दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!

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मेगापिक्सल ही मेगापिक्सल

January 26, 2008 · 5 Comments

कोई अपने 7 मेगापिक्सल (megapixel) के डिजिटल कैमरे से खुश है, कोई 8 मेगापिक्सल (megapixel) के डिजिटल कैमरे से, मैं अपने 10 मेगापिक्सल (megapixel) के डिजिटल कैमरे से खुश हूँ, निकोन (nikon) के नए डीएसएलआर (dslr) 12 मेगापिक्सल (megapixel) के आ रहे हैं। कैनन ने हाल ही में अपना सबसे महंगा डीएसएलआर (dslr), 1डीएस मार्क तीन (1ds-Mark III), निकाला 21 मेगापिक्सल (megapixel) का, जिससे वह हैसलब्लॉड (hasselblad) के बाज़ार में टक्कर ले सके।

लेकिन कोई इस सबसे आगे की सोच बैठा और निकल भी गया!! स्विट्ज़रलैन्ड की एक कंपनी, सीएट्ज़ फोटोटेक्नीक, ने अपना 160 मेगापिक्सल (megapixel) का डिजिटल कैमरा निकाल दिया है!!

जी यह मज़ाक बिलकुल नहीं है, यह कैमरा बाज़ार में उपलब्ध है और 60 बाई 170 मिलिमीटर के आकार की 160 मेगापिक्सल (megapixel) की फोटो ले सकता है, प्रत्येक फोटो का भार 900 मेगाबाइट (megabyte) होगा!! यह कैमरा 48 बिट(rgb) की फोटो लेता है और इसमें आप श्नेडर अथवा रोडेनस्टॉक के लेन्स प्रयोग कर सकते हैं। इसकी फोटो लेने की अधिकतम गति सेकन्ड का दो हज़ारवां भाग प्रति पिक्सल है। :D

यदि आप चाहें तो अपने अड़ोस-पड़ोस में सभी की ईर्ष्या के पात्र बन सकते हैं इस कैमरे को खरीद के, अधिक महँगा भी नहीं है, तकरीबन साढ़े चवालिस हज़ार अमेरिकी डॉलर मात्र का है!! ;) अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें

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डिजिटल कैमरे से सीधे इंटरनेट पर…..

November 2, 2007 · 8 Comments

सन्‌ 1899 में संयुक्त राज्य अमेरिका के पेटेन्ट विभाग के कमिशनर चार्ल्स डुएल द्वारा कहा गया एक कथन इतिहास में अमर हो गया। यह कथन था:

Everything that can be invented has been invented.

जिसका अर्थ हुआ

वह हर चीज़ जिसका अविष्कार हो सकता था उसका अविष्कार हो चुका है।

यही नहीं, मैंने कुछेक जगह यह भी पढ़ा कि उन्होंने अमेरिकी पेटेन्ट ऑफिस को बंद करने का प्रस्ताव भी दिया था क्योंकि उनका मानना था कि ऐसी कोई चीज़ बची ही नहीं जिसका अविष्कार हो सकता हो। इतिहास गवाह है कि उसके बाद मानव सभ्यता को बदल देने की ताकत रखने वाले कितने ही अविष्कार हुए!!

