पिछला मैच जीतने पर लोग वाह-वाह करते नहीं थक रहे थे कि क्या कोच है और टीम इंडिया तो फ़िर टीम इंडिया है। पर अब क्या हुआ? स्टार कोच को जुकाम हो गया और टीम इंडिया को नज़र लग गई क्या? 20 ओवर से पहले ही 71 रन और 5 आउट!! अगर ऐसा ही चलता रहा तो बल्ले-बल्ले हो जाएगी। कहने का मतलब है कि गांगुली को नीचा दिख़ाने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं, नए आए कोच को इतना कारगर दिख़ा सकते हैं जैसे कि वो कोच न हुआ ख़ुदा हो गया!! अरे भई, कोच नया है और वो रातों रात कोई चमत्कार नहीं दिख़ा सकता, कोई इतना बड़ा तीसमारख़ां नहीं होता। नया कोच है, उसे जमने में समय लगेगा और कुछ समय बाद ही उसके योगदान का मूल्यांकन हो सकेगा कि वह अच्छा है कि नहीं।

और हमारे नए नवेले कप्तान साहब के क्या हाल हैं? ” द वॉल ” का सीमेंट तो लगता है कि झड़ ही गया है जिसके कारण वह ढहने लगी है!! गांगुली की ख़राब फ़ार्म का डंका पीटने वालों को क्या नए कप्तान का रनों का सरोवर सूख़ा हुआ नहीं दिख़ा? क्या हमारे सूरदास चयनकर्ता यह न देख़ पाए कि ज्यादातर बल्लेबाज़ों की बल्लेबाज़ी को कप्तान बनने के बाद ग्रहण लग जाता है? क्या तेंदुलकर के साथ दो बार ऐसा नहीं हुआ? जब तेंदुलकर जैसे विख़्यात और कुशल बल्लेबाज़ के साथ ऐसा हो सकता है तो फ़िर गांगुली क्या चीज़ है? लेकिन क्या कह सकते हैं, भारतीय क्रिकेट बोर्ड तो एक मज़ाक है जिनका पाँच सितारा होटलों के वातानुकूलित कमरों में बैठ कर घंटों वाद-विवाद करने के सिवाय कोई काम नहीं है!! चयनकर्ता समीति और बाकी समीतियों में ऐसे पूर्व ख़िलाड़ी भरे हुए हैं जो कि अपने समय में तो कुछ ख़ास कर नहीं पाए(मेरा ईशारा जाहिर है कि सूरदासों के अध्यक्ष की ओर है) और अब बेहतरीन ख़िलाड़ियों से उन्हें जलन होती है कि उनके पास बोलने और जवाब देने के लिए जुबान क्यों है।

ख़ैर फ़िलहाल यदि मैच की स्थिति पर ध्यान दिया जाए तो हालत अच्छी नहीं है, 36 वें ओवर की 3 गेंदें हुई हैं और युवराज के अभी अभी आउट होने से स्कोर 152 रन पर 6 विकेट हो गया है। अच्छी ख़ासी साझेदारी चल रही थी कि उसका भी बैंड बज गया!! अब धूनी और कैफ़ पर ही उम्मीद कायम है कि ये दोनों स्कोर को 250 के आस पास पहुँचा दें तो जीतने की कुछ आशा है वरना स्थिति निराशाजनक तो है ही!!

Categories: cricket · क्रिकेट

लालू राज का अन्त!!

