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टीम इंडिया, वाह भई वाह - भाग 2!!

November 25, 2005 · No Comments

टीम इंडिया ने आख़िर वह कर दिख़ाया जिसकी मुझे पूरी उम्मीद थी, वो आख़िरकार दक्षिण अफ़्रीका से हार गई। और हारी भी तो कैसे? 10 विकेट से!! पहले तो स्कोर नहीं बनाया, केवल 188 रन पर सिमट गए और उसके बाद तो कमाल ही हो गया, दक्षिण अफ़्रीका ने बिना एक भी विकेट गंवाए भारतीय रणबाँकुरों का मुँह काला कर दिया!! यानि कि बल्लेबाज़ नाकाम, गेंदबाज़ नाकाम और क्षेत्ररक्षण में तो टीम इंडिया की कोई सानी है ही नहीं!! :roll:

तो अब तक जो जिह्वाएँ स्टार कोच और अँबुजा सीमेंट के मज़बूत जोड़ से बने ” द वॉल ” की मज़बूत कप्तानी पर पुष्प वर्षा करते नहीं थक रहीं थी, क्या अब इस शर्मनाक हार के बाद उन्हीं जिह्वाओं से प्रतिवाद का स्वर निकलेगा? :roll: नहीं, मैं नहीं समझता कि ऐसा होगा, होना भी नहीं चाहिए, पर लोगों में कम से कम इतनी अक्ल तो आनी चाहिए कि कोई एक ही रात में तोप नहीं हो जाता और हमारे विश्व-कप विजेता कप्तान कपिल देव भी यही कहते हैं, कि नए कोच और नए कप्तान की योग्यता को परख़नें में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए, वे कितने काबिल हैं यह कुछ समय बाद ही पता चल पाएगा। :)

मेरे अनुसार भारतीय ख़िलाड़ियों को अब अपना ध्यान अठ्ठाईस(2 8) तारीख़ को मुम्बई में होने वाले आख़िरी मुकाबले पर देते हुए कमर कस लेनी चाहिए, श्रृंख़ला तो अब जीत नहीं सकते, कम से कम हारना तो नहीं चाहिए। जहाँ तक मेरा अनुमान है, मुम्बई की पिच बल्लेबाज़ों के पक्ष में होगी, तो इस लिए आवश्यक हो जाता है कि टीम इंडिया जमकर अफ़्रीकी गेंदबाज़ों की पिटाई करे और एक अच्छा स्कोर खड़ा करे जिसका हमारे गेंदबाज़ ठीक से बचाव कर सकें और श्रृंख़ला को बराबर कर दें। जाहिर सी बात है कि मेरे कहने का अर्थ है कि भारतीय रणबाँकुरों को पहले बल्लेबाज़ी करनी चाहिए और जहाँ तक मैं समझता हूँ, दक्षिण अफ़्रीकी कप्तान स्मिथ कोई मूर्ख़ नहीं है, तो आवश्यक है कि द्रविड़ टॉस भी जीतें, लेकिन इस पर उनका कोई ज़ोर नहीं, तो इस लिए अपनी किस्मत पर भरोसा रख़ें और जहाँ ज़ोर चल सकता है(बल्लेबाज़ी, गेंदबाज़ी और क्षेत्ररक्षण) वहाँ ज़ोर चलाएँ।

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टीम इंडिया, वाह भई वाह!!

November 25, 2005 · 3 Comments

टीम इंडिया के क्या कहने, स्टार कोच के क्या कहने, और दक्षिण अफ़्रीका के बारे में तो पूछो ही मत!! पिछला मैच जीतने पर लोग वाह-वाह करते नहीं थक रहे थे कि क्या कोच है और टीम इंडिया तो फ़िर टीम इंडिया है। पर अब क्या हुआ? स्टार कोच को जुकाम हो गया और टीम इंडिया को नज़र लग गई क्या? 20 ओवर से पहले ही 71 रन और 5 आउट!! अगर ऐसा ही चलता रहा तो बल्ले-बल्ले हो जाएगी। कहने का मतलब है कि गांगुली को नीचा दिख़ाने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं, नए आए कोच को इतना कारगर दिख़ा सकते हैं जैसे कि वो कोच न हुआ ख़ुदा हो गया!! अरे भई, कोच नया है और वो रातों रात कोई चमत्कार नहीं दिख़ा सकता, कोई इतना बड़ा तीसमारख़ां नहीं होता। नया कोच है, उसे जमने में समय लगेगा और कुछ समय बाद ही उसके योगदान का मूल्यांकन हो सकेगा कि वह अच्छा है कि नहीं।

और हमारे नए नवेले कप्तान साहब के क्या हाल हैं? ” द वॉल ” का सीमेंट तो लगता है कि झड़ ही गया है जिसके कारण वह ढहने लगी है!! गांगुली की ख़राब फ़ार्म का डंका पीटने वालों को क्या नए कप्तान का रनों का सरोवर सूख़ा हुआ नहीं दिख़ा? क्या हमारे सूरदास चयनकर्ता यह न देख़ पाए कि ज्यादातर बल्लेबाज़ों की बल्लेबाज़ी को कप्तान बनने के बाद ग्रहण लग जाता है? क्या तेंदुलकर के साथ दो बार ऐसा नहीं हुआ? जब तेंदुलकर जैसे विख़्यात और कुशल बल्लेबाज़ के साथ ऐसा हो सकता है तो फ़िर गांगुली क्या चीज़ है? लेकिन क्या कह सकते हैं, भारतीय क्रिकेट बोर्ड तो एक मज़ाक है जिनका पाँच सितारा होटलों के वातानुकूलित कमरों में बैठ कर घंटों वाद-विवाद करने के सिवाय कोई काम नहीं है!! चयनकर्ता समीति और बाकी समीतियों में ऐसे पूर्व ख़िलाड़ी भरे हुए हैं जो कि अपने समय में तो कुछ ख़ास कर नहीं पाए(मेरा ईशारा जाहिर है कि सूरदासों के अध्यक्ष की ओर है) और अब बेहतरीन ख़िलाड़ियों से उन्हें जलन होती है कि उनके पास बोलने और जवाब देने के लिए जुबान क्यों है।

ख़ैर फ़िलहाल यदि मैच की स्थिति पर ध्यान दिया जाए तो हालत अच्छी नहीं है, 36 वें ओवर की 3 गेंदें हुई हैं और युवराज के अभी अभी आउट होने से स्कोर 152 रन पर 6 विकेट हो गया है। अच्छी ख़ासी साझेदारी चल रही थी कि उसका भी बैंड बज गया!! अब धूनी और कैफ़ पर ही उम्मीद कायम है कि ये दोनों स्कोर को 250 के आस पास पहुँचा दें तो जीतने की कुछ आशा है वरना स्थिति निराशाजनक तो है ही!!

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