मैं भी एक नई चीज़ की ही बात करने जा रहा हूँ। डिजिटल कैमरों में फोटो और वीडियो आदि को स्टोर करने के लिए मेमोरी कार्ड लगते हैं जो कि अलग-२ प्रकार के आते हैं; एसडी कार्ड(sd card), कॉम्पेक्ट फ्लैश कार्ड(cf card), एक्सडी कार्ड(xd card), एमएमसी कार्ड(mmc card), मेमोरी स्टिक(memory stick), आदि। हर कैमरे में एक ही प्रकार का कार्ड लगता है(सोनी ने अभी कदाचित्‌ एक कैमरा निकाला है जिसमें एक से अधिक प्रकार के कार्ड लग सकेंगे), सबसे अधिक प्रचलित एसडी कार्ड(sd card) और कॉम्पेक्ट फ्लैश कार्ड(cf card) हैं। अभी तक डिजिटल कैमरों से फोटो या तो कंप्यूटर पर लोड कर इंटरनेट पर डाली जाती थी या प्रिंट की जाती थी, या फिर कुछ खास प्रकार के प्रिंटर कुछ खास प्रकार के कैमरों से सीधे जुड़ के प्रिंट निकाल सकते थे। फिर कोडैक ने लगभग डेढ़ वर्ष पहले एक डिजिटल कैमरा निकाला, कोडैक वी610 (Kodak V610), जिसमें आई ब्लूटूथ (bluetooth) टेक्नॉलोजी जिससे कैमरा कंप्यूटर या प्रिंटर या मोबाइल फोन से बेतार का संबन्ध बना फोटो भेज सकता था। कोडैक ने इससे लगभग छह महीने पहले एक अन्य कैमरा निकाला था, कोडैक इज़ीशेयर वन (Kodak Easyshare One), जिसमें बेतार इंटरनेट से कनेक्ट होने की सुविधा थी और जिससे आप कैमरे से सीधे इंटरनेट पर अपनी ऑनलाईन एल्बम में फोटो अपलोड कर सकते थे। हालांकि इस सेवा में थोड़ी दिक्कत थी क्योंकि यह सिर्फ़ कोडैक की अपनी ऑनलाईन फोटो गैलरी पर ही अपलोड कर पाता था, लेकिन फिर भी एक शुरुआत थी। परन्तु यहाँ एक समस्या यह थी कि यदि यह बेतार की सुविधा कैमरे में ही होती थी, और ऐसे कैमरे हर कोई नहीं निकाल रहा था।

Eye-Fi Cardलेकिन अब लगता है कि इसका भी जुगाड़ आ गया है। अब हर कैमरा बेतार इंटरनेट से जुड़ सकता है। क्या वाकई?? शायद!! जुगाड़ है आई-फाई कार्ड (Eye-Fi card) नाम का 2 गीगाबाइट (2GB) की मेमोरी वाला एसडी कार्ड(sd card) है जो कि एक साधारण मेमोरी कार्ड होने के साथ-२ आपके साधारण या उच्च-तकनीक डिजिटल कैमरे को बेतार कंप्यूटर और इंटरनेट से भी जोड़ देगा!! ;) तकरीबन डेढ़ वर्ष की टैस्टिंग के बाद रिलीज़ हुए इस कार्ड का वायरलैस सिस्टम 802.11g और 802.11b तथा पुराने 802.11n नैटवर्क के साथ काम करता है। सिर्फ़ एक बार कार्ड को कंप्यूटर से जोड़ इसमें अपनी ऑनलाईन फोटो एल्बम सेवा जैसे फ्लिकर (Flickr), कोडैक गैलरी (Kodak Gallery), डॉट फोटो (dotphoto), फोटोबकेट (photobucket), पिकासा वेब एल्बम (Picasa Web Albums), शटरफ्लाई (shutterfly), स्मगमग (SmugMug), आदि को सैट कीजिए और उसके बाद कैमरे में कार्ड लगा उसको प्रयोग कीजिए। यदि आपका कैमरा आपके बेतार नैटवर्क की रेंज(तीस फीट) में है तो आप सीधे ही इससे अपने कंप्यूटर पर या वाई-फाई (Wi-Fi) वाले प्रिंटर पर या इंटरनेट पर अपनी फोटो भेज सकते हैं।

अभी फिलहाल यह कार्ड पब्लिक वाई-फाई (Wi-Fi) हॉटस्पॉट के साथ सीधे काम नहीं कर सकता क्योंकि अधिकतर पब्लिक वाई-फाई (Wi-Fi) नैटवर्क बिना लॉगिन(login) किए किसी भी व्यक्ति को नैटवर्क/इंटरनेट प्रयोग करने नहीं देते और यहाँ पर समस्या आती है कि यह कार्ड कैसे ऐसे नैटवर्क से संपर्क बनाए एक साधारण कैमरे के ज़रिए!! लेकिन आशा है कि जल्द ही इसका भी हल ढूँढा जाएगा!! :)

फिलहाल सिर्फ़ संयुक्त राज्य अमेरिका में उपलब्ध यह 2 गीगाबाइट (2GB) की मेमोरी वाला एसडी कार्ड(sd card) सौ अमेरिकी डॉलर (US$100) में उपलब्ध है।

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पाँच इंद्रियों का बाग़ - भाग २

October 16, 2007 · 7 Comments

पिछले भाग से जारी…..

