Entries categorized as 'कार्टून'
मुम्बई ले लो….. बंगलूरु ले लो….. कोलकाता ले लो…..
January 25, 2008 · 6 Comments
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सही तरीका??
January 2, 2008 · 2 Comments
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ऐसे कब तक चलेगा …..
January 1, 2008 · 7 Comments
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समस्या है…..
December 31, 2007 · 4 Comments
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अंडरग्राउंड …..
September 29, 2007 · 3 Comments
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ओ ऽऽ राम तेरा ऽऽ सेतु
September 19, 2007 · 13 Comments
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बैकअप जो लिया होता …..
August 14, 2007 · 14 Comments
कल मेरे मोबाइल को पता नही क्या हुआ, रेडियो सुनते-२ अचानक अटक गया। मैंने सोचा कि बंद कर दोबारा चालू कर लेता हूँ, तो बंद किया, लेकिन बंद होते के बाद चालू न हो कर दिया और एरर(error) संदेश टिका दिया स्क्रीन पर कि फोन चालू होने में समस्या है और मुझे रिटेलर(retailer) को संपर्क करना चाहिए। फोन लेकर मैं नोकिआ के उस डीलर(dealer) के पास पहुँचा जिससे फोन पिछले दिसंबर में लिया था, फोन जाँचने के बाद उसने कहा कि पास ही स्थित नोकिआ केयर(nokia care) में ले जाना चाहिए, फोन के सॉफ़्टवेयर में दिक्कत है जिसको वे कुछ ही मिनट में ठीक कर दे देंगे। यानि कि फोन के सिम्बिअन ऑपरेटिंग सिस्टम(symbian operating system) में कुछ लफ़ड़ा हो गया था। शायद मैंने कुछ दिन पहले जो फर्मवेयर अपडेट(firmware update) किया था वह सही से नहीं हुआ था।
बहरहाल, मैं फोन लेकर नोकिआ केयर में पहुँचा तो मुझे वहाँ बोला गया कि मामला कुछ ही मिनट में वे सही कर देंगे लेकिन फोन की मेमोरी में जो है वो सब मिट जाएगा, यानि कि पूरी एड्रेस बुक(address book), एसएमएस संदेश(sms messages), नोट्स(notes) आदि!! मैंने उनसे कहा कि यदि वे बैकअप ले सकते हैं तो कृपया ले लें लेकिन उन्होंने असमर्थता जताई। कोई और चारा न था, सो मैंने कह दिया कि जो कर सकें कर दें। दस मिनट बाद फोन चालू हालत में फर्मवेयर अपडेट के साथ मुझे सौंप दिया गया, बिना किसी डाटा के!! अब एक बात का शुक्र यह था कि लगभग पूरी एड्रेस बुक मेरे सिम कार्ड में भी थी, तो वे नंबर तो वहाँ से कॉपी हो गए, जो नए नंबर हाल ही में पिछले तीन महीनों में डाले थे वे उड़ गए थे!! एसएमएस संदेश और नोट्स का कोई बैकअप नहीं था, इसलिए वे हमेशा के लिए चले गए। नोट्स तो कोई खास नहीं थे लेकिन 200 एसएमएस संदेशों में कुछ काम के थे। सॉफ़्टवेयर आदि भी उड़ गए, लेकिन उनको तो दोबारा डाल लिया।
सबक: अपने फोन में मौजूद डाटा का भी बैकअप लेकर रखें, खासतौर से एड्रेस बुक और एसएमएस संदेशों का। यदि आपके फोन में मेमोरी कार्ड लगता है तो आप फोन मेमोरी का बैकअप वहाँ भी रख सकते हैं, लेकिन मेरा सुझाव है कि इन दोनों(फोन मेमोरी और मेमोरी कार्ड) का बैकअप अपने कंप्यूटर पर भी अवश्य रखें।
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अमरीका जो बन जाए …..
August 3, 2007 · 12 Comments
अमेरिका….. अमेरिका….. ओऽऽ अमेरिका ऽऽऽऽ
जीतू भाई ने इस बार की अनुगूँज में हिस्सा लेते हुए पाँच बातें लिखी हैं कि यदि हिन्दुस्तान अमेरिका बन जाए तो कैसा होगा। कुछ बातें जो उजागर होती हैं:
तो क्या बच्चे आज ऐसे नहीं हैं? बिलकुल हैं, महानगरों में उच्च-मध्यमवर्गीय और उच्च वर्गीय परिवारों में तो क्या, छोटे शहरों में भी ऐसे बच्चे मिल जाएँगे। पहचाना नहीं? ये राज-दुलारे हैं, लाड़ले, ज़रूरत से अधिक लाड़ किए हुए लाड़ले!!
