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ऐडसेन्स या नॉनसेन्स? - भाग २

December 3, 2007 · 13 Comments

पिछले भाग से आगे …..

अज्ञानीलाल तो खैर अज्ञानी थे, मृगतृष्णा के पीछे भागे और बहक गए। लेकिन उनके साथ जो हुआ यह कोई आवश्यक नहीं कि हर बहके हुए व्यक्ति के साथ हो, या फिर, सिर्फ़ बहके हुए व्यक्ति के साथ ही हो। एक पुरानी कहावत है:

गेहूँ के साथ घुन भी पिस जाता है

और यह बिलकुल सत्य है, इस संदर्भ में तो बिलकुल से भी बिलकुल सत्य है, अनेकों प्रमाण ढूँढने वाले की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

मस्तलाल एक मस्त व्यक्ति, शौकिया अपना ब्लॉग लिखता और कोई टेन्शन नहीं लेता। गूगल ऐडसेन्स (AdSense) आया तो कौतुहलवश उसने भी अर्ज़ी लगा दी और अर्ज़ी मंज़ूर होकर भी आ गई। फिर कुछ समय बाद न जाने क्या सोच उसने आज़माने की सोची और अपने ब्लॉग पर ऐडसेन्स (AdSense) के विज्ञापन लगा दिए यह सोच कि देखा जाए कितनी कमाई हो सकती है। कुछ दिन बीते, महीना बीता, खाते में सिर्फ़ कुछ सेन्ट ही आए लेकिन मस्तलाल को कोई टेन्शन नहीं। फिर एक दिन ऐडसेन्स (AdSense) वालों की ओर से एक ईमेल आई जिसमें मस्तलाल को सूचित किया गया कि उसकी वेबसाइट पर विज्ञापनों पर खामखा के क्लिक हुए हैं और इसलिए उसका ऐडसेन्स (AdSense) खाता रद्द किया जाता है। मस्तलाल ने कहा भी कि उसने कोई क्लिक नहीं किए हैं और यदि कोई और उसकी वेबसाइट पर आकर एक के बाद एक क्लिक कर देता है तो उसमें उसकी क्या गलती!! लेकिन ऐडसेन्स (AdSense) विभाग में बैठे मूर्ख के पास कदाचित्‌ भाषा का अभाव था इसलिए उसने एक पहले से तैयार झाड़ू छाप उत्तर कॉपी-पेस्ट कर भेज दिया। मस्तलाल तो फिर मस्त बंदा, उसने कहा भाड़ में जाओ और ऐडसेन्स (AdSense) के विज्ञापन ब्लॉग से हटा दिए जो कि खाता रद्द होने के बाद भी उसके ब्लॉग पर आ रहे थे!!!

यानि कि अपना भला स्वयं करना तो बुरा है ही, कोई अन्य भी आपका इसी तरह भला करके जा सकता है!! अज्ञानीलाल और मस्तलाल पात्र बेशक काल्पनिक हैं लेकिन दोनो वाकये काल्पनिक नहीं हैं, ऐसा होता है, हुआ है और होता आ रहा है। यानि कि यदि आपने अपनी वेबसाइट या ब्लॉग आदि पर ऐडसेन्स (AdSense) के विज्ञापन लगा रखे हैं तो कोई व्यक्ति जिसकी आपसे खुन्नस हो वह आकर क्लिकों की झड़ी लगा सकता है और यदि आपकी वेबसाइट औसतन कम क्लिक पैदा करने वाली है तो यह क्लिकों की झड़ी गूगल के अपंग रडार पर तुरंत दिखाई दे जाएगी जिसका सीधा हल उनके पास आपका खाता रद्द करने और आपकी कमाई रकम को जब्त करने के रूप में है। अज्ञानीलाल के वाकये को बेशक मैंने ज़रा अतिश्योक्ति में चित्रित किया लेकिन मस्तलाल(काल्पनिक नाम) वाला वाकया एक वास्तविक व्यक्ति के साथ हुए वाकये का उल्लेख है। और यह सिर्फ़ एक मस्तलाल की कहानी नहीं है, ज़रा गूगल पर ही खोज लीजिए अनेकों ऐसे उदाहरण मिल जाएँगे। अब मैं यह नहीं कह रहा कि ऐडसेन्स से निष्कासित प्रत्येक व्यक्ति सत्य कहता है कि उसने कुछ गलत नहीं किया लेकिन बात यहाँ गेहूँ के साथ पिस रहे घुन की है।

