दुनिया मेरी नज़र से - world from my eyes!!

Entries categorized as 'Blogger Meetups'

ब्लॉग - समाज के लिए उनका क्या महत्व है?

February 8, 2008 · 2 Comments

पिछले माह, 12 जनवरी 2008 को, हुई दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society aka DBNMS) द्वारा आयोजित प्रथम ब्लॉगर भेंटवार्ता काफ़ी सफ़ल रही। बहुत से लोगों ने यह भी हमें बताया कि वह भेंटवार्ता उनके लिए काफ़ी ज्ञानवर्धक रही, उनको कई बातों की जानकारी मिली और अन्य ब्लॉगरों से मिलने का अवसर तो मिला ही। दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society) के पीछे एक उद्देश्य यह भी है कि ब्लॉगर भेंट सिर्फ़ चाय-कॉफी और गपशप तक ही न सीमित रहें बल्कि हम ब्लॉगर लोग जब मिलें तो अलग-२ विषयों पर कुछ सार्थक चर्चा भी करें और एक दूसरे से सीखें भी, इसलिए Be Relevant का नारा लगाया गया था। :)

तो इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए इस माह, 14 फरवरी 2008 को, एक और ब्लॉगर भेंटवार्ता आयोजित की जा रही है। यह पिछली बार की तरह लंबा चौड़ा कार्यक्रम न होगा, मात्र दो घंटे का कार्यकरम सांयकाल में होगा जिस पर ब्लॉगों और समाज के लिए उनके महत्व पर चर्चा की जाएगी। सिलसिलेवार जानकारी निम्न है:

चर्चा का विषय: ब्लॉग और समाज के लिए उनका महत्व
स्थान: गुलमोहर हॉल, इंडिया हैबिटाट सैन्टर (India Habitat Center), लोधी रोड, नई दिल्ली
तिथि: 14 फरवरी 2008
समय: सांयकाल 6:30 से 8:30
रूपरेखा: ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों ने विश्व भर में अपनी एक पहचान कायम की है और भारत में भी यह हो रहा है जैसा कि हालिया पिछले समयकाल में विदित हुआ है। अब इसी पर आगे बढ़ते हुए ब्लॉगर/चिट्ठाकार नागरिक पत्रकार(citizen journalists) की अपनी भूमिका निभाने के लिए क्या कर सकते हैं? इसी पर चर्चा की जाएगी एक संवादात्मक सत्र में जिसको निम्न भागों में विभाजित किया गया है:

  1. उन वाकयों के उदाहरण जहाँ ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों के कारण बदलाव आए हैं
  2. पत्रकारिता के श्रेष्ठ सिद्धांत जिनका ब्लॉगर्स/चिट्ठाकारों पालन कर सकें
  3. कैसे ब्लॉगर/चिट्ठाकार इस सब पर एक साथ कार्य कर सकते हैं

आमंत्रित: इस भेंटवार्ता में सभी आमंत्रित हैं, वे भी जो मौजूदा ब्लॉगर/चिट्ठाकार हैं और वे भी जो ब्लॉगर/चिट्ठाकार बनना चाहते हों और वे भी जो ब्लॉग पाठक हैं।

इस भेंटवार्ता और सभा में भाग लेने का कोई शुल्क नहीं है, केवल आपको समय निकाल इसमें पधारना मात्र है और चर्चा में भाग लेना है क्योंकि यह आपकी अपनी भेंटवार्ता है और अपनी चर्चा है।

यदि अपने आने की पुष्टि/कन्फर्मेशन यहाँ टिप्पणी के रूप में दे देंगे तो हम लोगों को भी अंदाज़ा रहेगा कि कितने साथी लोग शिरकत करने वाले हैं। यदि कन्फर्मेशन नहीं भी देंगे तो भी आपका स्वागत है, इस भेंटवार्ता में शिरकत करने और भाग लेने के लिए कन्फर्मेशन देना अनिवार्य नहीं है। :)

तो मिलेंगे 14 फरवरी 2008 को सांयकाल साढ़े छह बजे लोधी रोड(नई दिल्ली) स्थित इंडिया हैबिटाट सैन्टर (India Habitat Center) के गुलमोहर हॉल में। :)

 
अधिक जानकारी के लिए यहाँ देखें
 

Categories: Blogger Meetups · blogging · delhi · india · internet · इंटरनेट · दिल्ली · ब्लॉगिंग · भारत
Tagged: , , , , , , ,

ब्लॉगर भेंटवार्ता टेलीविजन पर …..

February 7, 2008 · 5 Comments

पिछले माह, 12 जनवरी 2008, हुई दिल्ली ब्लॉग एण्ड न्यू मीडिया सोसायटी (Delhi Blog and New Media Society aka DBNMS) द्वारा आयोजित प्रथम ब्लॉगर भेंटवार्ता काफ़ी सफ़ल रही। बहुत से साथी ब्लॉगरों और ब्लॉग इच्छुकों और उत्सुकों ने इसमें भाग लेकर इस भेंट को सफ़ल बनाया। अपने हिन्दी ब्लॉगजगत से भी कई बंधुओं ने शिरकत कर मेरी इस सोच को मज़बूत किया कि ब्लॉगर चाहे कैसा हो और चाहे किसी भी भाषा में लिखता हो परन्तु होता वह ब्लॉगर ही है इसलिए हम इस ब्लॉगजगत में क्षेत्र अथवा भाषा के मापदंड पर बंटवारा नहीं करेंगे। :)

मीडिया में भी इस ब्लॉगर भेंटवार्ता को काफ़ी कवरेज मिली और ब्लॉगजगत तथा ब्लॉगरों के बारे में खबर दूर-२ तक पहुँची। इससे अपेक्षित है कि ब्लॉगिंग का मर्ज़ बहुतों को अपनी चपेट में लेगा। :)