खिलेगा एक दिन यह फूल

तैयार गमले
( इस फोटो को कंप्यूटर पर सेपिआ [sepia] किया गया है )

एक नन्हीं तितली


( इस फोटो को कंप्यूटर पर श्वेत-श्याम [black & white] किया गया है, मूल फोटो यहाँ है )

एक फूल का मैक्रो

इस बाग़ में लिए गए सभी फोटो यहाँ हैं

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पाँच इंद्रियों का बाग़ - भाग १

October 15, 2007 · 8 Comments

बीते दिनों में एक रविवार सुबह संतोष के साथ कुतुब मीनार के पास स्थित पाँच इंद्रियों के बाग़ यानि कि गॉर्डन ऑफ़ फाईव सेन्सेस (garden of five senses) जाना हुआ और वहाँ रंग-बिरंगे फूलों और तितलियों के साथ ही देखने को मिले अमूर्त कला (abstract art) के बढ़िया नमूने।

एक फूल के मध्य का मैक्रो

एक नन्ही तितली

एक टूटा झूला
( इस फोटो को कंप्यूटर पर सेपिआ [sepia] किया गया है, मूल फोटो यहाँ है )

एक ततैया
( इस फोटो को कंप्यूटर पर श्वेत-श्याम किया गया है, मूल फोटो यहाँ है )

एम्फीथियेटर
( बढ़िया सैटिंग में बना हुआ एक एम्फीथियेटर [amphitheater] )

अगले भाग में जारी…..

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मैक्रो के खेल निराले …..

October 10, 2007 · 3 Comments

अभी हाल ही में मैक्रो(macro) तस्वीरों का विचार मन में समाया, कि मैक्रो(macro) पर हाथ आज़माया जाए। कुछेक मैक्रो तस्वीरें ली, लेकिन वो बात नहीं आ रही थी, अपने कैमरे के मैक्रो ऑटोफोकस में मैं सब्जैक्ट के सिर्फ़ पाँच सेन्टीमीटर निकट जा सकता था और ज़ूम बिलकुल नहीं कर सकता था, यह आम मामलों में बहुत अच्छा है लेकिन यदि आप किसी फूल के मध्य भाग का मैक्रो(macro) लेने का प्रयास कर रहे हैं तो दिक्कत है अथवा थोड़ी दूर से किसी चीज़ का फोटो लेने की सोच रहे हैं तब भी दिक्कत आ सकती है। जैसे यह निम्न फोटो मैंने बिना किसी मैक्रो(macro) लेन्स की सहायता के पिछले माह पालमपुर यात्रा के दौरान ली थी।

फूल

इन कामों के लिए होते हैं मैक्रो(macro) लेन्स(lens) जो निकट की वस्तु पर भी फोकस करने देते हैं। हर लेन्स की भांति ये भी एक-एलीमेन्ट और बहु-एलीमेन्ट में आते हैं और बहु-एलीमेन्ट के लेन्स बेहतर और साफ़ फोटो देते हैं। चूंकि मेरा कैमरा डीएसएलआर(dslr) नहीं है इसलिए इसके लिए लेन्स मिलना थोड़ा कठिन, लेकिन आखिरकार क्नॉट प्लेस में स्थिट महाटा एण्ड कंपनी के पास मारूमी(marumi) ब्रांड के (अलग-२ पॉवर के चार)लेन्स का सैट मिला जो कि ढाई हज़ार रूपए का था। लेन्स के हिसाब से देखा जाए तो महंगा नहीं था लेकिन वह एक-एलीमेन्ट के लेन्स का सैट था और मैं उसको सिर्फ़ प्रयोग के लिए लेना चाहता था ताकि यह निश्चय कर सकूं कि कितनी पॉवर का लेन्स मेरे लिए उपयुक्त रहेगा और फिर मैं उतनी पॉवर का बहु-एलीमेन्ट लेन्स अमेरिका से किसी मित्र आदि के हाथ मंगवा सकता हूँ। इससे पहले फोन कर मैंने पता कर लिया था, चांदनी चौक में मदन जी के पास सोनिया ब्रांड का (अलग-२ पॉवर के चार)लेन्स का सैट था जो कि तीन सौ रूपए का था, इसलिए निश्चय किया कि उसी को लिया जाए!! ;)

लगभग एक माह हो गया है मुझे वे लेन्स लाए हुए, उम्मीद से अधिक अच्छे नतीजे मिले हैं इन लेन्सों से। इसी सैट के एक लेन्स की मदद से ली यह निम्न फोटो।