लगता है कि गूगल का मानना है कि जो पकड़ा जाए वह चोर है और हर चोर पैदायशी चोर है

गूगल यहाँ ईश्वर की भूमिका निभा रहा है, जो वह कहे वही सत्य है। उसको कोई प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं है कि आपने कोई गलत कार्य किया, कह देना ही काफ़ी है। आज ऐडसेन्स (AdSense) से अधिक प्रयोग होने वाला शायद ही कोई विज्ञापन नेटवर्क हो। लेकिन कदाचित्‌ ऐडसेन्स (AdSense) विभाग अपने रडार में मौजूद कमियों को सुधारने में न तो यकीन रखता है और न ही कोई रूचि। कदाचित्‌ वह आगे निकल चुके खरगोश की तरह यह सोच बैठा है कि उससे आगे कोई निकल नहीं सकता इसलिए वह आराम कर रहा है, सुस्ता रहा है। हाएपोथेसिस साफ़ है, बड़ी वेबसाइटें जहाँ क्लिकों की भरमार है उनको कोई फर्क नहीं पड़ने वाला, उनके यहाँ कम-ज़्यादा क्लिक कोई संदेह कदाचित् ही उत्पन्न करें लेकिन छोटी वेबसाइट चलाने वाले पूरे के पूरे खतरे में हैं, उनकी कोई भी वाट लगा सकता है और वाट लगने के बाद अपील तो कर सकते हो लेकिन सुनवाई होगी इसकी संभावना एक प्रतिशत से भी कम है।

और खामखा हुए क्लिकों की तो बात छोड़िए, यदि ईमानदारी वाली कमाई आपके गूगल खाते में है तो तथाकथित बेईमानी वाली कमाई के साथ-२ वह भी छिन जाएगी। क्योंकि लगता है कि गूगल का मानना है कि जो पकड़ा जाए वह चोर है और हर चोर पैदायशी चोर है जिसने चोरी के अतिरिक्त न तो कुछ किया है और न ही कुछ करेगा। कुछ समझ आता है कि इसका अर्थ क्या है? इसका अर्थ यह है कि इस सिस्टम को बनाने वाले मूढ़ इंजीनियर बहुत अर्से से मशीनों के साथ रहते आए हैं जहाँ ० और १ की ही भाषा चलती है, अन्य कुछ नहीं। कदाचित्‌ मैनेजमेन्ट को चाहिए कि उन बेचारे इंजीनियरों को उनके बाड़े से बाहर निकालें और कुछ समय जीवित मनुष्यों और जानवरों के साथ बिताने दें। साथ ही अपने ज्ञान के दंभ के नीचे दबे उन इंजीनियरों को चाहिए कि सच्चाई का सामना करें, उनका सिस्टम फूलप्रूफ़ नहीं है, इसका कोई भी गेम बजा सकता है। इस बात को न स्वीकारना ठीक वैसा है जैसा पाकिस्तान के हुक्मरानों का यह सोचना कि अमेरिका उसका सगा है और चीन उसके लिए आया खुदाई मददगार!! या फिर शतुरमुर्ग की तरह सोचना कि रेत में मुंडी छुपा लेने के कारण उसको कोई देख नहीं सकता!!