भेंटवार्ता से एक दिन पहले अंग्रेज़ी के हिन्दुस्तान टाइम्स की अनुपूरक पत्रिका एचटी सिटी(HT City) के मुख्यपृष्ठ पर भेंटवार्ता संबन्धित यह लेख छपा था। हालांकि इसमें पत्रकार/लेखिका से एक त्रुटि हो गई और अंत में वेबसाइट के पते में वो delhi लगाना भूल गई, असल वेबसाइट www.delhibloggers.in है। एनडीटीवी (NDTV) ने इस पूरी भेंटवार्ता को कवर किया था और पत्रकार गरिमा दत्त ने एनडीटीवी (NDTV) की वेबसाइट पर भेंटवार्ता के अगले दिन यह लेख छापा। सिर्फ़ छापे वाले मीडिया में ही नहीं, टेलीविजन पर भी इसकी कवरेज दिखाई गई।

एनडीटीवी 24×7 (NDTV 24×7) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई न्यूज़ बाइट

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

एनडीटीवी मेट्रोनेशन (NDTV Metronation) पर दिखाई गई विस्तृत कवरेज

यूट्यूब पर इस वीडियो को यहाँ देखें। वीडियो को FLV रूप में यहाँ डाउनलोड करें

मीडिया में इस कवरेज का लाभ सीधे ही दिखा। जहाँ कई लोग हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले दिन छपे लेख के कारण भेंटवार्ता में आए वहीं कुछ लोग बाद में एनडीटीवी (NDTV) पर इसकी कवरेज देख कर समूह से जुड़े और अपने ब्लॉग बनाए। भेंटवार्ता के अगले ही दिन एनडीटीवी (NDTV) पर प्रसारित बर्खा दत्त के We The People कार्यक्रम का मुद्दा भी ब्लॉग ही थे। मतलब साफ़ है, मीडिया भी अब खुले रूप से ब्लॉगों पर ध्यान दे रहा है, और यह अच्छा भी है क्योंकि इससे जल्द ही यह भ्रम(जो कि बहुत लोग पाले हुए हैं) टूटेगा कि ब्लॉग मुख्यधारा मीडिया की जगह ले सकते हैं, दोनों एक दूसरे के सहायक/पूरक हो सकते हैं लेकिन दोनों की अपनी-२ पहचान और स्थान है।

Categories: Blogger Meetups · blogging · delhi · india · internet · media · इंटरनेट · दिल्ली · ब्लॉगिंग · भारत · मीडिया
Tagged: , , , , , ,

प्रयास….. विस्फोट….. और उत्तर

January 14, 2008 · 4 Comments

इस पोस्ट को लिखने के पीछे न किसी की बेइज़्ज़ती करने का इरादा है और न ही कोई व्यंग्य करने का। साफ़ दिल से यह पोस्ट लिखी है लेकिन यदि किसी को बुरा लगा हो(खासतौर से संजय तिवारी जी जिनका बहुतया उल्लेख है इस पोस्ट में) तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ क्योंकि बुरा लगाने की कोई मंशा न थी और न है।

अभी-२ एक ब्लॉगर सम्मेलन निपटा के फारिग हुआ हूँ। अच्छी खासी तादाद में लोग आए और कार्यक्रम को सफ़ल बनाया। चूँकि मैंने सबके लिए खुला रखने का प्रस्ताव दिया था इसलिए हिन्दी ब्लॉगजगत में भी इसकी खबर फैलाई कि साथी लोग आकर सत्संग का लाभ उठाएँ, कुछ ज्ञान अर्जित करें और कुछ दूसरों को दें, हिन्दी ब्लॉगजगत के बाहर भी जो ब्लॉगजगत है उससे मिलें, अंग्रेज़ी हो चाहे अन्य कोई भाषा, ब्लॉगर तो ब्लॉगर ही होता है ऐसी मेरी सोच है। लेकिन कुछ लोगों को कुछेक बातों से दिक्कत थी। अब दिक्कत खामखा दिक्कत की खातिर या किसी भ्रांति की खातिर यह मैं नहीं जानता; मैं यह मान के चल रहा हूँ कि मिथ्या भ्रांति के चलते दिक्कत थी जिसका माकूल उत्तर मिलने पर वह दूर हो सकती है, इसलिए अपनी ओर से ईमानदार कोशिश करने की खातिर यह सब लिखने का मन बनाया।

विस्फोट वाले संजय तिवारी जी ने पोस्ट दागी और सीधे ही हमें सूली पर टाँग दिया कि भई यह तो गोलमाल हो रहा है, ऐसा गोलमाल कैसे बर्दाश्त किया जाएगा। मत कीजिए प्रभु, गोलमाल बिलकुल बर्दाश्त मत कीजिए। लेकिन गोलमाल हो तभी ना?? पहले हल्के पटाखे के तौर पर पूछा कि आयोजक कैसे कह सकते हैं कि 200-300 ब्लॉगर आएँगे? जनाब यह तो कहा ही नहीं कि सभी ब्लॉगर होंगे, आंगतुकों में ब्लॉगर भी थे और गैर ब्लॉगर भी थे। गैर ब्लॉगरों में वे लोग भी थे जो दल बदलना चाहते हैं और डिफेक्ट होकर ब्लॉगर दल में आना चाहते हैं क्योंकि उनको यहाँ कुर्सी न सही लेकिन हिट मिलने के आसार दिखाई देते हैं, क्या पता निकट भविष्य में सेन्ट और डॉलर की भी बरसात हो जाए, सब बाबा जी की लीला है!! ;) साथ ही गैर ब्लॉगर दल में ऐसे भी थे जिनको स्वयं तो ब्लॉग लिखने में रूचि नहीं लेकिन जो ब्लॉग लिखते हैं उनमें अवश्य रूचि है। अब कोई कमरा बंद मीटिंग तो थी नहीं एक्सक्लूसिव और ब्लॉगर होने का तमगा लिए लोगों के लिए, खुली सभा थी बाबा जी के द्वार की भांति, कोई भी आए माथा टेके और प्रसाद पाए। दूसरे, 200 ब्लॉगर काहे नहीं आ सकते? क्या आपको अंदाज़ा है कि दिल्ली में और राजधानी क्षेत्र(नोएडा, गुड़गाँव और गाज़ियाबाद) में कुल कितने ब्लॉगर हैं? बहुत से आंकड़ों और शिक्षित अनुमान(educated guess) के अनुसार 500 से अधिक हैं, और ध्यान दें कि मैं हिन्दी ब्लॉगरों की बात नहीं कर रहा वरन्‌ सिर्फ़ ब्लॉगरों की बात कर रहा हूँ जिसमें किसी भी तरह की ब्लॉगिंग किसी भी भाषा में करने वाले हैं। ;)