ततैया

यह फोटो कैमरे से ऐसा नहीं आया था!! ;) इसको बाद में कंप्यूटर पर ऐसा करा कि ततैये को रंगीन रहने दिया और बाकी उसके चारो ओर की पत्तियों आदि को श्वेत-श्याम कर दिया। इसकी ओरिजिनल फोटो निम्न है।

ततैया

यह फोटो +4d के मैक्रो(macro) लेन्स की सहायता से ली थी। लेन्स की पॉवर डायोप्टर(diopter) में आंकी जाती है, जितने अधिक डायोप्टर(diopter) उतना अधिक ताकतवर लेन्स, लेकिन इसके साथ यह समस्या भी है कि जितने अधिक डायोप्टर(diopter) का लेन्स होता आपको लेन्स सब्जैक्ट के उतना ही पास रखना होगा। सब्जैक्ट और लेन्स के बीच उचित दूरी क्या हो यह जानने का एक बहुत ही आसान फॉर्मूला है:

दूरी = (1/d * 39.37) इंच

यानि कि यदि आपको लेन्स के डायोप्टर(diopter) पता हैं तो आप एक को डायोप्टर(diopter) से भाग कर 39.37 से उसको गुणा करेंगे तो उचित दूरी इंच में आपको मिल जाएगी जिसको बनाने पर आप कैमरे से आराम से ऑटो-फोकस कर पाएँगे, कम-ज़्यादा होने पर आपको मैनुअल(manual) फोकस का सहारा लेना होगा।

यह एक अन्य फोटो +4d के मैक्रो(macro) लेन्स की सहायता से लिया था।

फूल

मैक्रो(macro) फोटोग्राफ़ी के खेल निराले हैं, इससे आपके कैमरे के लिए एक नई दुनिया खुल जाती है। :)

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बीता एक और साल …..

September 23, 2007 · 17 Comments

मोर पंख
( यह फोटो इस मूल फोटो से पंगे लिए होने का नतीजा है। )

एक बार में एक दिन जीयो; पीछे मुड़ देखकर दुख न करो क्योंकि जो बीत गया सो बीत गया, भविष्य के बारे में सोच चिन्तन न करो क्योंकि वह अभी आया नहीं है। आज को जीयो और उसको इतना अच्छा बनाओ कि वो यादगार बन जाए।

- अज्ञात

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लोमो

September 22, 2007 · 2 Comments

नहीं-२, यह कोई मोमो (momo) जैसा व्यंजन नहीं है जिसको बनाया और खाया। ;) यह दरअसल नाम है रूस के एक कैमरा निर्माता का जो इसी नाम के कैमरे बाज़ार में लगभग पिछले सत्तर वर्षों से निकाल रहा है। शुरुआती दौर में सरकारी रही और 1993 में पब्लिक हुई यह कंपनी कहने को तो रूस की सबसे बड़ी ऑप्टिक निर्माता है लेकिन इसके कैमरे ज़रा अलग तरह के होते हैं। इसके कैमरे बहुत ही घटिया दर्जे के लेन्स प्रयोग करते हैं जिस कारण उनके द्वारा ली गई तस्वीरों में एक अलग बात होती है। इसके द्वारा ली गई तस्वीरें बहुत अच्छी क्या अच्छी भी नहीं आती, विग्नेटिंग दिखाई पड़ती है (यानि कि तस्वीर के बॉर्डर स्पष्ट नहीं होते, काले से होते हैं) और काफ़ी सैचुरेटिड (saturated) होती हैं यानि कि उनमें रंगों के कुछ शेड बहुत तीव्र होते हैं और तस्वीर बीच में से कुछ अधिक ही शॉर्प (sharp) होती है। लोमोग्राफ़ी के ऑस्ट्रियाई संस्थापक 1991 में चेकोस्लोवाकिया (czechoslovakia) की राजधानी प्राग (prague) के दौरे के दौरान लोमो कैमरे से रूबरू हुए और इस कैमरे से निकली धुंधली सी तस्वीरें उनको बहुत भा गई। उन्होंने इस तरह की तस्वीरों को कला के तौर पर बाज़ार में स्थापित किया और फिर लोमो कंपनी से एक करार किया जिसके तहत रूस के बाहर यह ऑस्ट्रियाई कंपनी लोमो कैमरों की एकलौती वितरक बनी।

