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अपना नाम स्वयं कैसे खराब करें?

January 10, 2007 · 2 Comments

क्या सिर्फ़ मेरा तजुर्बा ऐसा रहा है या वाकई भारतीय व्यवसायिक वेबसाइटें ऐसी हरकतें करती हैं जो कि समझदारी से बहुत दूर होती हैं?? पिछले कई वर्षों में ऐसे कई नमूने देखे हैं, अब ताज़ा तरीन नमूना पेश-ए-खिदमत है।

कुछ अरसा पहले वेबचटनी नामक कंपनी ने बड़े धूम धड़ाके के साथ एक ट्रैवल संबन्धी वेबसाइट ओके टाटा बॉय बॉय आरम्भ की थी जिसे वे लोग आज भी भारत की पहली ऑनलाइन ट्रैवल बिरादरी कहते है। अब कहने को तो हर कोई अपने को पहल करने वाला कहता है तो इसलिए इनके इस दावे को चुनौती नहीं दे रहा, लेकिन अब कोई खुद ही अपना नाम डुबाने की कोशिश करे तो क्या करें? इस वेबसाइट से कभी कभार विज्ञापन वाली ईमेल भेजी जाती है जिसमें वेबसाइट पर कुछ नया आरम्भ होने या किसी और बात की जानकारी दी जाती है। यहाँ तक तो सब ठीक है लेकिन समस्या आगे आती है। अब पता नहीं यह प्रबंधक समिति की समझदारी है या इस वेबसाइट के तकनीकी पक्ष संभालने वालों की, ये लोग ईमेल में अपना पता(जहाँ से ईमेल आई है) हमेशा गलत डालते हैं। पहले याहू/जीमेल जैसी मुफ़्त वाली ईमेल दिखाते थे और हर बार याहू के स्पैम फ़िल्टर उस ईमेल को स्पैम समझ इन्बॉक्स के बाहर बिठा देते थे।

कहते हैं समय बदलता है और लोगों का अंदाज़ बदलता है, वही आज हुआ। आज जब कई दिन बाद इनकी ईमेल आई तो पुनः स्पैम को रोकने वाले द्वारपालों ने उस ईमेल को बाहर बिठा दिया। ईमेल जाँचने पर पता चला कि इन लोगों ने अपने पिछले तरीके यानि मुफ़्त ईमेल सेवा के फ़र्जी पते को “ओके टाटा बॉय बॉय” कह दिया और अब फ़र्जी डोमेन के फ़र्जी पते को ईमेल भेजने वाले के तौर पर दिखा रहे हैं। इस बार ईमेल okttb.com से आई दिखाई गई।

ओके टाटा बॉय बॉय - धोखा या नासमझी?

एक नज़र देखने से आभास होता है कि okttb वास्तव में ok tata bye bye का छोटा रूप है। लेकिन अपना खुर्की दिमाग जो ठहरा, बखिया उधेड़ने की पुरानी आदत है। तो तुरंत जाँच करने से पता चल गया कि okttb.com इन चटनी वालों का है ही नहीं, और तो और, यह डोमेन तो अभी तक किसी ने रजिस्टर ही नहीं किया है!! यानि कि बिना डोमेन पर किसी अधिकार के उससे ईमेल भेजी जा रही है!! अब इसे तो सीधे सीधे स्पैम ही कहा जाएगा ना? और वह तो इनके लिए शुक्र की बात है कि इन्होंने भेजने वाले के स्थान पर okttb.com दिखाया, यदि गलती से अंत में एक b और लगा उसे okttbb.com दिखा देते तो गड़बड़ हो जाती, फ़िर तो सीधे सीधे चार सौ बीसी का मुकदमा चल सकता था क्योंकि okttbb.com डोमेन मेक माई ट्रिप वालों का है!! ;)

यह तो खैर तकनीकी बात हुई, अब प्रश्न है कि इससे वेबसाइट की और इसके पीछे चटनी वालों की साख पर क्या असर पड़ता है। तो बात यूँ है कि यदि अब कोई इस ईमेल का उत्तर दे कुछ पूछना चाहे तो कैसे पूछेगा? “रिप्लाई” यानि कि प्रतिउत्तर वाले बटन पर क्लिक करने से जो संदेश बनेगा वह तो फ़र्जी डोमेन के फ़र्जी पते पर जाएगा, यानि कि टांय टांय फ़िस्स!!! साफ़ पता चल जाएगा कि यह वेबसाइट और इसके पीछे की कंपनी विश्वसनीय नहीं है तो यदि कोई विज्ञापक विज्ञापन देने के लिए इस वेबसाइट वालों से संपर्क करना चाहे तो नहीं कर पाएगा, कंपनी को होने वाली कमाई तो गई ही गई, नाम पर भी अच्छे से काली रोशनी पड़ेगी।

यह सब मामला देख मुझे इस वेबसाइट के पीछे तकनीकी समझदारी दिखाने वालों की अक्ल पर तरस आता है कि इतने उच्च स्तरीय कंपनी होने का दावा और काज ऐसे निम्न स्तर के!! अब यदि यह किसी तरह की भूल है तो भी मामला गंभीर है, कम से कम कंपनी के लिए कि वे बिना जाँचे परखे ही अपना सामान बेचने के लिए काऊंटर पर रख देते हैं!!

चलो वैसे बढ़िया है, ऐसे लोग मौजूद रहेंगे तो बढ़िया काम करने वालों को अच्छे पैसे मिलते रहेंगे!!! ;)

Categories: mindless rants · फ़ालतू बड़बड़