अब इसके आगे अगला (पहले के मुकाबले)तगड़ा पटाखा यह छोड़ा संजय तिवारी जी(संजय भाई नोट करें, पूरा नाम लिखने में कष्ट होता है, पुरानी आदत प्रथम नाम को संबोधित करने की बनी हुई है) ने कि ऐलान कर दिया कि आयोजक तो ऐरे गैरे नत्थू खैरे हैं ही, स्पीकर आदि भी कोई पहचान वाले न लग रिये!! माई बाप, यह तो बताईये कि आप किसके होने की आशा कर रहे थे, अगली बार उनको धर-दबोचने की पूरी कोशिश की जाएगी। वैसे मैं अपने मुँह मिया मिट्ठू नहीं बनता लेकिन मैं ब्लॉगजगत से सन्‌ 1999 से जुड़ा हूँ, बहुत से देशी-विदेशी ब्लॉगरों को जानता हूँ(गिनती मत पूछना जी, वो सन्‌ 2002 में 100 होने के बाद मैंने हिसाब रखना छोड़ दिया था) पर ऐसा सोचने की दिलेरी मैं नहीं दिखा सकता कि मैं सभी को जानता हूँ। खैर हो सकता है तिवारी जी जानते हों, अब मेरे को क्या पता(अन्यथा मत लीजिएगा तिवारी जी आपका मज़ाक कतई नहीं उड़ा रहा, सिर्फ़ अपने को उलझन में पाया था आपका ऐसा कथन पढ़ने के बाद)। वैसे चुहल के लिए ही सही, जनाब क्या आपको पता है कि दुनिया के पहले ब्लॉगर कौन हैं? थोड़ा इसका इतिहास पढ़िए कई रोचक बातें जानने को मिलेंगी। :)

यदि माइक्रोसॉफ़्ट या कोई अन्य कंपनी ऐसे किसी कार्य के लिए प्रायोजक बनती है तो हानि ही क्या है? ऐसा नेक कार्य करने से उनका नाम हो रहा है और हमारा स्वार्थ हल हो रहा है कि इतनी बड़ी सभा हो रही है और किसी साथी को अपनी जेब इसके लिए ढीली नहीं करनी पड़ रही।

अब तिवारी जी के विस्फोटों को यदि देखें तो क्रमवार उन्होंने पाँच विस्फोट किए। :) पहले विस्फोट के तौर पर उन्होंने कहा:

सबसे पहले, निश्चित रूप से इस भेंटवार्ता के पीछे कोई व्यावसायिक नजरिया है. स्पांसरों का खेल है. और जहां व्यावसायिक नजरिया और स्पांसर पहुंच जाते हैं वहां आयोजन हमेशा निमित्त बनकर रह जाते हैं. होता यह है कि आयोजन स्पांसरों के प्रचार के काम में आते हैं.

इस विस्फोट का समर्थन कई साथियों ने किया। ठीक है, कोई गलत बात नहीं है ,यदि मामले की जानकारी मुझे न होती और मैं तिवारी जी की जगह होता तो मैं भी कुछ ऐसा ही सोचता, इसलिए ऐसा सोचने में कोई गड़बड़ नहीं, आखिर जब तक प्रश्न नहीं उठेगा तो उत्तर कैसे आएगा। तो जो लोग इस कार्यक्रम में शरीक हुए थे वे तो गवाह हैं ही, मैं जनाब सिर्फ़ इतना जानने का इच्छुक हूँ कि जिन-२ साहबान ने इस विस्फोट से सहमति जताई थी लगभग सभी के अपने-२ अड्डों पर विज्ञापनों की अच्छी खासी सजावट है। अब ऐसा क्यों है जनाब? यह न समझिए कि प्रश्न का उत्तर प्रश्न से दे रहा हूँ, बल्कि यह मानिए कि इस प्रश्न के उत्तर से ही आपको अपना उत्तर मिलेगा कि स्पॉन्सर क्यों थे। तो जनाब-ए-आली, क्या आपके ब्लॉग पर विज्ञापनों की सजावट का यह निष्कर्ष निकाला जाए कि आप जो लिखते हैं वह प्रायोजक द्वारा प्रभावित होता है और आप सदैव उनका ही गुणगान करते हुए लिखते हैं? नहीं, कम से कम मैं तो यह नहीं समझता कि आप प्रायोजक के प्रभाव में आकर लिखते हैं, यदि मैं गलत हूँ तो कृपया ज्ञान देकर सुधार कर दीजिए। तो जब आप जनाब इतने सारे विज्ञापन होने के बावजूद प्रभावित और प्रायोजित विस्फोट नहीं कर रहे तो मालिक आपने यह कैसे सोच लिया कि एकठो माइक्रोसॉफ़्ट के स्पॉन्सर होने कोई अंटशंट कार्य होगा? वैसे देबू दा ने इस बारे में अपने विचार बता ही दिए थे और मैं भी उनके विचारों से इत्तेफ़ाक रखता हूँ। सिर्फ़ अपना भला सोचने वाले कम्यूनिटी के लिए कुछ नहीं कर सकते। खाओ और मिल बाँट कर खाओ यही सीख मुझे बचपन से मिली है, कभी सिर्फ़ अपना मत सोचो, तो इसी तर्ज पर यदि माइक्रोसॉफ़्ट या कोई अन्य कंपनी ऐसे किसी कार्य के लिए प्रायोजक बनती है तो हानि ही क्या है? उनका नाम हो रहा है कि वे ऐसा नेक कार्य कर रहे हैं और हमारा स्वार्थ हल हो रहा है कि इतनी बड़ी सभा हो रही है और किसी साथी को अपनी जेब इसके लिए ढीली नहीं करनी पड़ रही। नहीं तो ऐसी सभा के आयोजन पर हर साथी की जेब से 300-400 रूपए निकलते तो उसका क्या लाभ था? कितने लोग देते? और जो नहीं देते वो इस सम्मेलन से खामखा वंचित रहते। जबकि स्पॉन्सर होने के कारण उनके सम्मिलित होने की राह से जेब की बाधा हट गई।

