दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!

Entries from December 2007

समस्या है…..

December 31, 2007 · 4 Comments

Categories: cartoon · here and there · इधर उधर की · कार्टून

क्या आप चोर हैं? - भाग ३

December 21, 2007 · 5 Comments

पिछले भाग से आगे …..

अभी हाल ही में हिन्दी ब्लॉगजगत में पोस्ट आदि की चोरी का मुद्दा उठा था और बहुत से लोगों ने पुरज़ोर इसका विरोध करते हुए इस पर अपने कड़े विचार व्यक्त किए थे। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कुछ लोग जो अपने ब्लॉगों से पोस्ट चोरी होने पर व्यथित और क्रोधित थे(इतने कि उनका वश चलता तो चोर को फांसी पर चढ़ा देते और उसके कपड़े बीच बाज़ार नीलाम कर देते) यदि उनके ब्लॉग देखें जाएँ तो बहुत सा चोरी का माल उनके पास ही मिल जाएगा। क्यों भई, आपका माल चोरी हो तो वह गलत, लेकिन आप किसी का माल चोरी करो तो वह गलत नहीं है? मेरा इरादा किसी व्यक्ति विशेष का नाम लेकर उनको सरेआम बेइज़्ज़त करना नहीं है, मैं विनम्र शब्दों में सिर्फ़ यह बताना चाहता हूँ कि जिस तरह आपका लिखा आपका कॉपीराइट है उसी प्रकार किसी अन्य का माल भी उसकी संपत्ति है जिसे आप बिना उस व्यक्ति की आज्ञा के नहीं प्रयोग कर सकते।

खैर यह तो अलग बात है, लेकिन कुछ लोग बड़े बेशर्म भी होते हैं। चोरी जाने में की या अजनाने में, उनको जब चोरी हुए माल का मालिक विनम्र शब्दों में यह कहे कि भई यह मेरा माल है और इसको प्रयोग करने की अनुमति आपने नहीं ली है इसलिए इसको हटा लीजिए तो दो तरह से व्यक्ति पेश आता है:

  1. आपका माल हटाने से साफ़ मुकर जाता है और आपको कहता है कि जो उखाड़ सकते हो उखाड़ लो, यानि कि एक तो चोरी ऊपर से सीनाज़ोरी।
  2. आपका माल हटाने को मान जाता है लेकिन अपने मानसिक असंतुलन को दिखाने के लिए या तो आपको ईमेल द्वारा भला बुरा कहता है या फिर यदि मानसिक संतुलन कुछ अधिक ही बिगड़ा हुआ है तो अपनी मूर्खता का प्रचार करने के लिए सरेआम ब्लॉगपोस्ट आदि लिख आप पर व्यंग्य करता है।

दूसरी तरह से पेश आने वाले लोगों की तो छोड़ ही दें, उनपर तो खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे वाली कहावत चरितार्थ होती है। इन लोगों को इस बात का शुक्र नहीं होता कि जिसका माल इन्होंने चोरी किया उसने प्यार-मोहब्बत से बोलते हुए इनसे वह माल हटाने को कहा जबकि वह सीधे ही लीगल नोटिस भिजवा के इन पर हर्जाने का मुकदमा भी ठोक सकता था। ऐसे लोग परिपक्व नहीं होते और छोटे बालकों की बुद्धि के होते हैं, इसलिए इन की बात का क्या बुरा मानना। वैसे हाल ही में मेरे साथ भी ऐसा ही वाकया हुआ और मैंने यह सोच ही मेरा माल उड़ाने वाले व्यक्ति के व्यंग्य को जाने दिया कि इससे क्या अपना माथा फोड़ना। वैसे गौरतलब बात यह थी कि अमुक व्यक्ति ने पूरी तरह जानते बूझते हुए मेरा कॉपीराइट नोटिस हटा के मेरे द्वारा ली फोटो प्रयोग की थी और मुझे भोला बन के दिखा रहा था कि उसे नहीं पता क्या हुआ।

खैर, मुख्य है यहाँ पहली तरह के व्यक्ति, जो कि चोरी भी करते हैं और सीनाज़ोरी भी। अब ऐसे व्यक्ति आपके समझाने से नहीं समझेंगे, ये इस गफ़लत में होते हैं कि आप इनका कुछ कर नहीं सकते। लेकिन ऐसा नहीं है, इनका बहुत कुछ बिगड़ सकता है, बस बिगाड़ने की नीयत चाहिए और निम्न तरीकों से इनका जीना दुश्वार कर सकते हैं:

