….. अब लें कि बाद में? कौन सा लें? कैसे पसंद करें?

यदि ये प्रश्न आपके दिमाग में घर किए हुए हैं तो इसका अर्थ है कि आप भी डिजिटल कैमरा लेना चाहते हैं और फिलहाल उधेड़बुन में हैं। घबराईये नहीं, कोई नई बात नहीं है, लगभग हर डिजिटल कैमरा लेने वाला इसका शिकार होता है। इसका समाधान बहुत आसान है, बस कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए। जैसे कि कैमरा कब लेना चाहिए? अब यह कोई मौसम पर तो निर्भर करता नहीं है!! यदि आपको डिजिटल कैमरे की आवश्यकता महसूस हो रही है और जेब में माल है तो खरीद लीजिए, किसी मौसम की प्रतीक्षा मत कीजिए। साधारणतया लोग ऐसी चीज़ों की खरीददारी तब करते हैं जब कंपनियाँ भारी डिस्काऊँट आदि देती हैं। जैसे भारत में दीपावली के आसपास बहुत कंपनियाँ अपने उत्पादों पर तरह-२ की छूट और गिफ़्ट आदि देती हैं, अमेरिका में क्रिसमस के समय पर बहुत बढ़िया ऑफ़र आदी मिलते हैं। तो आप कहाँ से अपना कैमरा ले रहे हैं इस पर भी निर्भर करेगा आपकी खरीद का समय; यदि स्वयं या किसी के द्वारा अमेरिका से मंगवा रहे हैं तो क्रिसमस का समय उपयुक्त रहेगा, पर ध्यान रहे कि उस समय कुछ उत्पादों का स्टॉक जल्दी समाप्त हो जाता है, इसलिए इस बात के लिए तैयार रहें। यदि भारत में खरीद रहे हैं तो फिलहाल तो दीपावली की प्रतीक्षा करना कोई खास लाभकारी नहीं होता क्योंकि (मेरी जानकारी अनुसार)डिजिटल कैमरों पर अभी कोई खास ऑफ़र नहीं मिलते कंपनियों से। यदि सिंगापुर या दुबई से खरीद रहे हैं तो ध्यान रखें कि इन जगहों पर लोगों को आकर्षित करने के लिए हर साल शॉपिंग फेस्टिवल होते हैं जिस दौरान बहुत से अच्छे-२ ऑफ़र सामने आते हैं।
लेकिन, कैमरा लेने से पहले यह निश्चय करें कि क्या आपको वाकई कैमरा चाहिए? यदि हाँ तो क्या कारण हैं जिनकी वजह से आपको डिजिटल कैमरा चाहिए? इन कारणों की एक सूचि बना लें(आगे भी काम आएगी, कैमरा मॉडल निर्धारित करने में)। इससे यदि आपको नहीं लगता कि आपको डिजिटल कैमरे की आवश्यकता है तो मत खरीदिए, यदि माल जेब में है तो उसको संभाल के अलग रख दीजिए, बाद में जब वाकई आपको कैमरे की आवश्यकता महसूस होगी तब काम आएगा। मैं समझता हूँ कि बिना आवश्यकता के कैमरा लेने से अच्छा है कि जब आवश्यकता हो तभी उस समय उपलब्ध आवश्यकताओं अनुसार कैमरा लिया जाए।
अब जब निश्चय कर ही लिया है कि कैमरा लेना है तो निन्यानवें के फेर से बचने का प्रयत्न कीजिए। बहुत से लोग(मैं भी) कोई चीज़ लेने से पहले अलग-२ कंपनियों के कुछ मॉडलों की एक सूचि बनाते हैं और फिर उसमें से एक(या अधिक, जैसी आवश्यकता/उत्पाद) को चुनते हैं। तो डिजिटल कैमरा लेते समय भी सूचि बनाते हैं, एक मॉडल पसंद करते हैं और यदि उसको लांच हुए थोड़ा समय हो चुका है तो उसके अगले वर्जन की प्रतीक्षा करते हैं क्योंकि उसमें कुछ नया आ रहा है। जब वो आ जाएगा तो फिर कुछ और चीज़ है जो पसंद नहीं, तो उसके बाद अगले की प्रतीक्षा। यही है निन्यानवें का फेर, एक चक्र है जिसमें आप घूमते ही रहोगे। मैं यह नहीं कहता कि प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, लेकिन हर चीज़ की एक हद होती है भई!! यदि आप बेसिक प्वाइंट एण्ड शूट(point and shoot) वाला कैमरा ले रहे हैं तो थोड़ी प्रतीक्षा करने पर आपको नया वर्जन मिल सकता है लेकिन यहाँ निन्यान्वें के फेर में पड़ने के चान्स अधिक होते हैं। क्यों? वह इसलिए क्योंकि प्रायः कैमरा कंपनियाँ साल के आरम्भ में नए कैमरों की घोषणा करती हैं और तीन-चार महीने के भीतर उस मॉडल को बाज़ार में उतार देती हैं। इसके बाद साल के मध्य में भी नए