दूसरा विस्फोट तिवारी जी ने यह किया कि यह दावा ठोक दिया अपना कि चूंकि माइक्रोसॉफ़्ट स्पॉन्सर है और दूसरी कोई पीआर ऐजेन्सी, इसलिए कोई पंगा है। तिवारी जी के अपने शब्दों में:

इसका एक स्पांसर माइक्रोसाफ्ट है और दूसरा कोई पीआर एजंसी. ब्लागरों की गाढ़ी कमाई को कैसे कैश करना है इसकी योजना इस पीआर एजेंसी ने ही बनाई होगी और माईक्रोसाफ्ट को पटाया होगा यह तय बात है.

साथ ही गाढ़ी कमाई को लूट लेने की सोच का इल्ज़ाम भी!! यह तो बहुत नाइंसाफ़ी है प्रभु!! एक ओर तो हल्ला मचता रहता है हिन्दी ब्लॉगजगत में कि हिट नहीं हैं पाठक नहीं हैं, तो हम सोचे कि भई हिन्दी ब्लॉगिंग अभी शैशव काल में है और बहुत से लोग नए-२ ब्लॉग रोगी हैं जिनको अभी फंडे नहीं पता, इसलिए क्यों न किसी ऐसे बंदे से ज्ञान दिलवाया जाए जो कि ब्लॉग की ही कमाई खाता है ताकि हमारी बिरादरी के लोगों का भी कुछ भला हो उनको भी ज्ञान मिले। और यहाँ तो सीधे हम पर ही चोरी की सोच का इल्ज़ाम लग गया!! ;) और माइक्रोसॉफ़्ट के स्पॉन्सर होने में बुराई क्या है? क्या वो कोढ़ियों की जमात है कि जिनके संपर्क में आते ही सभी कोढ़ी हो जाएँगे? उसकी जगह गूगल स्पॉन्सर होता तो ठीक रहता? अगली बार गूगल को भी पकड़ने की कोशिश करेंगे जनाब, और इस “क्या माइक्रोसॉफ़्ट अछूत है?” पर भी एक पोस्ट दागूँगा अगली फुर्सत मिलते ही जिसमें इसी मुद्दे पर चर्चा करेंगे। इसलिए फिलहाल इस को यहीं छोड़ते हैं, उम्र-ज्ञान-अनुभव में आपसे छोटा हूँ तो कुछ तो छोटे की बात भी मान लीजिए। :)

तीसरा विस्फोट मुझे कुछ समझ तो आया लेकिन कोई अर्थ निकलता न दिखाई दिया। तो तिवारी जी के शब्दों में:

ब्लागर मिलन की शुरूआत ऐसे हुई कि भाई लिखते-पढ़ते तो देख लिया एकाध बार मुंह-दिखाई भी हो जाए. अचानक ही अखबारों आदि में हिन्दी ब्लागरों की पर्याप्त चर्चा हो गयी. जाहिर सी बात है अब आप अपना खून-पसीना बहाकर जो कुछ रचना कर रहे हैं कुछ व्यवसायी मानसिकता के लोग अब उसको कैश कराने की कोशिश करेंगे. उनकी नजर में किसी भी प्रकार के कार्य का यही सफल उपयोग होता है. आखिरकार सबकुछ बाजार जो है.

इस विस्फोट के दो भाग हैं इसलिए अलग-२ ही झेलते हैं दोनों को। पहला छोटा वाला; मिलने और मुँह दिखाने की बात। मानी जनाब आपकी बात, ब्लॉगर भेंटवार्ता का पहला मकसद यही है और अधिकतर ब्लॉगर भेंटवार्ताएँ होती भी इसी मकसद के तहत हैं। लेकिन जनाब, यदि चाय-कॉफी और मुँह दिखाई के आगे बढ़ एक दूसरे से कुछ सीख लिया जाए अथवा साथ मिलकर कुछ कर लिया जाए तो क्या उसमें कोई पाप है? अनैतिक है? अवांछनीय है? अपनी-२ राय हो सकती हैं, मेरी और बहुत से अन्य लोगों की ऐसी राय नहीं है, बाकी जिनकी ऐसी राय है वो भी अपने साथी ही हैं और हर किसी को अपने विचार और अपनी राय कायम करने का पूरा हक़ है और उसकी मैं इज़्ज़त करता हूँ। :)