  1. यदि चोर आपके देश में रहता है तो आप उस पर मुकदमा कर सकते हैं। कोई बहुत बड़ा आफ़त वाला काम नहीं है आपके लिए, सिर्फ़ सिविल कोर्ट में कॉपीराइट उल्लंघन का मुकदमा करना है। मुकदमा करने से पहले लीगल नोटिस भेजा जा सकता है, अधिकतर सीनाज़ोर इस लीगल नोटिस के मिलने से ही हिल जाते हैं, क्योंकि यकीन मानिए कोर्ट में तो वे भी नहीं जाना चाहेंगे।
  2. उस व्यक्ति के वेब होस्ट से शिकायत कर सकते हैं। अधिकतर वेबहोस्ट इस तरह के मामलों को गंभीरता से लेते हैं और यदि आपकी बात में सच्चाई है तो वे अमुक व्यक्ति को या तो आपका माल हटाने को कहेंगे या फिर उनको सूचित किए बिना उनकी वेबसाइट/ब्लॉग को क्लीन-बोल्ड कर देंगे। यदि ब्लॉग ब्लॉगस्पॉट या वर्डप्रैस.कॉम जैसी सेवा पर है तो आपका काम अधिक आसान होगा क्योंकि ये लोग ऐसे मामलों को बर्दाश्त करने वालों में से नहीं हैं।

अब यदि चोर आपके देश का निवासी नहीं है तो कचहरी में उसपर मुकदमा करना कदाचित्‌ आपके लिए संभव नहीं होगा लेकिन दूसरा तरीका तो आप अपना ही सकते हैं और कामयाबी मिलने पर आपका कार्य तो हो ही गया, चोर की वेबसाइट/ब्लॉग से आपका माल तो हट ही जाएगा साथ-२ सज़ा के तौर पर उसका अपना माल भी साफ़ हो जाएगा।

तो यदि आप भी सीनाज़ोरी करने वाले लोगों में से हैं तो सावधान हो जाईये, यह सीनाज़ोरी महंगी पड़ सकती है। यदि माल का मालिक आपसे विनम्र निवेदन कर रहा है अपना माल हटाने का तो अपने आपको भाग्यशाली मानिए क्योंकि उसको कोई आवश्यकता नहीं है कि आपसे विनम्र निवेदन करे, वह आपसे डंडे के ज़ोर पर भी बात कर सकता है।

लेकिन एक बात जो बहुत सामान्य है और जिसको अधिकतर लोग व्यवहार में नहीं लाते वह है सामाजिक शिष्टाचार। क्या आप अपने पड़ोसी या किसी परिचित के घर जाते हैं और जो चीज़ आपको पसंद आती है वह आप बिना पूछे ऐसे ही उठा लाते हैं? यदि आप विनम्र होकर अमुक वस्तु को प्रयोग करने की अनुमति माँगे तो प्रायः अनुमति मिल ही जाती है। “प्लीज़” तथा “कृपया” जैसे शब्द बहुत प्रभावशाली होते हैं, इनका वार खाली जाने की बहुत कम संभावना होती है। तो क्यों लोग ऑनलाईन इस शिष्टाचार को भूल जाते हैं। यदि यह समझते हैं कि ऑनलाईन उनको कोई पकड़ नहीं सकता या उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता तो यह सोचना ठीक वैसा है जैसा कि किसी शुतुरमुर्ग का रेत में अपनी मुंडी छुपा सोचना कि उसको कोई देख नहीं सकता।

हाल ही की बात है कि मैं एक विषय पर एकाध लेख लिखने की सोच रहा था तो उससे संबन्धित कुछ ग्राफिक्स (graphics) आदि मुझे लेख में प्रयोग करने थे। अब जिन वेबसाइट पर वे ग्राफिक्स (graphics) थे वहाँ उनको प्रयोग करने संबन्धी कोई जानकारी नहीं थी जिसका यह अर्थ हुआ कि उनको प्रयोग नहीं किया जा सकता। तो इसलिए मैंने उन वेबसाइटों के मालिकों को निजी ईमेल लिख उनसे अनुमति लेना बेहतर समझा, उनको बताया कि किस कार्य के लिए मुझे वे ग्राफिक्स (graphics) चाहिए और उन्होंने बिना हिचके मुझे उन ग्राफिक्स (graphics) को अपने लेख में प्रयोग करने की अनुमति दे दी। यदि वे अनुमति नहीं देते तो मैं जबरन उनके माल को प्रयोग नहीं करने वाला था, उस स्थिति में मैं फिर वैसे ही अन्य ग्राफिक्स (graphics) देखता या फिर स्वयं अपने आप बनाता।

