….. क्या आप भुगतने के लिए तैयार हैं??

भुगतना? हाँ जी भुगतना, अब ऐसे ही तो फ्री में मोबाइल से फुनवा लगा गाँव में अम्मा से या बगल के ऑफिस में, अपने जगमग एलसीडी(LCD) स्क्रीन के सामने बैठी, रीता से गप्पें तो नहीं ना मार सकोगे ना!! तो उसके लिए का भुगतना होगा? अरे भई ज्यादा कछु नहीं, सिर्फ़ कुछ विज्ञापन झेलने होंगे। नहीं समझे? लो, कल्लो बात, कौन से झाड़ में घुसे रहते हो भई?? ऊ ससुरा गुगलवा ने अपने फुनवा का प्रोटोटाइप(prototype) बना लिया है जिसको ऊ एक बरस में बाज़ार में उतार सकता है, फिलहाल अमरीका के मोबाइल सेवा प्रदाताओं और मोबाइल फुनवा बनाने वालों के साथ सांठ-गाँठ करने में लगा है ताकि मोबाइल निर्माता उसके अनुसार फोन बनाएँ और सेवा प्रदाता उसके अनुसार सेवा प्रदान करें।
बाकी कुछ हो न हो, लेकिन मजे की बात ई रहेगी कि मोबाइल सेवा प्रदाता क्या सोचते हैं इस बारे में, क्योंकि वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक गुगलवा के साथ ई सैटिंग सेवा प्रदाताओं के लिए दो-धारी तलवार है; गुगलवा के साथ सैटिंग का लाभ ई हो सकता है कि अधिक से अधिक लोग डाटा प्लान लेंगें जिनमें पैसा बनेगा क्योंकि कॉल वाली सेवा में वैसे भी अधिक पैसा नहीं रहा है तो वहीं दूसरी ओर ई डर भी है कि मोबाइल विज्ञापन की डॉलर कमाऊ ज़मीन उनके हाथ से जाती रहेगी!!
अब यदि गुगलवा अपनी इस नई सेवा को बाज़ार में लाता है तो मोबाइल बाज़ार में आने वाली दूसरी ऐसी कंपनी होगी जिसका इस बाज़ार से पहले कोई लेना-देना नहीं था। काहे? अरे पहली ऊ ससुरी सेब कंपनी है ना जो मैंफोन….. यानि कि आईफोन(iphone) निकाले रही, बेशक खामखा का डॉलर बर्बाद शोशा ही सही लेकिन लोग तो पिले रहे ना ऊ का फुनवा ले की खातिर। अब सेब….. यानि कि ऐपलवा ने तो सिर्फ़ एक के साथ सांठ-गाँठ करी, ऐ टी एण्ड टी(AT&T) के साथ, लेकिन गुगलवा तो घणा होशियार रहे, स्यानों में डेढ़ स्याना रहे, इसलिए ऊ एक के साथ नहीं सब मोबाइल सेवा प्रदाताओं के साथ सैटिंग करेगा, ग्राहक जाएगा तो किधर बच के जाएगा, बचने के लिए बैन्डविड्थ कम पड़ जाएगी कौनो कैरियर ना मिलेगा!!
वैसे ई सेवा को ऊ लोग कदाचित् ही प्रयोग करें जो मोबाइल सेवा का खर्चा वहन करने की क्षमता रखते हैं। अब का है कि ऊ लोग इस तरह कॉलवा के बीच में रेडियो/टीवी शो की तरह कमर्शियल ब्रेकवा नाही लेना पसंद करेंगे ना!! तो ई भी हुई सकत है कि गुगलवा की ई सेवा अल्पव्यस्कों(teenagers) और ऊ लोगन को टार्गेट(target) करे जौन मोबाइलवा का खर्चा नाही उठा सकत!!
तो अब देखे का है कि ई गुगलवा का नया शगूफ़ा कब तक बाज़ार में आवत है, और का रंग दिखावत है!!


7 responses so far ↓
रवि // August 5, 2007 at 12:08 pm
अपुन तो पहला व्यक्ति होगा इसे लपकने वाला.
और, आजकल विज्ञापनों में जो क्रिएटिविटी दिखती है, वो कहीं और कहाँ!
masijeevi // August 5, 2007 at 12:54 pm
हमहूँ लिखा था, बांचें
http://masijeevi.blogspot.com/2007/08/blog-post_03.html
Amit // August 5, 2007 at 2:39 pm
हा हा हा!!
मसिजीवी जी, आपका लेख पढ़ लिया था, पता नहीं काहे दिमाग से निकल गया!!
Shrish // August 5, 2007 at 3:29 pm
आंई ये क्या नया चक्कर है।
भईया मोबाइल तो अपने पास भी नहीं, पर मुफ्त के चक्कर में अपुन विज्ञापन नहीं झेल सकता। उस से तंग आकर तो टीवी देखना छोड़ दिया।
जीतू // August 5, 2007 at 5:46 pm
हम अभी कैसे बतावें कि हम इ वाला फोन लपकेंगे कि नाही?
अरे आवन तो, तनिक देखा जाए, फिर सोचा जाइ, यूं भी कौनो कवि कह गया है
मुफ़्त का चंदन घिस रघुनन्दन,
गहरे तिलक लगा बाबा।
जिन जिन साहबान को ये वाला फोन नही चाहिए, वो रवि भाई को भेज दें। आज उनका जन्मदिन भी है।
Amit // August 5, 2007 at 11:00 pm
अभी बाज़ार मे आया नहीं है, सिर्फ़ prototype बनाया है गूगल ने। तकरीबन एक-डेढ़ वर्ष में यह अमेरिका में लाँच होगा यदि गूगल इस पर आगे कार्य करता है और यदि मोबाइल फोन निर्माता और सेवा प्रदाता उसका साथ देने को तैयार होते हैं। उस हाल में भारत में आने में इसे बहुत टैम पड़ा है, हो सकता है कि तब तक यहाँ के मोबाइल सेवा प्रदाता कॉल के भाव वैसे ही इतने गिरा दें कि लगभग फ्री हो जाए!!
ravindraraj // December 19, 2007 at 10:06 am
हम त ओकर इंतजार कर थाई , जाने कब ऊ आये
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