दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!

चल गई ….. चल गई …..

May 8, 2007 · 8 Comments

अभी हाल ही की अपनी पोस्ट में मैंने अपने मोबाईल(नोकिआ एन 70) पर हिन्दी न चलने की समस्या के बारे में लिखा था। मेरे दूसरे मोबाईल, नोकिआ 7250i, में भी हिन्दी भाषा का विकल्प होने के बावजूद यूनिकोड हिन्दी ब्राउज़र में नहीं दिख रही थी।

Spicy Ice blog on Nokia 7250i अचानक ही एक दिन घूमते-घामते ऑपरा मिनी की वेबसाइट पर पहुँच गया। यह जावा में लिखा ऑपरा का मोबाईल के लिए फोकट वाला ब्राउज़र है, अन्यथा इसका रेगुलर ब्राउज़र फोकट नहीं है। जब देखा कि ऑपरा मिनी मेरे नोकिआ 7250i के लिए भी उपलब्ध है तो तुरंत इसको मोबाईल पर डाऊनलोड कर इंस्टॉल किया। सब हो चुकने के बाद मैंने सोचा कि इसमें भी ट्राई मार लिया जाए। मैंने स्पाईसी आइस ब्लॉग खोला और आश्चर्य, घोर आश्चर्य, जीतू भाई की टुन्डेनवाब वाली पोस्ट एकदम मस्त तरीके से दिखाई दे रही थी!!! Spicy Ice blog on Nokia 7250i मैंने सोचा कि पक्का कर लिया जाए और स्पाईसी आइस पर मैंने अपनी चाईनीज़ खाने वाली पोस्ट खोल कर देखी तो चित्र सहित वह एकदम सही दिखाई दे रही थी, कहीं कोई टूटा-फ़ूटा यूनिकोड नहीं दिखाई दे रहा था। पढ़ रहे हैं ना मिश्रा जी?? हिन्दी या तो बिलकुल नहीं दिखाई देती और यदि दिखाई देती है तो एकदम टनाटन!! ई है नोकिआ….. ई है नोकिआ….. ई है नोकिआ मेरी ऽऽऽ जान!! ;) :D

संजय भाई ने टिप्पणी में कहा था कि मोबाइल पर हिन्दी तभी दिखाई देगी जब मोबाइल पर आने से पहले मोबाइल कंपनी के वेबसर्वर पर यूनिकोड का मोबाइल वाले हिन्दी फोन्ट में परिवर्तन हो जाएगा। अब यह बात कितनी सही है यह मैं नहीं जानता, इस बारे में मेरा ज्ञान अधिक नहीं है, पंकज भाई ने भी अपनी टिप्पणी में संजय भाई की बात का समर्थन करते हुए कहा कि उनके टी-मोबाइल कनेक्शन में हिन्दी सही नहीं दिखाई देती क्योंकि टी-मोबाइल के यहाँ उसकी ऐसी-तैसी फिर जाती है। यह सब ध्यान में आते ही मैंने सोचा कि यदि ऐसा है तो मेरे एन 70 में काहे हिन्दी नहीं दिखाई दे रही जबकि 7250i में एकदम चकाचक दिख रही है। कनेक्शन भी मैं अदल-बदल देख चुका हूँ, जिससे यह तो साबित हो ही जाता है कि आइडिया और महानगर टेलीफोन निगम, दोनो ही के यहाँ यूनिकोड सपोर्ट है। और तो और, आइडिया वाला कनेक्शन तो मैं अपने कंप्यूटर से मोबाइल जोड़ कर भी चला चुका हूँ और परिचर्चा, नारद जैसी सभी वेबसाइट एकदम मस्त खुलती हैं। तो इसका अर्थ यही है कि गड़बड़ कहीं और नहीं वरन्‌ मोबाइल फोन की है। अपने 7250i के नोकिआ वाले ब्राउज़र में मैंने हिन्दी वेबसाइट खोल देखी तो मुझे अभी भी बक्से ही दिखाई दिए, यानि कि उसमें हिन्दी नहीं दिख रही, लेकिन वही वेबसाइट ऑपरा मिनी में खोलने पर एकदम बढ़िया दिखाई देती है। यानि कि ब्राउज़र का भी पंगा है, क्योंकि मैंने एन 70 पर भी ऑपरा मिनी डाल कर देखा लेकिन उसमें बात नहीं बनी। :(

तो अपने इन अनुभवों से मैं यह निष्कर्ष निकाल सकता हूँ:

  1. मोबाइल पर हिन्दी देखने के लिए सबसे पहली आवश्यकता यह है कि आपके मोबाइल में हिन्दी भाषा का विकल्प हो।
  2. ब्राउज़र यूनिकोड को सपोर्ट करने वाला होना चाहिए।

यदि ब्राउज़र यूनिकोड वाला नहीं भी डला हुआ आता है तो उसका समाधान ऑपरा मिनी डाल कर किया जा सकता है यदि आपके फोन में जावा सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है तो।

Categories: mobile · technology · टेक्नॉलोजी · मोबाइल

8 responses so far ↓

  • नीरज दीवान // May 8, 2007 at 7:16 pm

    यह रोचक जानकारी है. मै इंतज़ार करता हूं कुछ दिन और जब तक कोई फंडू तरीक़ा ढूंढ लो जिससे मोबाइल पर हिन्दी लिखना-पढ़ना और आसान हो जाए.
    जानकारी बांटने के लिए धन्यवाद और आपके मोबाइल में हिन्दी आने पर बधाई.