चोरी की बात तो यहाँ तक है कि बड़ी-२ कंपनियाँ तक कान पकड़ जाती हैं आम लोगों के सामने। अभी हाल ही की बात है, यहीं दिल्ली के एक परिचित, जो कि मेरी तरह शौकिया फोटोग्राफ़र है, द्वारा ली एक फोटो को बिना उनकी अनुमति के निकोन (nikon) वालों ने अपने विज्ञापन में छाप दिया था। जैसे ही उस परिचित को पता चला वह चढ़ दौड़ा निकोन (nikon) वालों पर और निकोन (nikon) वाले भी कदाचित्‌ कोई कोर्ट आदि का चक्कर नहीं लगाना चाहते थे इसलिए दोनो पार्टियों ने आपस में ही समझौता कर लिया जिसके तहत निकोन (nikon) वालों ने कुछ हर्जाना आदि देकर अपनी जान छुड़ाई। और इससे पहले एक अन्य प्रसिद्ध हाई-प्रोफाईल मामला तब हुआ था जब लगभग आठ-नौ महीने पहले याहू के मलयालम पोर्टल पर एक ब्लॉगर का चोरी किया लेख पूर्ण रूप में छाप दिया गया था बिना किसी अनुमति के और हल्ला मचने पर याहू ने दोष मढ़ दिया अपने माल के सप्लायर वेबदुनिया पर और सरेआम माफ़ी भी माँगी। रुचिकर बात यह रही कि पढ़ने में आया कि याहू द्वारा माफ़ी माँगने के कुछ ही दिन के भीतर याहू की भारतीय शाखा के कन्टेन्ट हेड (content head) अजय नाम्बियार और मनोरंजन हेड (head of entertainment) नियती सेनगुप्ता ने अपने-२ पदों से इस्तीफ़े दे दिए।

इसलिए सीधी-साधी सलाह यही है कि शिष्टाचार को नहीं भूलना चाहिए। जो लोग शिष्टाचार को औपचारिकता कह दरकिनार करते हैं उनको किसी जंगल में जाकर आदि-मानव की भांति रहना चाहिए क्योंकि सभ्य समाज में रहने लायक वे नहीं लगते। और साथ ही गूगल के मोटो (motto) Do no Evil यानि कि बुरा मत करो को ध्यान में रखिए, बेशक गूगल इसको मानने में अब यकीन न रखे लेकिन आप अवश्य रखिए क्योंकि आप गूगल नहीं हैं और बहुत लोग आपका बहुत कुछ उखाड़ सकते हैं, इसलिए पंगा काहे लें!! :)

 
तीन भागों का यह लेख आम जनता के लाभार्थ लिखा गया है और इसको लिखने के पीछे मेरा मकसद किसी से खुन्दक निकालना या किसी पर तंज कसना नहीं है।

 

Categories: mindless rants · फ़ालतू बड़बड़
Tagged: , , , ,

क्या आप चोर हैं? - भाग २

December 10, 2007 · 9 Comments

पिछले भाग से आगे …..

पिछले भाग पर कुछ शंकाएँ और प्रश्न माननीय पाठकों ने किए जिनके उत्तर तो मैंने वहीं टिप्पणी में दे दिए थे लेकिन यहाँ भी इसलिए छाप रहा हूँ कि जिन्होंने नहीं पढ़े वे लाभ उठा सकें क्योंकि ये कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और शंकाएँ हैं जो कि एकाध को नहीं वरन्‌ कई लोगों को हैं।

अनिल रघुराज जी ने कहा:

मैं तो flickr से ही फोटो लेता हूं। कैसे पता चलेगा कि कोई फोटो पब्लिक डोमेन में है या नहीं।

इसका उत्तर मैंने यूँ दिया:

अनिल जी, फ्लिकर पर कोई फोटो पब्लिक डोमेन में नहीं है, सभी कॉपीराईट के अंतर्गत उनके मालिकों की संपत्ति हैं। लेकिन बहुत लोगों ने फ्लिकर पर अपनी फोटो क्रिएटिव कॉमन्स (creative commons) लाइसेन्स के अंतर्गत रखी हुई हैं जिसके अनुसार आप उनका प्रयोग कर सकते हैं बशर्ते आप लाईसेन्स ले नियमों और शर्तों का पालन करें। आप फ्लिकर पर किसी भी फोटो को क्लिक कर उसके पेज पर पहुँच सकते हैं। वहाँ पर दाहिने ओर साइडबार में “Additional Information” के नीचे फोटो के लाइसेन्स संबन्धी जानकारी होती है। यदि “All rights reserved” लिखा है तो आप बिना अनुमति फोटो का प्रयोग नहीं कर सकते। लेकिन यदि क्रिएटिव कॉमन का ज़िक्र है तो उस पर क्लिक कर लाईसेन्स की शर्तों को पढ़िए और फिर उन शर्तों का पालन करते हुए आप उस फोटो का प्रयोग उसके मालिक की अनुमति के बिना भी कर सकते हैं क्योंकि ऐसी स्थिति में क्रिएटिव कॉमन लाइसेन्स के अंतर्गत अपने माल को डाल उन्होंने आपको प्रयोग करने की अनुमति दे दी है बशर्ते आप लाइसेन्स का पालन करें। मैंने भी इस ब्लॉग पर अपने पिछले कुछ लेखों में फ्लिकर से लिए हुए कुछ फोटो आदि प्रयोग किए हैं लेकिन वे सब क्रिएटिव कॉमन लाइसेन्स के अंतर्गत हैं और लाइसेन्स का मैंने पूर्ण रूप से अपने लेख में पालन किया है।