वर्जन/अपग्रेड(upgrade) आदि की घोषणाएँ होती हैं जिनको क्रिसमस के पहले(सितंबर से नवंबर के बीच) बाज़ार में उतार दिया जाता है। अब जैसे कि मैंने देखा है, डिजिटल कैमरे यहाँ भारत में तुरंत नहीं आते, कम से कम रिटेल बाज़ार में तो नहीं, ग्रे मार्किट में भले ही आ जाएँ। तो यदि आप भारत में ही खरीदने की सोच रहे हैं तो अपनी आशाएँ कम ही रखें। जो लोग डीएसएलआर(dslr) या ब्रिज(bridge)/प्रोज़्यूमर(prosumer) कैमरा लेने की सोच रहे हैं उनके लिए आसानी है, निन्यानवें के फेर में पड़ने के चान्स कम हैं क्योंकि इन कैमरों के नए वर्जन जल्दी-२ नहीं आते, प्राय: 3-4 वर्षों के अंतराल पर आते हैं।
यह निर्णय करना भी आवश्यक है कि क्या आपको लेटेस्ट(latest) ही लेना है? बहुतया ऐसा भी होता है कि नवीनतम मॉडल में पिछले मॉडल के अनुपात कोई नई फीचर आदि नहीं डाली गई, सिर्फ़ थोड़ा बहुत ही फेर बदल किया गया है। ऐसी स्थिति में बेहतर है कि आप नवीनतम मॉडल की ओर ध्यान न दें क्योंकि उसके और पिछले मॉडल की कीमत में जो अंतर होगा वह उन बदलावों के लिए कहीं से जस्टीफाईड(justified), यानि कि उचित, नहीं होगा। तो नया वर्जन आने से आपको यह लाभ मिलेगा कि पिछले वर्जन की कीमत काफी नीचे आ जाएगी; यह आपके लिए खासतौर से तब बेहतर होगा जब आपकी जेब बहुत सीमित होगी क्योंकि ऐसी स्थिति में शायद वो मॉडल भी आपकी जेब में आ जाए जो पहले नहीं आ पा रहा था। और यदि बिलकुल नवीनतम मॉडल लेने की इच्छा नहीं है या कोई जल्दी नहीं है तो किसी भी नए मॉडल के बाज़ार में आने के पश्चात दो-तीन महीने प्रतीक्षा करना समझदारी होगी, इससे आपको पता चल जाएगा कि कैमरा ठीक है या फुस्स है। जल्दबाज़ी में की गई खरीद पर अक्सर पछताना पड़ जाता है और जब बात पंद्रह-बीस हज़ार रूपए या अधिक की हो तो गलती महँगी भी साबित होती है।
अगले भाग में जारी …..


9 responses so far ↓
DR PRABHAT TANDON // August 4, 2007 at 8:02 am
बहुत सही समय पर यह पोस्ट आपने रखी , मै तो ३-४ दिन से कई माडलों के बीच मे चक्कर लगा रहा हूँ, अगले भाग की आतुरता से प्रतीक्षा रहेगी , तब ही निर्णय लूँगा ।
sanjay bengani // August 4, 2007 at 11:21 am
हमने भी प्रतिक्षा करने का मन बना लिया है.
गरिमा // August 4, 2007 at 2:11 pm
बढ़िया जानकारी दी है… धन्यवाद
समीर लाल // August 4, 2007 at 8:43 pm
यह अच्छी जानकारी का सिलसिला है. सभी इसी परेशानी से जुझते हैं.
Amit // August 5, 2007 at 12:57 am
पसंद करने के लिए सभी का आभार।
इसलिए सोचा कि इस विषय पर लिखा जाए।
Aks // August 5, 2007 at 1:00 am
this one is good, hope u had written it 6 months back, then i wud’ve made a better choice. still, will be useful when i buy my next digicam an year or 2 later after i get better at photography.
Shrish // August 5, 2007 at 3:55 pm
अच्छी क्लास शुरु की धन्यवाद, कभी हमें भी लेना हुआ तो काम आएगी।
Amit // August 5, 2007 at 10:56 pm
अक्स, इंटरनेट पर इस तरह की सलाह बहुत जगह उपलब्ध हैं अंग्रेज़ी में, हिन्दी में नहीं थी तो मैंने सोचा कि चलो थोड़ा अपनी समझ के अनुसार लिख दिया जाए। वैसे सोच सही है, अपने अभी के कैमरे से फोटोग्राफी का अभ्यास करो और जब सुधार हो तब अगली बार देख कर समझ कर अच्छा कैमरा लेना।
धन्यवाद श्रीश।
एक अदद डिजिटल कैमेरे की तलाश—- जारी है….. « होम्योपैथी-नई सोच/नई दिशायें // August 7, 2007 at 8:33 am
[...] चन्द दिन पहले अमित ने कैमेरे लेने के पहले कुछ विचारणीय [...]
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