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कोई खतरा नहीं आपको …..

June 20, 2007 · 9 Comments

क्या आपके पास अपना डोमेन है? क्या आपको लगता है कि कोई उसे हड़प लेगा? कैसे हड़प लेगा जी, कोई बाबा का राज है क्या!! इन प्रश्नों से अज्ञान मस्तिष्क उलझना आरम्भ कर देता है जब वह पढ़ता/सुनता है कि डोमेन हड़पना भी संभव है। लेकिन क्या ऐसा संभव है?? फिलिप जी ने लिखा है कि जाल लुटेरे आपका डोमेन लूट सकते हैं। अब उन्होंने यह तो बता दिया कि आपका कौन सा डोमेन आपके हाथ से निकल सकता है अर्थात्‌ कोई अन्य आपके डोमेन में क्यों रूचि ले सकता है लेकिन यह कैसे होगा तथा उनके साथ कैसे हुआ यह उन्होंने अभी नहीं बताया है, लेकिन मैं इस विषय पर अपने विचार यहाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ।

आपका डोमेन आपके हाथ से दो सूरतों में निकल सकता है:

  1. जब डोमेन एक्सपायर हो जाए - प्रत्येक डोमेन एक समयावधि के लिए रजिस्टर होता है, (सामान्यत:)न्यूनतम अवधि एक वर्ष होती है और अधिकतम दस वर्ष(यदि कुछ अपवादों को छोड़ दें तो)। आप अपना डोमेन केवल वार्षिक तौर पर ही रजिस्टर करवा सकते हैं। डोमेन की समयावधि समाप्त होने से पहले डोमेन रजिस्ट्रार(जिससे आपने डोमेन रजिस्टर करवाया था) आपको याद दिलाने के लिए एक ईमेल भेजता है। आमतौर पर हर प्रतिष्ठित रजिस्ट्रार 2-3 ईमेल भेजता है, पहली डोमेन निष्क्रिय होने से एक माह पूर्व, दूसरी पंद्रह दिन पहले और तीसरी एक दिन पहले। अब यदि आप अपना डोमेन रिन्यू(renew) नहीं करवा पाते हैं तो वह पंद्रह दिन के ग्रेस पीरियड(grace period) में चला जाता है जहाँ वह निष्क्रिय तो हो जाता है लेकिन अभी आपके हाथ से निकला नहीं है। आप ग्रेस पीरियड का अलग भुगतान कर(यह रजिस्ट्रार पर है कि वह कितने फालतू पैसे लेता है, सामान्यतः यह सौ(अमेरिकी) डॉलर(US$100) का शुल्क होता है और इसके साथ डोमेन के पैसे) अपना डोमेन पुनः प्राप्त कर सकते हैं। यदि इस समयावधि में भी आप डोमेन लेने से चूक जाते हैं तो घबराने की आवश्यकता नहीं है, वह अभी भी हाथ से नहीं निकला है, तीस दिन का समय आपके पास और होता है जिसके उपरांत डोमेन मिटा दिया जाता है और वह आम जनता के लिए उपल्ब्ध हो जाता है। इन तीस दिनों में आप यदि अपना डोमेन प्राप्त करते हैं तो आपको जेब अधिक ढीली करनी होगी।
  2. जब डोमेन चोरी हो जाए - पहले तो ऐसा संभव नहीं था, लेकिन अब यह संभव है, शुक्रिया अदा कीजिए इंटरनेट की गवर्निंग बॉडी(governing body) आईकान्न(ICANN) को। लेकिन ऐसा उन्होंने जानबूझकर नहीं किया है, बस उनके नियमों में एक छेद है जिसको प्रयोग किया जाता है। जुलाई 2004 में आईकान्न ने डोमेन ट्रांसफर(एक रजिस्ट्रार से दूसरे रजिस्ट्रार के यहाँ डोमेन का स्थानांतरण) पॉलिसी में बदलाव किए। तब तक पॉलिसी यह थी कि यदि एक रजिस्ट्रार दूसरे रजिस्ट्रार के यहाँ से अपने यहाँ डोमेन ट्रांसफर करना चाहता है तो मौजूदा डोमेन मालिक की सहमति मौजूदा रजिस्ट्रार के द्वारा मिले बिना नहीं कर सकता था। नई पॉलिसी के अनुसार भी इस सहमति की आवश्यकता तो थी, लेकिन ऐसा नहीं था कि बिना सहमति मिले डोमेन ट्रांसफर नहीं होगा। नई पॉलिसी के अनुसार यह मान लिया जाएगा कि नए रजिस्ट्रार ने मौजूदा रजिस्ट्रार और मालिक की सहमति ले ली है और डोमेन ट्रांसफर हो जाएगा। इस स्थिति से निपटने के लिए डोमेन को ताला लगाने की प्रक्रियाएँ आरम्भ हुईं। डोमेन मालिक अपने रजिस्ट्रार की सहायता से अपने डोमेन पर ताला लगा सकते हैं क्योंकि ताला लगे डोमेन को कोई ट्रांसफर नहीं कर सकता, स्वयं मालिक भी नहीं, उसको भी पहले ताला हटाना होगा।