यह एक महत्वपूर्ण बात है क्योंकि अधिकतर लोग जल्दबाज़ी में अन्यथा अज्ञान के कारण ध्यान नहीं देते और समझते हैं कि गूगल या किसी अन्य सर्च इंजन अथवा फ्लिकर जैसी वेबसाइट पर मौजूद तस्वीर को उठा के प्रयोग कर सकते हैं। जैसा मैंने अनिल जी के प्रश्न का उत्तर दिया, आप फ्लिकर जैसी वेबसाइट अथवा गूगल जैसे सर्च इंजन से फोटो अपने प्रयोग के लिए ले सकते हैं, लेकिन आपको यह देखना पड़ेगा कि आप कौन सी फोटो आदि ले सकते हैं क्योंकि सभी फोटो आदि आप नहीं ले सकते।

इसके बाद रवि रतलामी जी ने पूछा:

मैंने किसी साइट से अर्जुन सिंह या ब्रिटनी का फोटो उठाया (जो कि सेलेब्रिटी हैं, और इनके फोटो सर्वत्र उपलब्ध हैं) तो क्या वो भी चोरी हुई?

जिसका उत्तर मैंने कुछ यूँ दिया:

रवि जी, बात सर्वत्र उपलब्ध होने की नहीं है। मैं यदि अपने घर के सामने वाले बाग़ में मौजूद एक गुलाब की फोटो लेता हूँ तो वह फोटो मेरा माल है। फूल तो सभी के लिए उपलब्ध है, कोई भी उसकी फोटो ले सकता है, जो फोटो लेगा वह फोटो उसका माल है। लेकिन यहाँ बात पब्लिक फिगर (public figure) की हो रही है। कॉपीराइट तो हर हाल में फोटो खींचने वाले का ही है, प्रश्न है कि क्या आप उसे बिना अनुमति प्रयोग कर सकते हैं कि नहीं। जहाँ तक मेरी जानकारी है, पब्लिक फिगर (public figure) या सेलेब्रिटी (celebrity) आदि का कोई फोटो जो हर जगह उपलब्ध है(जैसे प्रोमोशनल माल) उसका प्रयोग आप कर सकते हैं लेकिन यदि मैंने कोई खास फोटो खींचे हैं(फैशन शो में, या फोटोशूट में आदि) तो आप उनका प्रयोग मेरी अनुमति बिना नहीं कर सकते।

उनका अगला प्रश्न था:

और, क्या ये भी चोरी हुई कि किसी फोटो को इंटरनेट से उठाकर उसमें फोटो औजार से कुछ अदला-बदली कर इस्तेमाल कर लिया?

जिस पर मैंने कहा:

जी बिलकुल, यह भी उतना ही संगीन अपराध है जितना कि फोटो या इमेज को उसके मूल रूप में प्रयोग करना। गौरतलब बात है कि अभी मैंने अनिल जी को फ्लिकर पर मौजूद तस्वीरों के बारे में बताते हुए क्रिएटिव कॉमन लाइसेन्स का ज़िक्र किया है वह लाइसेन्स भी हर बार आपको मूल रचना में बदलाव करने की अनुमति नहीं देता। यदि इस लाइसेन्स में no derivatives की शर्त है तो आप मूल रचना में कोई बदलाव नहीं कर सकते।

फिर उन्होंने पूछा:

ये भी बताएँ, कि लीगली, डैमेजेस के तौर पर ऐसी सामग्री के इस्तेमाल करने वाले को क्या समस्या हो सकती है?

जिसके बारे में मैंने बताया:

जिसके कॉपीराइट का उल्लंघन आप कर रहे हैं वह चाहे तो आप पर कॉपीराईट उल्लंघन का मुकदमा ठोक सकता है और हर्जाने का दावा कर सकता है(जो कि लाखों या करोड़ों रुपयों में भी हो सकता है)। दोषी पाए जाने पर अदालत द्वारा तय किए गये हर्जाने को आपको भरना पड़ सकता है, न भरने की स्थिति में जेल भी हो सकती है।

तत्पश्चात उनका प्रश्न था:

क्या वह तब भी चोरी हुई जब उसे साभार सहित कड़ी देते हुए इस्तेमाल किया जा रहा है?

जिसके उत्तर में मैंने कहा:

हो सकती है, तब भी चोरी हो सकती है। फर्ज़ कीजिए कि मैं आपकी गाड़ी उठा के अपने घर ले आता हूँ और उस पर बोर्ड टाँग देता हूँ कि “साभार: रवि रतलामी” तो आप क्या कहेंगे? ;) किसी का माल बिना उसकी अनुमति जबरन ले आना चोरी ही है, चाहे आप साभार दें अथवा न दें।

फिर उन्होंने शंका व्यक्त की:

रचनाकार समेत बहुत सी साइटों जिनमें कि गिज्मेडो इत्यादि भी है, चित्रों को साभार पुनः प्रकाशित करते हैं (आमतौर पर अनुमति प्राप्त करने का झंझट नहीं मोल लेते) तो इनमें क्या लीगल कॉम्प्लीकेशन्स हो सकते हैं?