जिन लोगों को इस बात से झटका लगा है उनको यही कहूँगा, साईबरस्पेस में आपका स्वागत है। :) यहाँ पर गूगल एक ऐसा दानव है जिससे पंगा लेकर कोई जीवित नहीं रह सकता। ;)

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13 responses so far ↓

  • Sanjeeva Tiwari // December 3, 2007 at 8:15 am

    बडे पते की बात बताया है भाई, हमें तो पता ही नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है, यानि कि गूगल अक्‍खा इंटरनेट का भाई है । हा हा हा ।

  • Pramendra Pratap Singh // December 3, 2007 at 8:30 am

    बात उन दिनों की है जब मै ब्‍लगा की दुनिया में नया नया आया था, और मुझे ज्‍यादा पता नही था मैने भी खुब कमाई की थी। करीब एक महीने में 25 डालर, किन्तु इन्‍काम टैक्‍स न भरने के कारण सब गूगल वाले वापस ले कर चले गये। :)

  • sanjay tiwari // December 3, 2007 at 9:37 am

    भाई एडसेंस है बकवास अब यह मेरे भी समझ में आने लगा है. शुरू में मुझे लगता था कि चलो थोड़ी बहुत कमाई हो तो क्या हर्ज है लेकिन अव्वल को वह एक जगह आकर अटक गया है और महीनों से वहीं ठिठका हुआ है. दूसरे रकम 100 डॉलर तक पहुंची तो ऐसा ही कोई बहाना नहीं बना दिया जाए इसकी क्या गारंटी है?

  • kakesh // December 3, 2007 at 10:57 am

    ज्ञान प्राप्त किया जी.

  • संजय बेंगाणी // December 3, 2007 at 11:00 am

    जब तक आपके पास पैसे नहीं आ जाते उनके जप्त होने का खतरा बना रहता है, वैसे बिना घबराए विज्ञापन लगाये रखिये, आ गये तो ठीक, वरना कौन-से अपने थे? :)

  • Amit // December 3, 2007 at 12:09 pm

    किन्तु इन्‍काम टैक्‍स न भरने के कारण सब गूगल वाले वापस ले कर चले गये।

    हा हा हा!! ;)

    दूसरे रकम 100 डॉलर तक पहुंची तो ऐसा ही कोई बहाना नहीं बना दिया जाए इसकी क्या गारंटी है?

    संजय तिवारी जी, गारंटी तो कोई नहीं है, लेकिन जब हज़ारों लाखो लोगों को पैसे मिलते हैं तो इसी से कुछ सांत्वना बनी रहती है कि गोलमाल नहीं होगा और पैसे मिल जाएँगे!! वैसे न्यूनतम राशि का फंडा हर विज्ञापन नेटवर्क का होता है, कोई आपको पचास डॉलर से कम नहीं देगा तो कोई सौ(जैसे ऐडसेन्स) से कम नहीं देगा।

    ज्ञान प्राप्त किया जी

    धन्यवाद :)

    बहुत सही नज़रिया है संजय भाई!! ;)

  • सृजन शिल्पी // December 3, 2007 at 1:11 pm

    अच्छा ज्ञानवर्धन किया।

  • रवि // December 4, 2007 at 1:15 pm

    प्लीज़, अपने चिट्ठे पर से स्नैपशॉट प्लगइन हटा दें. यह बहुत ही डिस्टर्ब करता है. बहुत :(

  • Amit // December 4, 2007 at 2:40 pm

    रवि जी, यह ब्लॉग वर्डप्रैस.कॉम पर है जहाँ प्लगिन लगाने हटाने की सुविधा नहीं है। इसलिए खेद है कि फिलहाल इस बारे में मैं कुछ नहीं कर सकता।

  • जगदीश भाटिया // December 5, 2007 at 7:55 pm

    अमित जी, वर्डप्रैस.कॉम पर स्नैपशॉट हटाने के लिये जहां थीम चुनते हैं वहां एक्स्ट्रास में ऑपशन होता है।