दूसरा बड़ा विस्फोट इसमें कैश कराने और बाज़ार में बेचने की बाबत है। तो जनाब अपने ब्लॉगों पर विज्ञापन सजाकर ब्लॉगर क्या करता है और? बाज़ार में नहीं बेच रहा? पहली बात तो यह कि हमने ऐसी कोई बात ही नहीं की, दूसरे यह कि कदाचित्‌ आपको पता न हो लेकिन गूगल और अन्य बहुत सी सेवाएँ ऐसे ही चल रही हैं, दूसरे का माल बेच कमा रहे हैं, और कुछेक के साथ ही कमाई बाँट रहे हैं, सब के साथ नहीं। आपको अचम्भा हुआ? यदि हाँ तो स्वागत है इंटरनेट की दुनिया में, यहाँ वाकई एक हाथ दूसरे को धोता है चाहे दूसरा पहले को न धोए!! ;)

फिर चौथा विस्फोट हुआ जो कि दूसरे और तीसरे विस्फोट की प्रतिध्वनि ही लगा जब तिवारी जी ने लिखा:

हो सकता है एक ब्लागर के रूप में आप इस मिलन में शामिल हों और कुछ माले-मुफ्त दावत उड़ाकर संतोष कर लें लेकिन आपको इस बात का कतई अंदाजा नहीं होगा कि आपको पता भी नहीं चलेगा और आपको सरे बाजार बेच दिया जाएगा.

जनाब बिक जाने का पता तो हमको भी नहीं चला। अब दो ही कारण हो सकते हैं कि या तो हमारी आत्मा मर गई है या फिर हम भी मूर्ख हैं जो माल-ए-मुफ़्त दिल-ए-बेरहम टाइप माल उड़ा लिए लेकिन आभास ही न हुआ कि कब बिक गए। पता लगे तो म्हारे को भी बता देना मालिक, बड़ी कृपा होगी।

पाँचवा विस्फोट(अब यही मान के चल रहा हूँ) हुआ तो लेकिन अपने को सिर पैर नहीं पता चला इसका क्योंकि संबन्धित ब्लॉग तथा ब्लॉग पोस्ट कदाचित्‌ मैंने पढ़ी नहीं। तिवारी जी बालक की यह भूल क्षमा करना, प्रयत्न पूरा किया था मैंने समझने का पर पिछले विस्फोट के कारण शंका तो हो ही गई है कि मैं भी मूर्खराज की गद्दी के चुनाव में खड़ा होने योग्य हो सकता हूँ। :)

अंत में संजय तिवारी जी ने आखिरी आतिशबाज़ी यह छोड़ी:

सह-अस्तित्व और परिवार भावना की नींव पर खड़ा ब्लाग समुदाय अगर इस तरह के व्यावसायिक प्रयासों को मान्यता देता है तो हिन्दी ब्लागिंग के स्वभाव को विकृत होने से कोई बचा नहीं सकता.

माई-बाप एक ओर तो आप सह-अस्तित्व की भावना का हवाला दे रहे हैं और दूसरे हाथ पर उसी का पुरज़ोर विरोध भी कर रहे हैं। यह कैसी माया है प्रभु, इस अज्ञानी को भी कुछ ज्ञान दीजिए। :)

दूसरी ओर अनिल रघुराज जी से यह पूछने की गुस्ताखी करूँगा कि संजय तिवारी जी की विस्फोटक पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि इस प्रोफेशनल ब्लॉगर मीट से अचंभित हैं तो दूसरी ओर देबू दा द्वारा इसी मुद्दे पर लिखी पोस्ट पर टिप्पणी देते हुए कहा कि ऐसे ब्लॉगर सम्मेलन उत्साह बढ़ाने वाले हैं!! जनाब यह हृदय परिवर्तन एकाएक? वैसे आपका तहेदिल से शुक्रगुज़ार भी हूँ कि आपने थोड़ा सा ही सही लेकिन विश्वास किया कि मैं इससे जुड़ा हूँ तो थोड़ी गंभीरता नज़र आती है। यकीन मानिए विश्वास करने वाले लोग शुरु में कम ही होते हैं इसलिए कुछ करने से पहले जो विश्वास करते हैं उनका विश्वास अमूल्य होता है। :)

साथ ही एक टिप्पणी स्पैमर से एडसैन्स फ्रॉड बने और अपने को ब्लॉगर कहने वाले एक साहब की पढ़ी थी जिसमें उन्होंने बताया कि उनको घोर आश्चर्य है कि हिन्दी ब्लॉगिंग को बढ़ावा देने वाले सम्मेलन का कार्यक्रम आदि अंग्रेज़ी में लिखा था!! वैसे तो कोई आवश्यक नहीं लेकिन इन साहब की शंका भी दूर किए देते हैं। तो जनाब वो ऐसा है कि “हिन्दी ब्लॉगिंग उत्थान” तो हमने टैगलाईन या मकसद में कहीं लगाया नहीं, हमारा मकसद तो “ब्लॉगिंग उत्थान” है; अब चाहे वह अंग्रेज़ी हो या हिन्दी या तमिल या बंगाली या गुजराती, ब्लॉगिंग तो ब्लॉगिंग ही होती है और ब्लॉगर तो ब्लॉगर ही होता है। अपन खुले दिल के हैं इसलिए ऐसा सोचते हैं। :) और दूसरी बात, अब पता नहीं कि आप आए थे कि नहीं परन्तु हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं की ब्लॉगिंग पर श्री अशोक चक्रधर जी तो हिन्दी में ही बोले थे अंग्रेज़ी में नहीं!! तबियत एकाएक नासाज़ हो जाने के कारण मैं जा नहीं पाया था वर्ना विश्वास कीजिए मैंने भी हिन्दी में ही बोलना था!! ;)