जिसके समाधान के तौर पर मैंने कहा:

बिलकुल हो सकती हैं यदि आपके पास उक्त माल को प्रयोग करने की अनुमति नहीं है। क्रिएटिव कॉमन आदि जैसे लाइसेन्स एक तरह से लिखित अनुमति ही है जो आपको उस माल का प्रयोग करने की छूट देती है यदि आप उसकी शर्तों का पालन करते हैं। लेकिन यदि किसी ने अपने माल की कोई लिखित अनुमति नहीं दी तो आप उसका प्रयोग नहीं कर सकते। गिज़्मोडो आदि ब्लॉग के बारे में पता नहीं कि वे कैसे प्रयोग करते हैं लेकिन यदि अनुमति नहीं है तो प्रयोग गैरकानूनी है और यदि माल का मालिक चाहे तो मुकदमा ठोक सकता है और बहुदा चान्स है कि मालिक मुकदमा जीत भी जाएगा।

सागर जी ने पूछा:

क्या अब भी उन चित्रों को जहा से उठाया है उनको श्रेय दे दें?

तो इसके उत्तर में मैंने कहा:

सागर जी, श्रेय देने से काम नहीं बनेगा ना!! पहले देखिए कि जो जिसका माल आपने उठाया है वह किसी लाइसेन्स के अंतर्गत प्रयोग करने की अनुमति देता है कि नहीं। यदि नहीं तो या तो आप लिखित अनुमति(ईमेल भी लिखित अनुमति होती है) ले सकते हैं और यदि आपका मन नहीं है तो मत लीजिए अनुमति लेकिन ऐसा करने पर आपके ऊपर सदैव एक तलवार टंगी रहेगी कि उक्त माल का मालिक कभी भी आपको अदालत ले जा सकता है!!

जारी है अगले भाग में …..

Categories: mindless rants · फ़ालतू बड़बड़
Tagged: , , , ,

क्या आप चोर हैं?

December 6, 2007 · 14 Comments

क्या आप -

  • किसी भी वेबसाईट या ब्लॉग आदि पर कोई फोटो (photo) या इमेज (image) या अन्य कोई चीज़ पसंद आने पर उसको सेव (save) कर लेते हैं और फिर बाद में उसको किसी वेबसाईट अथवा ब्लॉग आदि पर प्रयोग करते हैं?
  • गूगल आदि किसी सर्च इंजन में किसी खोज के दौरान आई किसी फोटो या इमेज या अन्य चीज़ को अपने मन-माफ़िक बिना उस चीज़ के मालिक की आज्ञा के प्रयोग करते हैं?

यदि इन दोनो प्रश्नों में से किसी भी प्रश्न का उत्तर हाँ में है तो सावधान, यह लगभग तय है कि आप चोरी कर रहे हैं।

गूगल आदि सर्च इंजन आपको फोटो और इमेज आदि खोजने की सुविधा देते हैं लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आप उनको प्रयोग भी कर सकते हैं।

क्या? कैसे? क्यों?
दुनिया भर की कानून की किताबों में कॉपीराइट (copyright) नाम की चिड़िया के जीवन का प्रावधान होता है। यह एक ऐसा कानून है जो कि किसी भी बौद्धिक (intellectual), सृजनात्मक (creative), कलात्मक (artistic) विचार अथवा कार्य को उसके रचियता की जागीर बनाता है और रचियता को यह स्वतंत्रता देता है कि वह जैसे चाहे अपने माल का प्रयोग करे और दूसरा कोई उसके माल का प्रयोग उसकी मर्ज़ी के बिना न कर सके। यानि कि यदि मैंने कोई लेख लिखा है तो वह तब तक मेरा कॉपीराइटिड माल है जब तक या तो मैं उस पर अपना कॉपीराइट छोड़ के उसको पब्लिक डोमेन (public domain) का माल नहीं बना देता या उस माल पर अपना कॉपीराइट किसी अन्य को नहीं दे देता। यदि कॉपीराइट मैंने अपने पास ही रखा है तो मैं उस माल को किसी भी शर्त (लाईसेन्स - licence) के अंतर्गत किसी अन्य को प्रयोग करने का अधिकार दे सकता हूँ। दूसरा व्यक्ति जब तक उन शर्तों को मानते हुए मेरे माल का प्रयोग करेगा तब तक ठीक है, यदि वह शर्तों का उल्लंघन करता है तो मैं कानून की सहायता ले उस व्यक्ति पर मुकदमा ठोक सकता हूँ।