डिजिटल कैमरों के दौर से पहले फिल्म पर उतारी गई तस्वीरों में अधिक सैचुरेशन (saturation) पाने के लिए क्रॉस प्रोसेसिंग (cross processing) भी की जाती थी जिसके तहत रंगीन स्लाईड फिल्म को उसके लिए बने रसायन घोल E6 में डेवेलप (develop) करने की जगह साधारण फिल्म के रसायन घोल C41 में डेवेलप किया जाता था। इस तरह की तस्वीरों ने जल्द ही एक पंथ (cult) का रूप ले लिया और डिजिटल कैमरों के आने के बाद तो लोमो फोटो के लिए आपके पास लोमो कैमरा होने की भी आवश्यकता नहीं रह गई, आप अपने किसी भी डिजिटल कैमरे से फोटो लेकर कंप्यूटर पर ही उसको लोमो बना सकते हैं।

जैसे यह देखिए मेरे कैमरे द्वारा ली गई असली तस्वीर:

Plain Tiger

और डम्पर के लोमो टूल द्वारा बनाया गया इसका लोमो यह है:

Plain Tiger Butterfly - Lomo 1

स्वयं मैंने पंगेबाज़ी कर यह एक हल्का लोमो बनाया जिसमे सैचुरेशन (saturation) इतना नहीं है:

Plain Tiger Butterfly - Lomo Light

और इसी फोटो में जब सैचुरेशन (saturation) बढ़ा दिया तो यह नतीजा निकला:

Plain Tiger Butterfly - Lomo Saturated

फोटो को लोमो बनाने के बहुत तरीके हैं, यदि सिर्फ़ फोटोशॉप (photoshop) को ही लें तो उसमें भी आप कई अलग-२ तरीकों से लोमो बना सकते हैं। इंटरनेट पर इसके लिए बहुत से ट्यूटोरियल (tutorial) मिल जाएँगे और कोई आवश्यक नहीं कि जैसा उनमें बताया गया है आप बिलकुल वैसा ही करें क्योंकि प्रत्येक फोटो अलग होती है और उसके रंग आदि भी अलग होते हैं। तो आप स्वयं पंगेबाज़ी करके देख सकते हैं और जो नतीजे आपको अच्छे लगें उन्हीं को अपनाएँ, आखिर यह सब सृजनात्मक कार्य है, अपनी क्रिएटिविटी (creativity) को कार्य पर लगाईये और नतीजे देखिए। :)

जो लोग फोटोशॉप (photoshop) जैसे किसी एडिटर (editor) में पंगेबाज़ी नहीं कर सकते या जिनको तुरंत नतीजे चाहिए वे डम्पर के इस लोमो जुगाड़ का भी प्रयोग कर सकते हैं, बस अपनी फोटो अपलोड करिए और उसका लोमो रूप प्राप्त कीजिए!! लोमोग्राफ़ी पर थोड़ा अधिक विस्तार से अंग्रेज़ी में यहाँ पढ़िए

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हमरी फोटू लगी गैलरी मा

September 18, 2007 · 12 Comments

ईयहाँ वहाँ सुनत रहे एकठौ जगह पढ़े भी रहे कि फलां की फोटुओं की फलां गैलरी मा प्रदर्शनी हो रही है, फलां जगह डिसप्ले पर लगी है!! कई बार फोटू बहुत अच्छे होते तो कई बार ऐवईं चलती फिरती चवन्नी छाप फोटू होती कि सोच मा पड़ जाते कि ऐसन लोग जब प्रदर्शनी लगा सकत हैं और लोग-बाग़ देखन भी जात है, एकाध फोटू बिक भी जात(जिस मा प्रदर्शनी वगैरह की लागत लगभग सारी निकल आत है) हैं, तो हम काहे नाही अपनी भी लगा लें!! कोई रोके थोड़े ही है, ठीक ठाक तो हम भी खींच लेत हैं कभी कभार, तो आखिरकार हम भी अपनी प्रदर्शनी लगा लिए। अभी का है कि लगा लिए, लेकिन ऊ का प्रमाण का है? उधर नीरज दद्दा के ब्लॉग पर पढ़े रहे कि परभू राम को भी प्रमाण दे की जरूरत है, हम ठहरे मामूली गरीब आदमी, तो हमार को प्रमाण देई की जरूरत पड़े ही पड़ेगी!! तो प्रमाण हम तैयार कर लिए, प्रदर्शनी को हटाई दिए, ई है ऊ प्रमाण का फोटू जो साबित करे कि हम प्रदर्शनी लगाए थे!!