November 24, 2005 · 3 Comments

आठ महीने पुराने राष्ट्रपति शासन की समाप्ती के साथ ही बिहार में हुआ लालू राज का अन्त और नीतिश के आ गए मजे!! 15 साल बाद बिहार में पहली बार ऐसी सरकार बनी है जो कि लालू के नेतृत्व में नहीं है। गौरतलब है कि लालू को जब पुलिस हिरासत में लेकर जेल भेजा गया था तो वो अपनी जगह अपनी धर्मपत्नी श्रीमती राबड़ी देवी को बिहार की मुख़्यमन्त्री बना गए थे, जैसे कि मुख़्यमन्त्री पद न हुआ घर की ख़ेती हो गई!! पर अब वो दिन बीत गए रे भैया, सुख के दिन आयो रे(बिहारियों के लिए)!! ;)

आज नीतिश कुमार ने पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 13 अन्य पार्टी सदस्यों के साथ बिहार के तेईस्वें(23) मुख़्यमन्त्री के रूप में शपथ ली। बिहार में भाजपा के अध्यक्ष, श्री सुशील कुमार मोदी, उप-मुख़्यमन्त्री के रूप में कार्यभार सम्भालेंगे। इस ऐतिहासिक मौके पर(आख़िर 15 साल बाद कोई नई सरकार आई है) कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिनमें पूर्व-प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, मध्यप्रदेश मुख़्यमन्त्री बाबूलाल गौर, उड़ीसा मुख़्यमन्त्री नवीन पटनायक, झारखंड मुख़्यमन्त्री अर्जुन मुन्डा आदि प्रमुख थे।

तो अब विचार करने वाली बात यह है कि इस तख़्तापलट से क्या बिहार का कुछ भला होगा? जहाँ अन्य राज्य प्रगति करते जा रहे हैं वहीं लालू राज के चलते अब तक बिहार एक पिछड़ा राज्य बना रहा जो कि अब भी 18वीं शताब्दी में जी रहा है। व्यापारियों का दुकान चलाना मुश्किल था, लालू के घर में कुछ उत्सव हो तो मेहमानों की आवभगत के लिए दुकानें लूट ली जाती थी, शोरूमों से नई गाड़ियाँ उठा ली जाती थी, फ़र्नीचर ईत्यादी भी दुकानों से ज़बरन बिना मोल दिए उठा लिया जाता था, जैसा कि लालू की बेटी की शादी के अवसर पर हुआ था। कहने का अर्थ है कि अब तक बिहार में अंधेर नगरी, चौपट राजा वाला हिसाब था। क्या अब नई सरकार आने से कुछ सुधार की आशा की जा सकती है? या फ़िर एक गया दूसरा आया वाली बात होने वाली है?

Categories: politics · राजनीति

अफ़्रीकी विजय यात्रा की समाप्ती!!

November 20, 2005 · 4 Comments

बंगलूर में ख़ेले गए दिन-रात्री के एक-दिवसीय मुकाबले में भारतीय रणबाँकुरों ने 6 विकिटों से जीत हासिल करके आख़िरकार दक्षिण-अफ़्रीका के विजय रथ को रोक ही दिया और इस श्रृंख़ला में 1-1 से अपनी पकड़ बराबर कर ली। दक्षिण-अफ़्रीका अब तक 20 एक-दिवसीय मुकाबलों में लगातार विजयी होती हुई आस्ट्रेलिया के 21 लगातार जीतों के कीर्तीमान की ओर बढ रही थी, लेकिन भारत आकर उसकी विजय यात्रा उसी प्रकार समाप्त हो गई जिस प्रकार आस्ट्रेलिया की 16 टेस्ट मैचों की हुई थी।

घरेलू मैदान पर पहली बार कप्तानी कर रहे राहुल द्रविड़ ने टॉस जीत कर दक्षिण-अफ़्रीका को टर्न लेती हुई पिच पर पहले बल्लेबाज़ी करने के लिए आमन्त्रित किया। चाल कामयाब रही और पठान की बेहतरीन गेंदबाज़ी की बदौलत दक्षिण-अफ़्रीकी टीम 20 रन के स्कोर पर 3 विकेट खो कर पानी मांग रही थी। 100 रन के स्कोर तक पहुँचते-पहुँचते उनकी आधी से ज्यादा टीम वापस पैविलियन लौट चुकी थी। मुरली कार्तिक ने अपने 10 ओवरों में केवल 16 रन देकर दिख़ाया कि स्पिन गेंन्दबाज़ी कैसे की जाती है, हांलाकि कार्तिक को कोई विकेट नहीं मिला। हरभजन और सहवाग ने 2-2 विकेट झटके जबकि आगरकर और युवराज ने 1-1 विकेट लेकर अपना योगदान दिया। दक्षिण-अफ़्रीका अपने 50 ओवरों में केवल 169 का स्कोर ही बना पाई।