यहाँ कैसे लागू?
तो फोटो और इमेज आदि के संदर्भ में भी ऐसा ही कॉपीराइट का प्रावधान है। कॉपीराइट का कानून वास्तविक दुनिया में प्रिंट पर भी लागू होता है और इंटरनेट की इलेक्ट्रॉनिक दुनिया में भी। तो यदि मैंने कोई फोटो ली है तो उसका कॉपीराइट मेरा है और यदि मेरी इजाज़त के बगैर उसका कोई प्रयोग करता है तो वह सीधे शब्दों में चोर है क्योंकि वह मेरा माल जबरन प्रयोग कर रहा है। गूगल आदि सर्च इंजन आपको फोटो और इमेज आदि खोजने की सुविधा देते हैं लेकिन इसका अर्थ यह कतई नहीं है कि आप उनको प्रयोग भी कर सकते हैं। यह ठीक वैसे ही है जिस प्रकार टेलीफोन डायरेक्टरी या येलो पेज (yellow pages) होते हैं जिनमें आप कोई भी पता फोन नंबर से तलाश कर सकते हैं लेकिन इसका यह अर्थ बिलकुल नहीं होता कि जिस फोन नंबर का पता आपने ढूँढा वह पता आपको पसंद आया तो उस पते पर मौजूद मकान आदि को आप अपने हिसाब से प्रयोग करने के लिए आज़ाद हो गए!! यदि उस पते पर मौजूद इमारत का मालिक आपको उस इमारत को प्रयोग करने की आज्ञा देता है तभी आप उसको इस्तेमाल कर सकते हैं। ठीक इसी तरह आपको यदि कॉपीराइट मालिक अपना माल प्रयोग करने की आज्ञा देता है तभी आप उसकी चीज़ को इस्तेमाल कर सकते हैं।

जारी है अगले भाग में …..

Categories: mindless rants · फ़ालतू बड़बड़
Tagged: , , , ,

ऐडसेन्स या नॉनसेन्स? - भाग २

December 3, 2007 · 13 Comments

पिछले भाग से आगे …..

अज्ञानीलाल तो खैर अज्ञानी थे, मृगतृष्णा के पीछे भागे और बहक गए। लेकिन उनके साथ जो हुआ यह कोई आवश्यक नहीं कि हर बहके हुए व्यक्ति के साथ हो, या फिर, सिर्फ़ बहके हुए व्यक्ति के साथ ही हो। एक पुरानी कहावत है:

गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाता है

और यह बिलकुल सत्य है, इस संदर्भ में तो बिलकुल से भी बिलकुल सत्य है, अनेकों प्रमाण ढूँढने वाले की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मस्तलाल एक मस्त व्यक्ति, शौकिया अपना ब्लॉग लिखता और कोई टेन्शन नहीं लेता। गूगल ऐडसेन्स (AdSense) आया तो कौतुहलवश उसने भी अर्ज़ी लगा दी और अर्ज़ी मंज़ूर होकर भी आ गई। फिर कुछ समय बाद न जाने क्या सोच उसने आज़माने की सोची और अपने ब्लॉग पर ऐडसेन्स (AdSense) के विज्ञापन लगा दिए यह सोच कि देखा जाए कितनी कमाई हो सकती है। कुछ दिन बीते, महीना बीता, खाते में सिर्फ़ कुछ सेन्ट ही आए लेकिन मस्तलाल को कोई टेन्शन नहीं। फिर एक दिन ऐडसेन्स (AdSense) वालों की ओर से एक ईमेल आई जिसमें मस्तलाल को सूचित किया गया कि उसकी वेबसाइट पर विज्ञापनों पर खामखा के क्लिक हुए हैं और इसलिए उसका ऐडसेन्स (AdSense) खाता रद्द किया जाता है। मस्तलाल ने कहा भी कि उसने कोई क्लिक नहीं किए हैं और यदि कोई और उसकी वेबसाइट पर आकर एक के बाद एक क्लिक कर देता है तो उसमें उसकी क्या गलती!! लेकिन ऐडसेन्स (AdSense) विभाग में बैठे मूर्ख के पास कदाचित्‌ भाषा का अभाव था इसलिए उसने एक पहले से तैयार झाड़ू छाप उत्तर कॉपी-पेस्ट कर भेज दिया। मस्तलाल तो फिर मस्त बंदा, उसने कहा भाड़ में जाओ और ऐडसेन्स (AdSense) के विज्ञापन ब्लॉग से हटा दिए जो कि खाता रद्द होने के बाद भी उसके ब्लॉग पर आ रहे थे!!!

यानि कि अपना भला स्वयं करना तो बुरा है ही, कोई अन्य भी आपका इसी तरह भला करके जा सकता है!! अज्ञानीलाल और मस्तलाल पात्र बेशक काल्पनिक हैं लेकिन दोनो वाकये काल्पनिक नहीं हैं, ऐसा होता है, हुआ है और होता आ रहा है। यानि कि यदि आपने अपनी वेबसाइट या ब्लॉग आदि पर ऐडसेन्स (AdSense) के विज्ञापन लगा रखे हैं तो कोई व्यक्ति जिसकी आपसे खुन्नस हो वह आकर क्लिकों की झड़ी लगा सकता है और यदि आपकी वेबसाइट औसतन कम क्लिक पैदा करने वाली है तो यह क्लिकों की झड़ी गूगल के अपंग रडार पर तुरंत दिखाई दे जाएगी जिसका सीधा हल उनके पास आपका खाता रद्द करने और आपकी कमाई रकम को जब्त करने के रूप में है। अज्ञानीलाल के वाकये को बेशक मैंने ज़रा अतिश्योक्ति में चित्रित किया लेकिन मस्तलाल(काल्पनिक नाम) वाला वाकया एक वास्तविक व्यक्ति के साथ हुए वाकये का उल्लेख है। और यह सिर्फ़ एक मस्तलाल की कहानी नहीं है, ज़रा गूगल पर ही खोज लीजिए अनेकों ऐसे उदाहरण मिल जाएँगे। अब मैं यह नहीं कह रहा कि ऐडसेन्स से निष्कासित प्रत्येक व्यक्ति सत्य कहता है कि उसने कुछ गलत नहीं किया लेकिन बात यहाँ गेहूँ के साथ पिस रहे घुन की है।