Gallery Exhibit!

ई फोटू हमहू लिए रहे, ऊ का प्रमाण है ई फोटू:

तो अब तो माने ही पड़ेगा कि हमार फोटू का भी प्रदर्शनी लगा था। ई का लगाए के हमार एकठौ तमन्ना भी पूरी हुई गवा, अब बाकियों का नंबर लगाएँगे!! ;)

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अरे चौंकिए मत, टेन्शन भी मत लीजिए, लेकिन यदि प्रदर्शनी लगाने की मुबारकबाद देना चाहते हैं तो अग्रिम रूप से ले लेंगे, बाद में कभी प्रदर्शनी लगाई तो तब वाले खाते में डाल दी जाएँगी!! कोई प्रदर्शनी वगैरह नहीं लगी मेरी किसी फोटो की, यह सिर्फ़ मज़ाक है। वह तितली की फोटो(दूसरे नंबर वाली) मैंने ही परसों रविवार(16 सितम्बर 2007) को ली है लेकिन वो गैलरी वाली फोटो(पहले नंबर वाली) सरासर नकली है। ;) तितली की इस फोटो को गैलरी में स्थित फ्रेम में एक मुफ़्त ऑनलाईन जुगाड़ के ज़रिए चढ़ाया है। इस जुगाड़ का नाम है डंपर (dumpr) और इस पर ऐसे कई फोकटी जुगाड़ हैं। अपनी पिछली पोस्ट में मैंने हिन्दी ब्लॉगजगत के चार महारथियों का स्कैच बना के दिखाया था, जो कि जुलाई में ली उनकी एक फोटो में कुछ पंगेबाज़ी करके बनाया था, तो कुछ लोगों ने पूछा था कि कैसे बनाया। अब मैंने तो पंगे लेकर उँगली करके किसी तरह बनाया था, इंटरनेट पर ढूँढेंगे तो बहुत ट्यूटोरियल (tutorial) भी मिल जाएँगे, लेकिन हर कोई कदाचित्‌ ऐसे पंगे समयाभाव आदि के कारण न ले पाए इसलिए एक तुरत-फुरत वाला जुगाड़ इस डंपर (dumpr) पर यहाँ उपलब्ध है। इस पर बिलकुल ही स्कैच जैसी बन जाती है फोटो, हर फोटो में शायद वो बात न आए लेकिन फ्री के जुगाड़ के रूप में यह अच्छा है। तो बस इंतज़ार किस बात का, इस पर फोटो अपलोड (upload) करिए या अपने फ़्लिकर (flickr), पिकासा (picasa), माईस्पेस (myspace) अथवा ज़ूमर (zoomr) पर मौजूद फोटो वाले पन्ने का लिंक या फोटो का सीधा लिंक डालिए और फोटो का एक क्लिक में स्कैच बनाईये, डाउनलोड कर अपनी ऑनलाईन फोटो एल्बम/गैलरी पर चढ़ाईये और सबको दिखाईये!! :)

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हमहू भी स्केचियाएँ…..

September 15, 2007 · 14 Comments

जुलाई में जीतू भाई के आगमन पर हुई रेगुलर ब्लॉगर मीट के कुछ लम्हें मैंने यहाँ दिखाए थे। उस दिन ली सभी तस्वीरों में से एक फोटो से मैं कुछ दिन पहले समय मिलने पर पंगे ले रहा था, अलग-२ कुछ प्रयोग से कर रहा था, नतीजन एक बढ़िया सा स्केच बन गया तो आखिरकार आज उसको अपलोड कर दिया अपने फ्लिकर गैलरी में। लीजिए आप भी देखिए और मौज लीजिए। :)

Bloggers' Day Out

( बाएँ से दाएँ - नीरज दादा, जगदीश जी, श्रीश और जीतू भाई )

असली फोटो जिससे पंगे लिए गए वह यहाँ है। इस स्कैच का रंगीन संस्करण यहाँ है

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कुछ लम्हें पालमपुर यात्रा से