  • Amit // December 5, 2007 at 9:18 pm

    बताने के लिए धन्यवाद जगदीश जी। इस वाली थीम में पहले यह ऑप्शन नहीं था(मैं खुद इस स्नैपशॉट से तंग था और इससे बचने के लिए जावास्क्रिप्ट डिसेबल रखता हूँ)। अभी पुनः देखा तो पता चला कि इस थीम के लिए भी यह ऑप्शन अब उपलब्ध है, इसलिए इस स्नैपशॉट को हटा दिया गया है! :)

  • अंकुर गुप्ता // December 13, 2007 at 3:44 am

    जबर्दस्त लेख लिखा. एक एक शब्द बिल्कुल सही और सटीक. आपके लेख का मस्तलाल मैं ही तो हूं.
    पहले मैं हिंदी ब्लाग बस चलाता था. उसमे कुछ विशेष कमाई तो नही थी. फ़िर मैने एक वेबसाइट शुरू की. केवल दो महीनो में वेबसाइट की ये हालत हो गई कि जितने पेज व्यू मेरे हिंदी ब्लाग में एक माह में नही होते थे उतने मेरी साइट में ३-४ दिन में होने लगे. एडसेंस में पैसे भी बढ़ने लगे. मैं खुश हो गया. होता भी क्योकि वेबसाइट पर खूब मेहनत की थी. ये आशा भी जगी कि अगर ऐसी ही वेबसाइट की परफ़ार्मेंस रही तो १-२ माह में चेक जरूर मिल जायेगा. फ़िर मानो मेरे ऊपर बिजली गिरी. एकाएक बिना पूर्व सूचना के मेरा एड्सेंस एकाउंट बंद हो गया.
    खूब प्रयास किया. एडसेंस सपोर्ट को ई मेल से लेकर गूगल इंडिया को फ़ोन तक हर तरह से प्रयास किया पर हम तो घुन की तरह पिस गये.
    सबसे आश्चर्य की बात ये है कि मुझे ऐसी कोई सूचना नही मिली कि मेरा एडसेंस एकाउंट इनवैलिड क्लिक की वजह से बंद हुआ है. बल्कि मुझसे ये कहा गया कि मेरा एकाउंट एडवर्ड पब्लिशर्स के लिये खतरा है. अब ये खतरा कैसे है, ये तो केवल गूगल जानता है. इंटरनेट पर खोजा तो पता लगा कि मेरे जैसे बहुत हैं पर सभी छोटे लोग हैं यानि कि किसी का भी इंटरनेट पर करोड़ों का बिजनेस नही है.
    अब जरा सोचिये अगर किसी के करोडों रुपये गूगल इसी तरह से गायब कर दे तो या तो उस आदमी को तो हार्ट अटैक आ जायेगा या फ़िर वो गूगल को कोर्ट में घसीटेगा. पर जब किसी के १०००-१५०० ही गायब होते हैं तो कोई कोर्ट क्यों जायेगा.
    इस बात को देखते हुये मुझे दाल मे कुछ काला दिख रहा है.
    वैसे मुझे लगता है कि इस तरह के एकाधिकार को खत्म करने के लिये किसी अन्य कंपनी को आगे आना होगा. माइक्रोसाफ़्ट तो अपने विंडोज लाइव सर्विसेस के साथ पूरे जोर शोर से लगी है. विकीपीडिया में लाइव सर्विसेज के बारे में पढा़ तो लगा कि अगर ये सर्विसेज सफ़ल हो जाती हैं तो जरूर माइक्रोसाफ़्ट गूगल को काफ़ी टक्कर दे सकती है.

  • kunnu singh // December 15, 2007 at 5:30 pm

    ye sab padh ke mughay to dar lag raha hai ab mai adsense band he kar deta hun mughay lagta hai ki google apna paisa aishe he tareeko se kamata hai! kyoun ki aishe he na jane kai logon ka account disable hua hoga. aagar koi $50 bhi banaleta hai to google ka to $50 se bhi jayada faida hua ab chahe account disable ho ya na ho ishse to google ka to faida hua aur wo bhi double ka ek to jish bhi ads par click hua ushka paisha aur jishka account disable hua ushkaa paisha bhi neahi dena padegaa

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