लगता है कि गूगल का मानना है कि जो पकड़ा जाए वह चोर है और हर चोर पैदायशी चोर है

गूगल यहाँ ईश्वर की भूमिका निभा रहा है, जो वह कहे वही सत्य है। उसको कोई प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है कि आपने कोई गलत कार्य किया, कह देना ही काफ़ी है। आज ऐडसेन्स (AdSense) से अधिक प्रयोग होने वाला शायद ही कोई विज्ञापन नेटवर्क हो। लेकिन कदाचित्‌ ऐडसेन्स (AdSense) विभाग अपने रडार में मौजूद कमियों को सुधारने में न तो यकीन रखता है और न ही कोई रूचि। कदाचित्‌ वह आगे निकल चुके खरगोश की तरह यह सोच बैठा है कि उससे आगे कोई निकल नहीं सकता इसलिए वह आराम कर रहा है, सुस्ता रहा है। हाएपोथेसिस साफ़ है, बड़ी वेबसाइटें जहाँ क्लिकों की भरमार है उनको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, उनके यहाँ कम-ज़्यादा क्लिक कोई संदेह कदाचित् ही उत्पन्न करें लेकिन छोटी वेबसाइट चलाने वाले पूरे के पूरे खतरे में हैं, उनकी कोई भी वाट लगा सकता है और वाट लगने के बाद अपील तो कर सकते हो लेकिन सुनवाई होगी इसकी संभावना एक प्रतिशत से भी कम है।

और खामखा हुए क्लिकों की तो बात छोड़िए, यदि ईमानदारी वाली कमाई आपके गूगल खाते में है तो तथाकथित बेईमानी वाली कमाई के साथ-२ वह भी छिन जाएगी। क्योंकि लगता है कि गूगल का मानना है कि जो पकड़ा जाए वह चोर है और हर चोर पैदायशी चोर है जिसने चोरी के अतिरिक्त न तो कुछ किया है और न ही कुछ करेगा। कुछ समझ आता है कि इसका अर्थ क्या है? इसका अर्थ यह है कि इस सिस्टम को बनाने वाले मूढ़ इंजीनियर बहुत अर्से से मशीनों के साथ रहते आए हैं जहाँ ० और १ की ही भाषा चलती है, अन्य कुछ नहीं। कदाचित्‌ मैनेजमेन्ट को चाहिए कि उन बेचारे इंजीनियरों को उनके बाड़े से बाहर निकालें और कुछ समय जीवित मनुष्यों और जानवरों के साथ बिताने दें। साथ ही अपने ज्ञान के दंभ के नीचे दबे उन इंजीनियरों को चाहिए कि सच्चाई का सामना करें, उनका सिस्टम फूलप्रूफ़ नहीं है, इसका कोई भी गेम बजा सकता है। इस बात को न स्वीकारना ठीक वैसा है जैसा पाकिस्तान के हुक्मरानों का यह सोचना कि अमेरिका उसका सगा है और चीन उसके लिए आया खुदाई मददगार!! या फिर शतुरमुर्ग की तरह सोचना कि रेत में मुंडी छुपा लेने के कारण उसको कोई देख नहीं सकता!!

जिन लोगों को इस बात से झटका लगा है उनको यही कहूँगा, साईबरस्पेस में आपका स्वागत है। :) यहाँ पर गूगल एक ऐसा दानव है जिससे पंगा लेकर कोई जीवित नहीं रह सकता। ;)

Categories: blogging · internet · mindless rants · sarcasm · इंटरनेट · ब्लॉगिंग · व्यंग्य · फ़ालतू बड़बड़
Tagged: , , ,

ऐडसेन्स या नॉनसेन्स?

