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Categories: cartoon · sarcasm · कार्टून · व्यंग्य
Pramendra Pratap SIngh // July 24, 2007 at 7:56 am
bahut achchachha
अनूप शुक्ल // July 24, 2007 at 9:00 am
sanjay tiwari // July 24, 2007 at 9:18 am
स्माईल प्लीज.
sanjay bengani // July 24, 2007 at 11:24 am
जब आप सफल होते है आप पर उँगलिया उठती ही है. वैसे अच्छा व्यंग्यात्मक जवाब.
Sanjeet Tripathi // July 24, 2007 at 1:27 pm
बहुत सही!!
Amit // July 24, 2007 at 3:28 pm
जब आप सफल होते है आप पर उँगलिया उठती ही है.
हा हा हा, ये तो आपने बिलकुल वैसे ही कहा जैसे “गुरू” फिल्म में अभिषेक ने कहा था कि “जब लोग तुम्हारे खिलाफ़ बोलने लगें, समझ लो तरक्की पर हो”!!
Aks // July 24, 2007 at 3:31 pm
cha gaye guru, good reply.
ज्ञानदत पाण्डेय // July 24, 2007 at 3:59 pm
चलो रंग रोगन की बात करो. होने की बजाय दिखना ज्यादा जरूरी है. चाहे चुड़ैल का हो या स्वामी का या नारद का.
pankaj बेंगाणी // July 24, 2007 at 5:01 pm
chudail hai kaun miya!!
Shrish // July 24, 2007 at 8:06 pm
हे हे, बहुत खूब!
समीर लाल // July 24, 2007 at 10:10 pm
हा हा, यह कहाँ आ गये हम!!!!!!!!!
सागर चन्द नाहर // July 25, 2007 at 9:57 pm
बेकग्राऊंड का कलर काला क्यों है, आका का कलर केसरी क्यों है। पारदर्शक क्यों नहीं है? जरूर कोई ना कोई साजिश रची जा रही है।
अरे स्माईली लगना रह गया भाई अब दो लगा देते हैं
Amit // July 26, 2007 at 2:18 am
बूझो तो जानें!!
आका का कलर केसरी क्यों है
“आका” का रंग केसरी कहाँ है सागर जी, वो तो काला लबादा ओढ़े है!! हा हा हा!!
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14 responses so far ↓
Pramendra Pratap SIngh // July 24, 2007 at 7:56 am
bahut achchachha
अनूप शुक्ल // July 24, 2007 at 9:00 am
sanjay tiwari // July 24, 2007 at 9:18 am
स्माईल प्लीज.
sanjay bengani // July 24, 2007 at 11:24 am
जब आप सफल होते है आप पर उँगलिया उठती ही है. वैसे अच्छा व्यंग्यात्मक जवाब.
Sanjeet Tripathi // July 24, 2007 at 1:27 pm
बहुत सही!!
Amit // July 24, 2007 at 3:28 pm
हा हा हा, ये तो आपने बिलकुल वैसे ही कहा जैसे “गुरू” फिल्म में अभिषेक ने कहा था कि “जब लोग तुम्हारे खिलाफ़ बोलने लगें, समझ लो तरक्की पर हो”!!
Aks // July 24, 2007 at 3:31 pm
cha gaye guru, good reply.
ज्ञानदत पाण्डेय // July 24, 2007 at 3:59 pm
चलो रंग रोगन की बात करो. होने की बजाय दिखना ज्यादा जरूरी है. चाहे चुड़ैल का हो या स्वामी का या नारद का.
pankaj बेंगाणी // July 24, 2007 at 5:01 pm
chudail hai kaun miya!!
Shrish // July 24, 2007 at 8:06 pm
हे हे, बहुत खूब!
समीर लाल // July 24, 2007 at 10:10 pm
हा हा, यह कहाँ आ गये हम!!!!!!!!!
सागर चन्द नाहर // July 25, 2007 at 9:57 pm
बेकग्राऊंड का कलर काला क्यों है, आका का कलर केसरी क्यों है। पारदर्शक क्यों नहीं है?
जरूर कोई ना कोई साजिश रची जा रही है।
सागर चन्द नाहर // July 25, 2007 at 9:57 pm
अरे स्माईली लगना रह गया भाई अब दो लगा देते हैं

Amit // July 26, 2007 at 2:18 am
बूझो तो जानें!!
“आका” का रंग केसरी कहाँ है सागर जी, वो तो काला लबादा ओढ़े है!! हा हा हा!!
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