भारतीय बल्लेबाज़ी की शुरुआत गौतम गम्भीर और सचिन तेंदुलकर ने की। दक्षिण-अफ़्रीकी बल्लेबाज़ों की असफ़लता के बावजूद उनके गेंदबाज़ों ने हार नहीं मानी, भारत का ख़ाता 22 गेंदों बाद ख़ुला और 13 के स्कोर पर ही उन्होंने सचिन तेंदुलकर को 2 रन के निजी स्कोर पर वापस भेज दिया। गौतम गम्भीर ने पारी सम्भालनी चाही पर सत्रहवें ओवर में वे जस्टिन ओन्टोंग द्वारा 38 के निजी स्कोर पर रन आउट कर दिये गए। पठान को पुनः तीसरे नंबर पर भेजा गया और सहवाग को ईस बार चौथे नंबर पर भेजा गया। पठान और सहवाग ने 53 रनों की साझेदारी निभाई और 105 के स्कोर पर पठान के आउट होने पर कप्तान राहुल द्रविड़ ने आकर बल्लेबाज़ी की कमान सम्भाली और सहवाग के साथ 49 रन बनाए। 154 के स्कोर पर जब कप्तान साहब 10 रन बनाकर आउट हुए तब भारत को जीत के लीए केवल 16 रनों की आवश्यकता थी जो कि सहवाग और युवराज ने बना लिए। ईस मैच में सहवाग ने अविजीत 77 रन बना कर फ़ार्म में वापसी की, मेरे अनुसार यह अभी कहना अभी ठीक नहीं होगा। यह तो आने वाले अगले मैच और उनमें सहवाग का प्रदर्शन ही साबित करेगा कि फ़ार्म में वापसी हुई कि नहीं!! पठान को गेंद और बल्ले से बेहतरीन प्रदर्शन के लिए मैन-आफ़-द-मैच चुना गया।

बहुत से लोग भारत की विजय पर अत्यधिक प्रसन्न हो रहे होंगे, जबकि मेरा यह मानना है कि श्री-लंका की टीम जब यहाँ आई थी तो उनमें एक तरह से जंग लगा हुआ था क्योंकि उन्होने कुछ समय से कोई मैच नहीं खेला था। लेकिन दक्षिण-अफ़्रीका की टीम यहाँ विजय रथ पर सवार होकर आई है और रैंकिंग कुछ भी कहे, मैं दक्षिण-अफ़्रीका को श्री-लंका से बेहतर टीम मानता हूँ। ईसलिए जब भारतीय टीम यह श्रृंख़ला जीत लेगी, तभी मैं मानूँगा कि वाकई टीम के प्रदर्शन में सुधार हुआ है।

अब इस श्रृंख़ला में तीन मैच रह गए हैं जो कि चेन्नई(22 नवंबर), कोलकाता(25 नवंबर) और मुम्बई(28 नवंबर) में ख़ेले जाने हैं और तीनों ही दिन-रात्री के मुकाबलें हैं।

Categories: cricket · क्रिकेट

क्या कल भारत जीतेगा?

November 18, 2005 · No Comments

क्या कल बंगलूर में होने वाले क्रिकेट के एक दिवसीय खेल में भारत दक्षिण-अफ्रीका को हरा पाएगा? पिछले मुकाबले में भारत को 5 विकटों से हार का सामना करना पड़ा था, लेकिन विचारणीय बात यह है कि पहले बल्लेबाज़ी करते हुए भारत ने 5 विकट केवल 35 के योग पर खो दिए थे। उसके बाद खेल में वापसी करते हुए भारत ने 250 रन का लक्ष्य दक्षिण-अफ्रीका के सामने रखा था और दक्षिण-अफ्रीका उस को आखरी ओवर में ही पार कर पाई थी। यानि कि भारतीय टीम ने कड़ी चुनौती दी थी। तो क्या कल दिन-रात के मुकाबले में भारतीय टीम वापसी करते हुए मैच जीत पाएगी?

