दुनिया मेरी नज़र से – world from my eyes!!

टीम इंडिया, वाह भई वाह!!

नवम्बर 25, 2005 · 3 टिप्पणियां

टीम इंडिया के क्या कहने, स्टार कोच के क्या कहने, और दक्षिण अफ़्रीका के बारे में तो पूछो ही मत!! पिछला मैच जीतने पर लोग वाह-वाह करते नहीं थक रहे थे कि क्या कोच है और टीम इंडिया तो फ़िर टीम इंडिया है। पर अब क्या हुआ? स्टार कोच को जुकाम हो गया और टीम इंडिया को नज़र लग गई क्या? 20 ओवर से पहले ही 71 रन और 5 आउट!! अगर ऐसा ही चलता रहा तो बल्ले-बल्ले हो जाएगी। कहने का मतलब है कि गांगुली को नीचा दिख़ाने के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक जा सकते हैं, नए आए कोच को इतना कारगर दिख़ा सकते हैं जैसे कि वो कोच न हुआ ख़ुदा हो गया!! अरे भई, कोच नया है और वो रातों रात कोई चमत्कार नहीं दिख़ा सकता, कोई इतना बड़ा तीसमारख़ां नहीं होता। नया कोच है, उसे जमने में समय लगेगा और कुछ समय बाद ही उसके योगदान का मूल्यांकन हो सकेगा कि वह अच्छा है कि नहीं।

और हमारे नए नवेले कप्तान साहब के क्या हाल हैं? ” द वॉल ” का सीमेंट तो लगता है कि झड़ ही गया है जिसके कारण वह ढहने लगी है!! गांगुली की ख़राब फ़ार्म का डंका पीटने वालों को क्या नए कप्तान का रनों का सरोवर सूख़ा हुआ नहीं दिख़ा? क्या हमारे सूरदास चयनकर्ता यह न देख़ पाए कि ज्यादातर बल्लेबाज़ों की बल्लेबाज़ी को कप्तान बनने के बाद ग्रहण लग जाता है? क्या तेंदुलकर के साथ दो बार ऐसा नहीं हुआ? जब तेंदुलकर जैसे विख़्यात और कुशल बल्लेबाज़ के साथ ऐसा हो सकता है तो फ़िर गांगुली क्या चीज़ है? लेकिन क्या कह सकते हैं, भारतीय क्रिकेट बोर्ड तो एक मज़ाक है जिनका पाँच सितारा होटलों के वातानुकूलित कमरों में बैठ कर घंटों वाद-विवाद करने के सिवाय कोई काम नहीं है!! चयनकर्ता समीति और बाकी समीतियों में ऐसे पूर्व ख़िलाड़ी भरे हुए हैं जो कि अपने समय में तो कुछ ख़ास कर नहीं पाए(मेरा ईशारा जाहिर है कि सूरदासों के अध्यक्ष की ओर है) और अब बेहतरीन ख़िलाड़ियों से उन्हें जलन होती है कि उनके पास बोलने और जवाब देने के लिए जुबान क्यों है।

ख़ैर फ़िलहाल यदि मैच की स्थिति पर ध्यान दिया जाए तो हालत अच्छी नहीं है, 36 वें ओवर की 3 गेंदें हुई हैं और युवराज के अभी अभी आउट होने से स्कोर 152 रन पर 6 विकेट हो गया है। अच्छी ख़ासी साझेदारी चल रही थी कि उसका भी बैंड बज गया!! अब धूनी और कैफ़ पर ही उम्मीद कायम है कि ये दोनों स्कोर को 250 के आस पास पहुँचा दें तो जीतने की कुछ आशा है वरना स्थिति निराशाजनक तो है ही!!

Categories: cricket · क्रिकेट

3 responses so far ↓

  • Anunad Singh // नवम्बर 26, 2005 at 10:11 am

    दूसरों के निर्णयो और विचारों की आलोचना के साथ-साथ टीम इन्डिया को उत्कृष्ट बनाने के बारे में अपने विचार भी तो प्रस्तुत कीजिये |

  • world from my eyes - दुनिया मेरी नजर से!! // नवम्बर 27, 2005 at 12:12 am

    टीम इंडिया, वाह भई वाह – भाग 2!!

    टीम इंडिया ने आख़िर वह कर दिख़ाया जिसकी मुझे पूरी उम्मीद थी, वो आख़िरकार दक्षिण अफ़्रीका से हार गई। औம.

  • Amit // नवम्बर 27, 2005 at 12:15 am

    अनुनाद, टीम को उत्कृष्ट बनाने के बारे में मेरे विचार वही हैं जो कि अन्य बुध्दिजीवियों के हैं, कि ग्रेग चैपेल को अपने अहं के रथ से नीचे उतर कर टीम के बारे में सोचना चाहिए और उनकी कमज़ोरियों को दूर करने की ओर अपना ध्यान लगाना चाहिए।

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