विशेष धन्यवाद रवि रतलामी जी को जिन्होंने इस तरह के आयोजनों के बारे में बता संशक साथी चिट्ठाकारों को ज्ञान दिया। साथ ही ऐसा ही खास वाला धन्यवाद देबू दा को उनकी पोस्ट के लिए। उन सभी लोगों को भी आभार जिन्होंने रत्ती भर भी विश्वास किया। :)

मैंने इस पोस्ट द्वारा पूरी ईमानदारी से उठाए गए प्रश्नों के उत्तर देने की कोशिश की है। अब यह कोशिश कितनी सफ़ल हुई और कितनी असफ़ल इसके निर्णायक तो आप, यानि कि पाठक और साथी ब्लॉगर, ही हैं।

एक बार पुनः कहूँगा, इस पोस्ट को लिखने के पीछे न किसी की बेइज़्ज़ती करने का इरादा है और न ही कोई व्यंग्य करने का। साफ़ दिल से यह पोस्ट लिखी है लेकिन यदि किसी को बुरा लगा हो(खासतौर से संजय तिवारी जी जिनका बहुतया उल्लेख है इस पोस्ट में) तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ क्योंकि बुरा लगाने की कोई मंशा न थी और न है। :)

Categories: Blogger Meetups · blogging · some thoughts · unconference · असम्मेलन · कुछ विचार · ब्लॉगिंग

माफ़ी चाहूँगा…..

January 13, 2008 · 7 Comments

हिन्दी ब्लॉगजगत में सबको निमंत्रण मैंने दिया, पकड़-२ पूछा भी कि आ रहे हो कि नहीं, लेकिन मौके पर मैं ही नहीं पहुँच सका। क्यों? ऐसी मेरी मजाल कैसे हुई?

दक्षिण भारत से भी कुछ लोग आए हुए थे जिनको हिन्दी नहीं आती। ऐसों में एक साहब याहू से भी आए थे जिनको याहू वालों ने कल सुबह बंगलोर से खासतौर पर इसी सभा के लिए उड़ाया था!!

तो हुआ यूँ कि हम आयोजकों को मौका-ए-वारदात पर सुबह तकरीबन दस बजे पहुँचना था(अलग से समोसे उड़ाने नहीं) ताकि सब तामझाम देख लिया जाए कि सब ठीक-ठाक है कि नहीं। अब मैं इसके लिए उठा सुबह छह बजे लेकिन तबीयत कुछ ठीक न लगी इसलिए अपना तापमान नापने का मीटर मुँह में घुसा यह नापा की अपने को तो 102 डिग्री बुखार है। मन ही मन खुंदक चढ़ी कि कमबख्त कल शाम तक तो ठीक-ठाक था एकाएक कैसे हो गया ये गोलमाल!! हो सकता है कि पिछले सप्ताह भर की अत्यधिक भागदौड़ और पिछले दो-तीन दिन से बिना नींद लिए काम करने की थकान के कारण हो गया हो। लेकिन हो गया तो हो गया, कुछ कर नहीं सकते इसलिए वार-फुटिंग पर बाकी साथी आयोजकों को फुनवा लगाए कि भई अपन तो आ नहीं सकेंगे इसलिए अपने आप संभालो और हमारे हिन्दी ब्लॉगजगत से जो बंधु आ रहे हैं उनका ज़िम्मा भी तुम्हीं पर है।

बहुत कोफ़्त भी होती है इस पर लेकिन यह आज का सत्य है कि सभी भारतीयों को हिन्दी नहीं आती। यह कल का सत्य न रहे इसी पर आप और हमको कार्य करना है और यही कदाचित्‌ अपने-२ तरीके से कर भी रहे हैं, हिन्दी को बढ़ावा देकर।

कुछ साथियों ने अपने-२ अड्डों पर आज रपट छाप दी है कि हुआ क्या था वहाँ और मैं न जाने कहाँ नदारद था। साथ ही यह भी कहा कि अंग्रेज़ी का बोलबाला था। तो पहले तो उनसे इस बात की क्षमा चाहूँगा कि उनको अपनत्व नहीं लगा, यकीन मानिए मैं होता तो पूरी कोशिश करता कि पूरा अपनत्व लगे। अभिषेक बक्शी ने जो सत्र लिया वह मैंने और उन्होंने साथ में लेना था और मैंने तो हिन्दी में ही बोलना था, लेकिन उनको श्रेय यह जाता है कि बंदे ने अपने आप मामला संभाल लिया, सुबह उनको भी सूचित कर दिया था कि भई अपना तो बैंड बज गया है इसलिए सिर्फ़ मन से वहाँ मौजूद रहेंगे तन से नहीं। दूसरी बात यह कि मुझे नहीं पता कि अपने बंधु लोग क्या सोच के आए थे लेकिन बंधुओं मैंने यह नहीं कहा था कि यह सिर्फ़ और सिर्फ़ हिन्दी का आयोजन है, यह ब्लॉग सभा थी जिसमें सभी भाषी आमंत्रित थे। कदाचित्‌ अपने हिन्दी ब्लॉगजगत के बंधुओं को न पता हो लेकिन दक्षिण भारत से भी कुछ लोग आए हुए थे जिनको हिन्दी नहीं आती। ऐसों में एक साहब याहू से भी आए थे जिनको याहू वालों ने कल सुबह बंगलोर से खासतौर पर इसी सभा के लिए उड़ाया था!! तो कार्यक्रम अंग्रेज़ी में इसलिए था कि सभी को कुछ न कुछ तो समझ आ ही जाएगा। मानता हूँ और बहुत कोफ़्त भी होती है इस पर लेकिन यह आज का सत्य है कि सभी भारतीयों को हिन्दी नहीं आती। यह कल का सत्य न रहे इसी पर आप और हमको कार्य करना है और यही कदाचित्‌ अपने-२ तरीके से कर भी रहे हैं, हिन्दी को बढ़ावा देकर। और साथी लोगों को अपनत्व की कमी न लगे इसलिए ही श्री अशोक चक्रधर जी का सत्र था। बालेन्दु जी आए इसके लिए उनको भी बहुत धन्यवाद, उनका सत्र भी रखवाते लेकिन उनका आना पहले से तय ना था और आखिर में ही तय हुआ था।