December 1, 2007 · 13 Comments

अज्ञानीलाल ने कहीं पढ़ा कि ब्लॉगस्पॉट पर फोकट में ब्लॉग बनाया जा सकता है और उस पर गूगल के ऐडसेन्स (AdSense) वाले विज्ञापन लगा दो और फिर बस बैठकर देखते जाओ, डॉलरों की बरसात हो जाती है। बस फिर क्या था, तुरत-फुरत अज्ञानीलाल ने ब्लॉग बनाया, टशन वाली टेमप्लेट (template) लगाई, थोड़ा इधर से थोड़ा उधर से पोस्ट करने के लिए माल मसाला जुगाड़ा। ऐडसेन्स (AdSense) के खाते की मंजूरी भी थोड़े दिन में आ गई और बस फिर क्या था, अज्ञानीलाल ने पूरे ब्लॉग को विज्ञापनों से सजा दिया और डॉलरों की बरसात की प्रतीक्षा करने लगा। एक दिन बीता, दो दिन बीते, दिन पर दिन बीते, लेकिन एक फूटी कौड़ी भी न आई बेचारे के खाते में। उसने फिर कंप्यूटर के चूहे को दौड़ाया, कुछ क्लिक वगैरह किए और कहीं पढ़ा कि विज्ञापन पर क्लिक होगा तभी कुछ उसका भला होगा। फिर किसी समझदार मित्र ने समझाया कि दूसरे की बाट क्यों देखो कि वह तुम्हारा भला करने आएगा। अज्ञानीलाल को बात जंच गई और उसने अपना भला स्वयं ही करने की सोची। लेकिन पहले उसने इस बात को परखना उचित समझा कि क्या वह अपना भला स्वयं कर सकता था कि नहीं। उसने कुछ क्लिक किए, नतीजा सामने आया, कई डॉलरों की तो नहीं लेकिन कुछ आधे, कुछ पूरे, कुछ चौथाई डॉलरों की एन्ट्री अवश्य हो गई उसके खाते में!!

मामला सैट, अपना भला स्वयं कर सकता था, बस फिर क्या था, लग गया दनादन क्लिक पर क्लिक करने। सुबह उठ दिशा मैदान के बाद थोड़े क्लिक करता, नाश्ता करने के बाद थोड़े क्लिक करता, ऑफिस पहुँच थोड़े क्लिक करता, लंच आननफानन निपटा के क्लिक करता, शाम को बॉस बुलाए तो क्लिक करके जाता, वापस आकर थोड़े क्लिक करता, ऑफिस से निकलने के पहले थोड़े क्लिक, फिर घर पहुँच थोड़े क्लिक, रात्रि भोजन के पश्चात थोड़े क्लिक, लल्लू को होमवर्क कराते समय क्लिक, सोने से पहले थोड़े और क्लिक। समस्या तो उसकी यह थी कि वह नींद में भी क्लिक करता था लेकिन उनकी गिनती नहीं हो पाती थी गूगल के सर्वर पर इसलिए उनसे कुछ हासिल नहीं होता था। खुजली वाला कुत्ता इतनी बार दिन में नहीं खुजाता होगा जितनी बार क्लिकरोग से ग्रसित अज्ञानीलाल एक दिन में क्लिकियाते थे!!

मेहनत का फल मीठा होता है, चाहे देखने में ही मीठा लगे!! अज्ञानीलाल के खाते में सेन्ट दर सेन्ट जुड़ते गए और तकरीबन नब्बे डॉलर जमा हो गए। घर पर क्लिकियाने के बाद अज्ञानीलाल प्रसन्नचित्त मुद्रा में ऑफिस पहुँचे, सोचे कि दिन ढलते-२ गूगल से पहले चेक लायक सौ डॉलर तो बना ही लेंगे, महीने भर का गाड़ी के पेट्रोल का खर्च तो निकल आया समझो। लेकिन ऑफिस पहुँच ईमेल का डिब्बा खोलते ही उनकी कुर्सी के नीचे से मानो ज़मीन निकल गई(अब पैर ज़मीन पर नहीं थे नहीं तो उनके नीचे से भी निकल जाती)!!

काहे? अरे भई ऐडसेन्स (AdSense) विभाग से ईमेलवा आया था और ऊ यह नहीं कह रहा था कि बबुआ अज्ञानीलाल तुहार चेक भेज दिए हैं, ऊ कह रहा था कि बच्चू तुम सेर तो हम सवा सेर, अपना भला स्वयं करने के अपराध में तुहार खाता बंद किया जा रहा है और जमा सभी डॉलर बमय सेन्ट जब्त किए जाते हैं, राम का नाम लो और निकल लो पतली गली से, दोबारा भूल के भी मत झांकना इस गली में!!!

बेचारा अज्ञानीलाल, अपना भला होने के लिए दूसरों की प्रतीक्षा कर लेता तो यह दिन खराब न जाता, दोनो समय का खाना गले से नीचे उतर रहा होता, लल्लू को गणित का प्रश्न हल न कर पाने पर झापड़ का प्रसाद नहीं दिया होता….. हाय कोमल सा लल्लू, अभी बेचारा सिर्फ़ आठ साल का ही तो है!!!

क्या इस भयावह हादसे से अज्ञानीलाल बच जाता यदि वह दूसरे अंजान लोगों की प्रतीक्षा करता अपना भला करने के लिए?

जानने के लिए पढ़िए वेब २.० (Web 2.0) की एक भयावह और अनसुलझी पहेली पर रोशनी डालने वाला सनसनीखेज खुलासा…..

 
फोटो साभार: dullhunk
 

Categories: blogging · internet · mindless rants · sarcasm · इंटरनेट · ब्लॉगिंग · व्यंग्य · फ़ालतू बड़बड़
Tagged: , , ,