अगर सटोरियों पर विश्वास किया जाए तो वे लोग नहीं समझते कि भारत की जीत की कोई उम्मीद है। बाज़ार में 4-1 का भाव मिल रहा है!! अब देख़ना तो यह है कि हमारे स्टार कोच श्री ग़्रेग चेपल अपनी कौन सी तोप चला के दक्षिण-अफ्रीका की मज़बूत टीम और उसके तेज़ ग़ेन्दबाज़ों की तिगड़ी(पोलाक, एंटीनी, नेल) को ध्वस्त कर पाते हैं क्योंकि यदि कल भी भारतीय रणबाँकुरे हार गए तो उनकी इस 5 एक दिवसीय मैचों की श्रिंख़ला में वापसी लगभग असंभव हो जाएगी, आख़िर दक्षिण-अफ्रीका के ख़िलाड़ी कोई बच्चे तो हैं नहीं कि जीती जिताई सीरीज़ हाथ से निकल जाने देंगे!!

और फ़िर यह भी नहीं भूलना चाहिए कि इज्ज़त कमाने के लिए अपने आपको साबित करना पड़ता है, और हमारे स्टार कोच ने अभी तक ऐसा कोई तीर नहीं मारा। वे तो सोचते हैं कि हम लोग बस खड़े-खड़े ही उनको पहुँची हुई शख़्सीयत मान लें। श्री लंका को 6-1 से हराना कोई बड़ा काम नहीं था क्योंकि उनका तो समय एवं फ़ार्म दोनो ही ख़राब चल रहे थे, लेकिन दक्षिण-अफ्रीका ज़रा टेड़ी ख़ीर साबित होगी। श्री ग़्रेग चैपल को ये जान लेना चाहिए कि इज्ज़त कमाई जाती है, वो मन्दिर का प्रसाद नहीं है कि हर एरे गेरे को मिल जाए। तो इसलिए उन्हें चाहिए कि बेकार की चीज़ो से सनसनी फ़ैलना बन्द करें और अपने काम की ओर ध्यान दें जो कि टीम और उनके हित में है, वरना कहीं ऐसा न हो कि जैसे उन्होंने सॉरव गांगुली को टीम से बाहर करवाया है, वैसे ही उन्हें भी भारतीय क्रिकेट र्बोड कहीं लात न मार दे!! ;)

Categories: cricket · क्रिकेट

नमस्कार - Hello World!!

November 18, 2005 · 3 Comments

मेरे इस नये ब्लाग पर आपका स्वागत है। मैं यहाँ अपने विचार एवं नज़रिया अपनी भाषा में व्यक्त करूंगा। मेरा पूरा प्रयत्न होगा कि केवल हिन्दी का प्रयोग करूं परन्तु हिन्दी में उर्दु भाषा बहुत ज्यादा घुलमिल चुकी है जिसके कारण शुद्ध हिन्दी बहुत कम लोगों को आती है और मेरा अभ्यास भी छूट चुका है। पर कोशिश करने में क्या जाता है। ;)

तो इन्तज़ार कीजिए, क्यों कि सब्र का फ़ल मीठा होता है। :)

Welcome to my new blog. Here I’ll express my views & opinions in my own language. I’ll try my best to use only hindi but many of urdu dialects have merged into hindi & that’s why number of people knowing pure hindi is quite less & I’m out of touch as well, its quite difficult. But why not try it? ;)

So wait & watch, patience is a virtue!! :)

Categories: mindless rants · फ़ालतू बड़बड़