तो हाल-फिलहाल यह था मामला। मैं न आ सका, जानता हूँ यशवंत जी की मेरे से मिलने की तमन्ना थी तो उनसे और बाकी साथियों से माफ़ी चाहूँगा। जल्द ही पुनः मिलने का कार्यक्रम बनाया जाएगा खालिस हिन्दी वालों का, इसलिए टेन्शन नहीं लेने का। :D

रेवाड़ी(हरयाणा) से पधारे शैलेन्द्र यादव जी ने कुछ वीडियो उतारे जो कि यहाँ उपलब्ध हैं। उनको वीडियो उतार सबके साथ बाँटने और इतनी दूर से इस आयोजन में पधारने के लिए बहुत-२ धन्यवाद। :)

 

Categories: Blogger Meetups · blogging · unconference · असम्मेलन · ब्लॉगिंग

क्या आप आ रहे हैं?

January 8, 2008 · 7 Comments

अपनी पिछली पोस्ट में मैंने सभी ब्लॉगर बंधुओं और पाठकों को खुला निमंत्रण दिया था। काहे का? अरे भई आगामी शनिवार 12 जनवरी 2008 को दिल्ली में एक बहुत बड़ी ब्लॉगर भेंटवार्ता हो रही है। बड़े-छोटे प्रसिद्ध-अप्रसिद्ध सभी प्रकार के ब्लॉगर आएँगे, ब्लॉग कंसलटेन्सी, मार्केटिंग आदि कंपनियों और ब्लॉगिंग के विभिन्न आयामों से जुड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि भी आएँगे, मीडिया वाले भी आएँगे। पर महत्वपूर्ण बात है कि आप आएँगे कि नहीं?

क्या आप आ रहे हैं? देखिए आप की के लिए अजय जैन को पकड़े हैं ब्लॉग मार्केटिंग के फंडे बताने के लिए। और पकड़े हैं ब्लॉगवर्क्स.इन वाले प्रसिद्ध ब्लॉगर और मार्केटिंग स्पेशलिस्ट राजेश लालवानी को, साथ में हमहू भी एक प्रस्तुतिकरण करूंगा थोड़े तकनीकी विषय पर और पॉडकास्टिंग फोटोब्लॉगिंग आदि के बारे में बताऊंगा। इतने पर भी बस नहीं है, हिन्दी ब्लॉगर हूँ और हम हिन्दुस्तानी हैं तो उसका भी कुछ होना चाहिए ना? सभी अंग्रेज़ी वाले लोग कैसे चलेंगे, थोड़ा बैलेन्स होना माँगता, नहीं? इसलिए प्रसिद्ध हिन्दी कवि श्री अशोक चक्रधर को भी पकड़ लिए हैं, ऊ हिन्दी ब्लॉगिंग आदि पर बोलेंगे।

अब और का चाहिए आपको? इत्ता सब तो दे रहे हैं। साथ ही चाय नाश्ता आदि भी मिलेगा, और वह भी एकदम मुफ़्त!! :D तो इसलिए आप खुद भी आईये और अपने साथ जितनों को ला सकें(चाहे प्यार मोहब्बत से या फिर जबरन अगवा करके) अवश्य लाईये।

तो मिलेंगे फिर शनिवार को इस शानदार ब्लॉगर भेंटवार्ता में। :)

अधिक जानकारी के लिए और अपना नाम आंगतुकों की सूचि में जोड़ने के लिए यहाँ देखें। दिल्ली ब्लॉगर समूह का सदस्य बनने के लिए यहाँ क्लिक करें

आप आ रहे हैं ना….. ??
 

Categories: Blogger Meetups · blogging · unconference · असम्मेलन · ब्लॉगिंग

निमन्त्रण…..

January 3, 2008 · 2 Comments

पिछली पोस्ट में मैंने समस्या, उसके विश्लेषण और उसके समाधान का ज़िक्र किया और इन सब पर थोड़ा प्रकाश डाला। उसी के तहत, समाधान के तौर पर बन रही वेबसाइट के लांच से पहले नई दिल्ली में हम लोग शनिवार 12 जनवरी 2008 को एक आयोजन कर रहे हैं। इस अवसर पर कई जाने माने ब्लॉगर तो उपस्थित रहेंगे ही, मीडिया की भी दल-बल के साथ कवरेज लेने के लिए शिरकत रहेगी। इसको आप एक बड़ी और व्यव्सथित तरीके से आयोजित की गई ब्लॉगर भेंटवार्ता भी समझ सकते हैं।

आप सभी इस अवसर पर सादर आमंत्रित हैं, खाना-पीना आदि सब हमारे ज़िम्मे आपको बस तशरीफ़ लानी होगी। :) आयोजन के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए और अपनी हाज़िरी लगाने के लिए कृपया यहाँ देखें। इसी अवसर पर दिल्ली ब्लॉगर्स समूह की चौथी वर्षगाँठ भी मनाई जाएगी।

हमें खुशी है कि इस आनंदमय अवसर पर माइक्रोसॉफ़्ट भी हमारे साथ एक प्रायोजक (sponsor) के रूप में है। :)

Categories: Blogger Meetups · blogging · ब्लॉगिंग
Tagged: ,

उड़नतश्तरी से मुलाकात …..

