दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!

पता नहीं …..

September 14, 2006 · 7 Comments

पता नहीं क्या हो रहा है, आजकल कुछ लिखने का मन ही नहीं करता। मेरा यह ब्लॉग जिस पर मैंने सोचा था कि अपने दिल की भड़ास निकाला करूँगा, यह अभी पिछली कुछ पोस्ट से लग रहा है कि एक ट्रैवल ब्लॉग बन के रह गया है, सिर्फ़ यात्राओं का वर्णन होता है और कुछ नहीं। या यूँ कहें कि लिखने के लिए कोई प्रेरणा नहीं मिल रही। अब यह मत पूछना कि प्रेरणा कौन है, क्योंकि अभी तो मुझे भी नहीं पता!! ;)

अभी पिछले सप्ताह नारद जी ने अपने मेज़बान(जिनके यहाँ विराज रहे थे) को अपनी निरंतर आवजाही से नाराज़ कर दिया, तो कड़क कर मेज़बान ने कह दिया कि या तो आवाजाही बन्द करो या फ़िर बोरिया बिस्तर समेट फूट लो!! अब नारद जी क्या करें, आदत से मजबूर, इधर उधर की खबर ना रखें तो खाना कैसे हजम हो, उनपर तो हाजमोला भी असर नहीं करती!! तो नए मेज़बान की तलाश आरम्भ हुई, उधर हमने सोचा कि नारद जी के अंतर्ध्यान हो हर जगह की खबर रखने वाली तकनीक को जाँचा जाए, वरना दूसरा मेज़बान भी धक्का दे देगा अपने यहाँ से। लगा कि उनके टेलीपोर्टर में कुछ पंगा है, कदाचित्‌ बहुत आवाज़ करता होगा जिससे मेज़बान के बच्चे डर जाते होंगे। तो हमने सोचा कि चलो नया बना देते हैं। अभी नया बना ही रहे थे कि दिमाग में विचार कौंधा कि क्यों ना मौजूदा टेलीपोर्टर में फ़ेर-बदल कर देखा जाए? समय और मेहनत दोनों ही बच भी सकते हैं, अधिक भी लग सकते हैं(काम ना बनने की स्थिति में)। पंगा ले लिया और Feeder लगा दिया अस्थाई जुगाड़ के रूप में, सोचा कि बल्ले भई, चकाचक चल रिया है, मौज हो गई।

पर नई खबर तो ला नहीं रहा था यह जुगाड़, असमंजस की स्थिति थी। नारद के प्रमुख डिप्टी अपने जीतू भाईसाहब को पुकारा। एक नज़र अन्दरूनी मशीनरी पर डाल उनकी प्रतिक्रिया ऐसी थी कि यदि मैं सामने होता तो मेरे को डंडा मार देते!! बोले कि नाम डुबो दिया मैंने, एक काम ढंग से नहीं हुआ। मेरी हवा टाईट हो गई, पूछा बताओ कहाँ गलती हुई। गलती पता चली, वापस आधे पुर्जे हटा के दोबारा उनकी देखरेख में लगाए तब जाकर कुछ संतोषजनक काम हुआ। लेकिन सेमीकंडक्टर घटिया क्वालिटी का था, लेकिन अब कुछ कर नहीं सकते, इसलिए उसके साथ थोड़ी छेड़खानी की और मामला कुछ और संतोषजनक हुआ।

उधर खबर मिल रही थी कि नारद जी के लिए नया मेज़बान ढूँढ लिया गया है, अब उनके साथ कुछ सेटिंग आदि चल रही है। इधर हमने नारद के टेलीपोर्टर का जो फ़ेरबदल कर नवीनतम मॉडल बनाया वो बढ़िया परफ़ॉर्मेन्स दे रहा है। बस नारद जी के नए घर में सेटल होते ही उनको ये नया टेलीपोर्टर सौंप दिया जाएगा। इधर एक समस्या नारद जी को शिफ़्ट करने में भी थी, खर्चा कुछ अधिक होना था। इस पर भक्तजन तनिक भी ना घबराए, पूछे जाने पर बहुतों ने अपनी रज़ामन्दी दी, और देने के नाम पर दिल खोल भेंटें दीं जो कि अभी भी थमी नहीं हैं। :) वाह जी वाह, क्या भक्ति है।