तो इन दो वजहों के अतिरिक्त कोई अन्य वजह नहीं कि कोई आपका डोमेन उड़ा के पतली गली से कट ले। ;) आपका कार्य डोमेन लेने पर ही समाप्त नहीं हो जाता। यदि आप अपने डोमेन को अपने पास रखना चाहते हैं तो उस पर ताला लगा के रखें और उसकी समयावधि समाप्त होने से पहले उसको रिन्यू करवाएँ। यदि समयावधि समाप्त होने के कारण आपका डोमेन आपके हाथ से निकल जाता है और कोई अन्य ले लेता है तो इसमें किसी अन्य का दोष नहीं, आपका है, और डोमेन लेने वाला चोर लुटेरा नहीं होता; डोमेन खाली पड़ा था, कोई भी ले सकता है, यदि आपको उस व्यक्ति से लेना है तो जो कीमत उसको दरकार है उसका भुगतान कर ले लीजिए। इसमें कुछ गलत नहीं है और यह कोई गैरकानूनी कार्य नहीं है, अगले व्यक्ति ने आपसे डोमेन हड़पा नहीं है। यदि आपका डोमेन अच्छा है तो उसको पाने की ललक लिए बहुत से लोग खड़े/बैठे/लेटे होते हैं। शेयर बाज़ार की ही भांति डोमेन बाज़ार में भी सट्टा होता है, बोलियाँ लगती हैं, नीलामी भी होती है, हर कोई अपनी इंवेस्टमेन्ट करना चाहता है या उसको बेच उसका लाभ उठाना चाहता है। खैर, यह एक अलग लेख की सामग्री है, इसलिए इस पर फिर कभी प्रकाश डालूँगा। ;)

अभी के लिए गौरतलब बात यह है कि आपका डोमेन आपकी संपत्ति है(जब तक के लिए रजिस्टर करवाया है तब तक के लिए) और वास्तविक दुनिया की ही भांति अपनी इस वर्चुअल प्रापर्टी(virtual property) की सुरक्षा का दायित्व भी आपका अपना है। यदि आप अपना दायित्व पूरा नहीं करते तो आपका डोमेन आपके हाथ से निकल सकता है। :) साथ ही भ्रांतियों से दूर रहें, यह भी बहुत अहम है। :)

Categories: domains · internet · technology · इंटरनेट · टेक्नॉलोजी · डोमेन

9 responses so far ↓

  • Mishra; RC // June 20, 2007 at 2:16 am

    :)
    अब लग रहा है कि वाकयी तकनीकी इन्सान हो नही तो ज्यादातर कहाँ-कहाँ की कहानियाँ सुनाते रहते हो :D
    हमारे एक रजिस्ट्रार ने ३ महीने पहले से ही चेतना शुरू कर दिया है। लेकिन हमें तो ट्रान्सफ़र लेना है :)

  • समीर लाल // June 20, 2007 at 2:36 am

    बहुत गौर तलब बात कही. हमारे रजिस्ट्रार तो याद दिला दिला कर रिन्यू करवा ही देते हैं. अब तो उनकी पहली दूसरी ईमेल तक नहीं देखते. :) मगर शास्त्री जी की घटना कुछ और ही मालूम पड़ती है, इसीलिये मैं उनकी अगली कड़ी का इन्तजार कर रहा हूँ.

  • Mishra; RC // June 20, 2007 at 2:41 am

    शास्त्री जी की समस्या Crackers की लगती है।

  • अनूप शुक्ल // June 20, 2007 at 8:00 am

    सही लिखा है। सब समझ में आ गया!

  • शशि सिंह // June 20, 2007 at 8:55 am

    अपने लेखों से साइबर अंधविश्वासों पर से इसी तरह पर्दा उठाते रहें।

  • श्रीश शर्मा // June 20, 2007 at 9:04 am

    वाह अच्छी जानकारी दी, इसका लिंक सर्वज्ञ के ब्लॉग कैसे बनाएं वाले लेख में डालते हैं।

    अब जरा दो लेख और लिख दीजिए। एक तो नए लोगों के लिए कि वैबस्पेस/डोमेन कौन सा लें, कैसे लें, कहाँ से लें वगैरा वगैरा टाइप और दूसरा वो नीलामी वाली बात पर। :)

  • संजय बेंगाणी // June 20, 2007 at 9:19 am

    साइबर अन्धविश्वास अच्छा शब्द जुटाया है. अच्छा लेख.

  • Amit // June 20, 2007 at 2:56 pm

    पसंद करने के लिए सभी का आभार। :)

    अब लग रहा है कि वाकयी तकनीकी इन्सान हो नही तो ज्यादातर कहाँ-कहाँ की कहानियाँ सुनाते रहते हो

    हा हा हा!! :D ;)

    मगर शास्त्री जी की घटना कुछ और ही मालूम पड़ती है, इसीलिये मैं उनकी अगली कड़ी का इन्तजार कर रहा हूँ.

    हाँ, उन्होंने सचित्र बताने को कहा है, सोच में तो मैं भी पड़ गया हूँ! ;)

    शास्त्री जी की समस्या Crackers की लगती है।

    मिश्रा जी, क्रैकर आदि आपकी वेबसाइट का हुलिया बिगाड़ सकते हैं, उसकी जगह अपनी वेबसाइट डाल सकते हैं लेकिन डोमेन नहीं उड़ा के ले जा सकते! :)

    इसका लिंक सर्वज्ञ के ब्लॉग कैसे बनाएं वाले लेख में डालते हैं।

    ज़हेनसीब, अवश्य डालिए। :)

    अब जरा दो लेख और लिख दीजिए। एक तो नए लोगों के लिए कि वैबस्पेस/डोमेन कौन सा लें, कैसे लें, कहाँ से लें वगैरा वगैरा टाइप और दूसरा वो नीलामी वाली बात पर।

    अच्छा। उसके बारे में मैंने अंग्रेज़ी में यहाँ लिखा था। रही वो नीलामी वाली बात, तो उस पर भी लिखेंगे, कब यह नहीं कह सकता। :)

  • Mishra; RC // June 20, 2007 at 3:14 pm

    भैया लोग calvinschool.com पर जाओ, फ़िर तो पता चलेगा कि माज़रा क्या है, कैसे Crackers ने सेल पे लगा दी है साइट :D

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