बीते दिनों में एक रविवार सुबह संतोष के साथ कुतुब मीनार के पास स्थित पाँच इंद्रियों के बाग़ यानि कि गॉर्डन ऑफ़ फाईव सेन्सेस (garden of five senses) जाना हुआ और वहाँ रंग-बिरंगे फूलों और तितलियों के साथ ही देखने को मिले अमूर्त कला (abstract art) के बढ़िया नमूने।

( इस फोटो को कंप्यूटर पर सेपिआ [sepia] किया गया है, मूल फोटो यहाँ है )

( इस फोटो को कंप्यूटर पर श्वेत-श्याम किया गया है, मूल फोटो यहाँ है )

( बढ़िया सैटिंग में बना हुआ एक एम्फीथियेटर [amphitheater] )
अगले भाग में जारी…..







8 responses so far ↓
sanjay bengani // October 15, 2007 at 6:34 pm
सुन्दर तस्वीरें उतारी है.
सागर चन्द नाहर // October 15, 2007 at 8:31 pm
मैने एक बार आपसे कहा था आपमें प्रदर्शनी लगाने लायक फोटो खींचने की लायकात है, आज एक बार फिर से कह रहा हूँ खासकर तितली और कीड़े के फोटो को देखने के बाद।
कब मन बना रहे हैं फिर….?
समीर लाल // October 15, 2007 at 9:09 pm
अरे वाह, एक से बढ़ कर एक तस्वीरें ले आये हैं. बेहतरीन. बधाई.
Amit // October 15, 2007 at 11:44 pm
धन्यवाद संजय भाई, सागर जी और समीर जी।
सागर जी, तितली और ततैये की फोटो दो ही तो हैं! एकाध तुक्का तो सभी का चल जाता है।
वाकई मैं अभी इस बात से सहमत नहीं हो पाया हूँ, अभी काफ़ी सुधार करना है अपनी फोटोग्राफ़ी में उस मुकाम तक पहुँचने से पहले जहाँ मैं प्रदर्शिनी लगाने की सोच बनाऊँ।
आपने फोटो और मेरे हुनर को इस लायक समझा इसके लिए आपका आभार।
प्रत्यक्षा // November 5, 2007 at 10:53 am
बढ़िया !
Amit // November 5, 2007 at 12:29 pm
धन्यवाद प्रत्यक्षा जी।
pramod // April 24, 2008 at 3:45 pm
main pehli baar is blog par aaya hu. main soch bhi nahi sakta tha ki aaj hindi ka samman karne wale itne log ho sakte hain.
main aap sabka fan ban gaya hu.
aur han amit ji ye ark mera pasandida garden hai.
Amit // April 25, 2008 at 3:41 pm
धन्यवाद प्रमोद जी।
यह ब्लॉग अब यहाँ अपडेट नहीं होता और नए पते पर चला गया है, वहाँ पधारिए और नया माल हिन्दी में पढ़िए।