सोच रहा हूँ कि इधर बहुत दिनों से जादु वाली नज़र बन्द पड़ी है, तो क्यों ना उससे दुनिया का कुछ नज़ारा किया जाए। या फ़िर श्रद्धालु जनों को फ़िर अपनी आवाज़ में कुछ ज्ञान दिया जाए। चलो देखते हैं, जैसे समय लगता है वैसे ही कुछ ना कुछ पकाएँगे। फ़िलहाल अभी कुछ चीज़ों ने व्यस्त कर रखा है, एक के बारे में जल्द ही घोषणा की जाएगी, जीतू भाईसाहब ऐसा कह ही चुके हैं। तो उसका भी इंतज़ार कीजिए और हमारा भी!! ;)

Categories: mindless rants · फ़ालतू बड़बड़

7 responses so far ↓

  • Anurag // September 14, 2006 at 11:12 am

    cool, lage raho amit bhai. ;)

    this theme looks neat & simple, a good choice, that old yellow one was starting to look boring. how about doing a better header? this one’s not looking that good!! :)

  • Amit // September 14, 2006 at 11:18 am

    धन्यवाद अनुराग। वो पुरानी वाली theme को इसलिए झेल रहे थे क्योंकि वही इकलौती theme उपलब्ध थी जिसमें हिन्दी फ़ाँट बड़ा दिखाई देता था, अन्य सभी में छोटा दिखता था जिसे कई लोगों को पढ़ने में दिक्कत होती थी। लेकिन अभी एकाध दिन पहले जब यह theme उपलब्ध करवाई गई तो देखा कि इसमें पुरानी theme जितना बड़ा तो नहीं दिखता पर फ़िर भी पढ़े जा सकने लायक दिखता है, इसलिए इसे लगा दिया। रही बात header की तो design वगैरह में अपना हाथ उतना नहीं बैठा हुआ, बस थोड़ा बहुत ही चलता है, इसलिए इससे बढ़िया बना पाऊँगा यह निश्चित रूप से नहीं कह सकता, हाँ खाली समय में प्रयास अवश्य करूँगा। :)

  • SHUAIB // September 15, 2006 at 6:30 pm

    हां - वोह पुराने theme मे पोस्ट का फांट साइड बडा था मगर टाइटल छोटा ;)
    ये वाला theme बहुत बढिया है अमीतजी, लग रहा है कि ये ब्लॉग है - लगे रहो :)

  • Rachana // September 15, 2006 at 9:23 pm

    ‘नारद’ का काम पूरा होने पर जल्दी से “प्रेरणा” ढूँढो और लिखो!!

  • Amit // September 16, 2006 at 11:35 am

    हां - वोह पुराने theme मे पोस्ट का फांट साइड बडा था मगर टाइटल छोटा

    नहीं जी, टाईटल का आकार भी बड़ा था, कम से कम IE तथा Opera में तो बड़ा दिखता था, बाकी किसी की गारंटी नहीं है। ;)

    ये वाला theme बहुत बढिया है अमीतजी, लग रहा है कि ये ब्लॉग है

    धन्यवाद शोएब साहब। :)

    ‘नारद’ का काम पूरा होने पर जल्दी से “प्रेरणा” ढूँढो और लिखो!!

    अजी ‘नारद’ के बाद और भी आवश्यक कार्य हैं, ‘नारद’ का कार्य तो आपात स्थिति में चल रिया है। और “प्रेरणा” को कहाँ ढूँढें? उसका पता वता तो अपने को मालूम नहीं!! ;)

  • Pooja // October 2, 2006 at 8:55 pm

    Hello,

    I am new in the blog’s world. I came across your blog recently and you have done really good job in hindi ( this is my first hindi blog to be read)…. I also got inspired to write in hindi but I do not know how to use the hindi font… I have seen ur old blogs, I found that at few places you have guided how to use so let me try….

    Also the time I have seen your blog, the post “Patta nahi” is there…. when are you going to find and write new… hope to read your new post soon :-)

  • Amit // October 8, 2006 at 1:00 am

    I also got inspired to write in hindi but I do not know how to use the hindi font… I have seen ur old blogs, I found that at few places you have guided how to use so let me try….

    आप हिन्दी लिखने के बारे में जानकारी यहाँ प्राप्त कर सकती हैं।

    Also the time I have seen your blog, the post “Patta nahi” is there…. when are you going to find and write new… hope to read your new post soon :-)

    जैसे ही लिखने के लिए कुछ मसाला और समय मिलता है वैसे ही पुनः अवश्य लिखेंगे। :) वैसे नई पोस्ट लिख डाली है, नोश फ़रमाएँ। ;)

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