September 5, 2007 · 9 Comments

चार महीने हुए जब पिछली बार कहीं घूमने फिरने गया था, मन व्याकुल हो रहा था, तो प्रोग्राम बना पालमपुर जाने का। जी, यह वही पालमपुर है जहाँ जाने का कार्यक्रम जुलाई में मैंने प्रस्तावित किया था लेकिन वह यात्रा उस समय हो नहीं पाई थी!! बहरहाल, उस समय न सही तो अब सही, पिछले सप्ताहांत का कार्यक्रम बना और हम 6 लोग निकल लिए अगस्त के आखिरी दिन की रात्रि को अपनी चौदह घंटे की ड्राईव पर!! ;)

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[ हमारे होटल टी-बड(Tea Bud) से निकलते ही थोड़ा आगे बाज़ार के रास्ते में स्थित पुराना मकान ]

ईसाई कब्रिस्तान - बड़ी तस्वीर के लिए क्लिक करें
[ थोड़ा आगे जाने पर दिखा यह ईसाई कब्रिस्तान ]

मेजर सोमनाथ शर्मा - बड़ी तस्वीर के लिए क्लिक करें
[ परमवीर चक्र से (मरणोपरांत)सम्मानित होने वाले पहले व्यक्ति, मेजर सोमनाथ शर्मा, की मूर्ति। इत्तेफ़ाक की बात है कि परमवीर चक्र के तमगे का डिज़ाइन श्रीमति सावित्री खानोलंकर ने बनाया था जो कि मेजर सोमनाथ शर्मा की सास थीं। ]

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[ क्रिकेट बसा है देश की नस-२ में ]

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[ यह नाम है होटल टी बड के मौजूदा सहायक मैनेजर का, इस नाम ने याद दिलाई फिल्म लगान। :) ]

बैजनाथ मंदिर - बड़ी तस्वीर के लिए क्लिक करें
[ बैजनाथ मंदिर ]

बैजनाथ मंदिर - बड़ी तस्वीर के लिए क्लिक करें
[ बैजनाथ मंदिर ]

गिरगिट - बड़ी तस्वीर के लिए क्लिक करें
[ बैजनाथ मंदिर की पिछली दीवार पर चहलकदमी कर रही थी एक गिरगिट ]

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[ बैजनाथ मंदिर के परिसर में दोपहर का भोजन करता एक बंदर ]

पालमपुर में मौजूद चाय बाग़ान - बड़ी तस्वीर के लिए क्लिक करें
[ अब यूँ ही तो पालमपुर को हिमांचल का दार्जीलिंग नहीं कहते ना!! पालमपुर में मौजूद चाय बाग़ान जहाँ पैदा होती है कांगड़ा चाय। ]

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आनंदपुर साहिब - बड़ी तस्वीर के लिए क्लिक करें
[ वापसी में हम रूके आनंदपुर साहिब जहाँ रात्रि भोज किया लंगर में। ]

पालमपुर कांगड़ा वादी में स्थित एक हरा-भरा शहर है और मानसून के बाद का समय यहाँ जाने के लिए अति उत्तम है जब आपको भरपूर हरियाली देखने को मिलेगी, वैसे यहाँ साल के किसी भी समय जा सकते हैं। रहने के लिए फिलहाल एक ही ठीक-ठाक जुगाड़ है यहाँ, हिमांचल पर्यटन विभाग का होटल टी बड(Tea Bud)। यदि यहाँ जाने का इरादा है तो पहले ही फोन द्वारा हिमांचल पर्यटन विभाग में पता कर लें कि कमरे उपलब्ध हैं कि नहीं। कमरों की उपलब्धता आप एचपीटीडीसी(HPTDC) की वेबसाइट पर भी देख सकते हैं और यदि चाहें तो ऑनलाईन ही भुगतान कर आरक्षण भी करवा सकते हैं। यदि आप शहर की चिल्लपों से दूर एक-दो दिन बिताना चाहते हैं तो पालमपुर जा सकते हैं, वहाँ वाहन में न घूम पैदल घूमिए, हरियाली और स्वच्छ हवा का आनंद लीजिए। लेकिन यदि आप एक पर्यटक हैं तो यह जगह आपके लिए नहीं है क्योंकि देखने लायक इस जगह पर खास कुछ नहीं है।

इस यात्रा की मेरे कैमरे द्वारा ली गई शेष सभी तस्वीरें यहाँ देखी जा सकती हैं।

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