क्या ऐसे बालक आज नहीं हैं? कुछ वर्ष पहले अपने कॉलेज के समय में वहाँ तो ऐसे लोग देखे थे, प्रगति के दर को यदि मद्देनज़र रखा जाए तो क्या इस सब की आज स्कूलों में आशा करना ज़रूरत से अधिक पॉजिटिव थिंकिन्ग है? अब याद आ रहा है कि अपने स्कूल के आखिरी के 2 वर्षों में भी ऐसे उन्नत और मॉडर्न छात्र देखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था मुझे, तो आज तो उनके पद-चिन्हों पर चलने वाले कई होंगे!!
अपनी माताजी से पता करने पर यह तो पक्का हो गया है कि अभी रेट तो इतने ऊपर नहीं पहुँचे हैं, लेकिन अपने सामान्य ज्ञान की बदौलत यह भी पता है कि ऐसे तकनीकी उपकरण भी पीछे नहीं हैं, आज बहुतया घरों में इनकी घुसपैठ हो चुकी है; डिश-वॉशर और वैक्यूम क्लीनर न सही लेकिन वॉशिंग मशीन तो टीवी-फ्रिज की भांति आम बात होती जा रही है।
तो क्या अमेरिका में सिर्फ़ बुराईयाँ ही हैं? अगर नहीं तो लोगों को अच्छाई दिखाई क्यों नहीं दे रही? वैसे ऐसी बात नहीं है कि अच्छाई दिखाई नहीं देती। कुछ समझदार लोगों को दिखाई देती है, जिनके लिए अमेरिका सपनों का देश होता है। क्यों सपनों का देश होता है? वह इसलिए क्योंकि लगभग 3 करोड़ की आबादी वाला संयुक्त राज्य अमेरिका विश्व में तीसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, हर तरह का मौसम है, विश्व में सबसे अधिक जीडीपी(GDP) वाला देश है, उच्च कोटि के विश्वविद्यालय हैं जैसे हारवर्ड, स्टैनफोर्ड, एमाआईटी(MIT) आदि। इतना ही नहीं, न्यू यार्क अमेरिका में है, एम्पायर स्टेट बिल्डिंग न्यू यार्क में है, हॉलीवुड अमेरिका में है, सबसे अधिक टीवी देखने वाले अमेरिकी होते हैं। इन सब खूबियों के कारण अमेरिका एक ड्रीम डेस्टिनेशन है!!
अब ऐसे लेख देख और ऐसे ड्रीम पढ़ तरस आता है अमेरिका पर, पहले ही बुद्धिजीवियों की कमी नहीं है वहाँ, यहाँ से और चले जाएँगे तो क्या होगा?? लेकिन फिर मन स्वार्थी हो जाता है, सोचता है कि चलो अच्छा है, इसी बहाने अपने देश की सफाई तो होगी, हालात सुधरेंगे!!
मैं कभी अमेरिका नहीं गया हूँ, अभी तक जाने का सौभाग्य नहीं प्राप्त हुआ है, लेकिन दोस्तों आदि से इस बात का एहसास मिला है कि अमेरिका में मशीनी मानव बसते हैं, आपस में आत्मीयता नहीं है, रिश्तों में वो गर्माहट नहीं है जो एशियाई देशों में मिलेगी, चाहे वो भाई-बंधुत्व में हो या दुश्मनी में। सुना है कि वहाँ की आबो-हवा ऐसी है कि यदि यहाँ से भी कोई व्यक्ति वहाँ जाए तो एक सप्ताह में ही उसके व्यवहार में अंतर आने लगता है जिसको पीछे रह गए उसके घर वाले और मित्र आदि महसूस कर सकते हैं। होता होगा जी, अपन कभी गए तो फर्स्ट हैन्ड एक्सपीरियंस(first hand experience) बता देंगे। अनुगूँज में इसी के तहत भाग नहीं लिए हैं कि जब जिस जगह के बारे में जानना ही नहीं हुआ है उस बारे में अपने विचार व्यक्त कर काहे खामखा विद्वान बनें!!
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फ़ास्सिस्ट या इम्पीरियलिस्ट …..
August 1, 2007 · 9 Comments
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