  • जगदीश भाटिया // May 8, 2007 at 7:25 pm

    बहुत खुशी की बात है। :)
    मेरे मोबाईल पर ओपेरा मिनी में भी डिब्बे ही नजर आते हैं। :(

  • RC Mishra // May 9, 2007 at 1:40 am

    मेरा मोबाइल सेट सामसुंग है, जिसमें जीपीआरएस uniocde/UTF8 आधारित है, सभी भाषाओं के वेबपेज दिखते हैं। हिन्दी तथा अन्य 5 भारतीय भाषाओं में एसएमएस की भी सुविधा है। किन्तु BSNL की इस सेवा में अंग्रेजी में 150 अक्षरों तक का सन्देश एक एसएमएस होता है तथा सिर्फ एक रुपया खर्च होता है। लेकिन हिन्दी में 150 अक्षरों का एक एसएमएस भेजने पर यह तीन एसएसएस में बदल जाता है और 3 रुपये का खर्च बैठता है। इसका कारण UTF8 कूटों में एक बाइट तीन बाइट में बदल जाती है। अतः हिन्दी तीन गुना मंहगी पड़ती है। क्या हिन्दी को सस्ता बनाने का कोई उपाय सुझाएँगे?

    This Comment was by HariRama.. on My related Post.

    7:09 PM The Original Post Has been deleted..by mistake..though was recovered later through Narad! :)
    Enjoy!

  • राजीव // May 9, 2007 at 2:35 am

    मैंने भी पिछले वर्ष (नवम्बर में ही) ऑपेरा मिनी को नोकिया एन-गेज (सिम्बियन) पर प्रयोग किया था और यूनीकोड वाले हिन्दी पृष्टों को भी खोला, पर हुआ वही, ढाक के तीन पात! शायद आप यह भी ठीक ही कह रहे हैं कि मोबाइल के फर्मवेयर द्वारा भी यूनीकोड का समर्थन होना आवश्यक है।

  • समीर लाल // May 9, 2007 at 5:00 am

    बढ़िया है. जानकारी अच्छी है.

  • रवि // May 9, 2007 at 9:46 am

    “…अन्यथा इसका रेगुलर ब्राउज़र फोकट नहीं है।…”

    बहुत पुरानी बात बता रहे हो अमित भइया. ऑपेरा तो पिछले सालेक भर से फोकट वाला हो गया है. मैं इसका नियमित इस्तेमाल करता हूँ. - दो वजह है
    पहला - यह फ़ालतू स्क्रिप्ट को चलाता ही नहीं, और दूसरा, इसमें डायनॉमिकली चित्रों व मल्टीमीडिया को टॉगल कर सकते हैं. और, यह दुनिया का सबसे तेज ब्राउज़र तो है ही!

    चलिए, अंततः आपके मोबाइल में हिन्दी चल ही गई. अब जरा इसी के जरिए एकाध टेस्ट पोस्ट डाल कर बताएँ कि हि्न्दी में भी मोबाइल ब्लॉगिंग हो सकती है या नहीं?

  • संजय बेंगाणी // May 9, 2007 at 9:57 am

    बधाई. हमने अपने हिसाब से दिमाग लड़ाया था. अब जब हिन्दी दिख रही है तो अपनी खुशी में हमे भी शामिल समझें. यही दिवानगी हिन्दी को उसका स्थान दिलाएगी.

  • Amit // May 10, 2007 at 1:24 am

    नीरज भाई, मोबाइल पर हिन्दी लिखने का कोई जुगाड़ अभी न चले है, सभी मौजूदा जुगाड़ ट्राई कर देख लिए!!

    बहुत पुरानी बात बता रहे हो अमित भइया. ऑपेरा तो पिछले सालेक भर से फोकट वाला हो गया है. मैं इसका नियमित इस्तेमाल करता हूँ.

    अरे रवि जी, थोड़ ध्यान से पढ़िए जी!! ऑपरा कंप्यूटर के लिए फोकट है, मैं भी नियमित प्रयोग करता हूँ। लेकिन मोबाइल के लिए फोकट नहीं है, जाकर उसकी वेबसाइट पर देख लीजिए। आपके मोबाइल फोन में यदि ऑपरा डला हुआ नहीं आया तो उसे प्रयोग करने के लिए आपको उसे खरीदना पड़ेगा। अपडेट फोकट होता है, जैसे मेरे एन 70 में ऑपरा का एक-दो वर्जन पुराना वाला संस्करण था तो मैंने उसे ऑपरा की वेबसाइट पर जाकर अपडेट कर लिया, अन्यथा वह सिर्फ़ कुछ दिन का ट्रायल चलता। :)

    संजय भईया, आपके तर्क वगैरह को कुछ भला-बुरा नहीं कहा, मैं तो स्वयं कह रहा हूँ कि मुझे इस विषय में अधिक ज्ञान नहीं, इसलिए मैं सिर्फ़ वही कहने का अधिकार रखता हूँ जिसका अनुभव कर चुका हूँ। :)

Leave a Comment