November 22, 2007 · 18 Comments

उड़नतश्तरी, यानि कि समीर जी, दिल्ली में लैन्ड हुए और 13 नवंबर की शाम नीरज दादा के दौलतखाने पर मिलना तय हुआ। आने वालों में कुछ और लोग भी अपेक्षित थे लेकिन व्यस्तताओं और अन्य कारणों से वे नहीं आ पाए। बहरहाल, दादा ने हुक्म दनदनाया कि मैं समय से थोड़ा पहले पहुँच जाऊँ तो बेहतर रहेगा, कुछ इंतज़ामात जो करने थे वो हो जाएँगे। तो समय से पहले तो मैं पहुँच गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ, दादा ने इंडिया टीवी दिखा झिलाने की सोची!! ;) लेकिन अपन भी तैयार होकर निकलते हैं, साथ में एक उपन्यास था जो कि पिछले 4-5 महीनों से मेरे बैग में रह मेरे साथ जगह-२ का सफ़र कर रहा है, अभी आधा ही पढ़ा गया है, तो मैं उसको निकाल पढ़ने लगा और इस तरह समय व्यतीत किया। तत्पश्चात निकले ठेके पर जाने के लिए, आखिर समीर जी आ रहे थे और महफ़िल जमानी थी, तो बिना शराब और कबाब के क्या मज़ा!! लेकिन रास्ते में मेरी मोटरसाइकल नाराज़ हो गई, इग्नीशन चालू न होकर दे। आखिरकार तुक्का लगाया और सेन्ट्रल लॉकिंग वाले रिमोट से चालू हो गई, किसी तरह राम का नाम भजते(दादा ही भज रहे थे, अपन नहीं) ठेके पर पहुँचे, वहाँ समीर जी और दादा के लिए तो व्हिस्की ले ली गई, लेकिन अपने लिए क्या लें यह सोच में पड़ गया क्योंकि ब्रीज़र तो थी नहीं उसके पास। खैर, मैंने सोचा कि खाने के साथ रेड वाइन (red wine) चल जाएगी तो काउंटर पर बैठे व्यक्ति से पूछा कि कौन सी ब्रांड की पोर्ट वाइन (port wine) होगी उनके पास। पहले तो वह मेरी शक्ल देख हैरानी में बैठा रहा कि पता नहीं क्या माँग रहा हूँ उससे, फिर उसके साथ बैठे एक समझदार व्यक्ति ने बताया और वह फिगुएरा की एक बोतल लेकर आया। तत्पश्चात हम लोग दादा के घर आ गए, तो मैंने बोतल देखी और सिर पीट लिया, उसको रेड वाइन (red wine) बोली थी लेकिन उसने व्हाईट वाइन (white wine) दे दी थी। फिर ध्यान आया कि मैंने तो सिर्फ़ “पोर्ट वाइन” देने को कहा था तो उसने पोर्ट वाइन (port wine) दे दी, रेड या व्हाईट तो मैंने बोला ही नहीं था। खैर, अब वापस जाने का मन नहीं था, इसलिए उसी से काम चलाने का निर्णय लिया और उसको ठंडा होने के लिए फ्रीज़र में रख दिया।

कुछ समय बाद समीर जी पधारे। और उसके कुछ समय बाद ही दादा के साथ ऑफिस में काम करने वाला उनका एक मित्र भी आ गया। समीर जी के बारे में जितना अनुमान लगाया था(उनके ब्लॉग आदि को पढ़कर) उससे कहीं अधिक हंसमुख वे निकले। जाम पर जाम और कबाब पर कबाब चलते रहे, और गपशप में समय बीतता रहा। उनके किससे सुनते और हंसी मज़ाक में कई घंटे बीत गए और पता ही नहीं चला। रात्रि के तकरीबन डेढ़-दो बजे समीर जी ने पुनः मिलने का वायदा कर विदा ली।

उड़नतश्तरी वाले समीर लाल

समीर जी की एक बढ़िया सी फोटो खींचने का उनसे वायदा किया था, अब उस समय यही फोटो खींच सका, अच्छी है कि नहीं यह समीर जी स्वयं निर्णय करें। दोबारा मिलेंगे तो इससे अच्छा पोर्ट्रेट उनका लेने का पूरा प्रयास होगा। :)

Categories: Blogger Meetups · mindless rants · photo · फोटो · फ़ालतू बड़बड़
Tagged:

हमहू भी स्केचियाएँ…..

September 15, 2007 · 14 Comments

जुलाई में जीतू भाई के आगमन पर हुई रेगुलर ब्लॉगर मीट के कुछ लम्हें मैंने यहाँ दिखाए थे। उस दिन ली सभी तस्वीरों में से एक फोटो से मैं कुछ दिन पहले समय मिलने पर पंगे ले रहा था, अलग-२ कुछ प्रयोग से कर रहा था, नतीजन एक बढ़िया सा स्केच बन गया तो आखिरकार आज उसको अपलोड कर दिया अपने फ्लिकर गैलरी में। लीजिए आप भी देखिए और मौज लीजिए। :)

Bloggers' Day Out

( बाएँ से दाएँ - नीरज दादा, जगदीश जी, श्रीश और जीतू भाई )

असली फोटो जिससे पंगे लिए गए वह यहाँ है। इस स्कैच का रंगीन संस्करण यहाँ है

Categories: Blogger Meetups · asia · delhi · india · photography · sketch · एशिया · दिल्ली · फोटोग्राफ़ी · भारत · स्कैच

ब्लॉगर मीट फॉर टू

August 30, 2007 · 10 Comments

अब मिश्रा जी तो 27 अगस्त 2007 की ब्लॉगर मीट की घोषणा कर दिए लेकिन डिफॉल्टिंग पार्टी भी वही थे, यानि कि स्वयं ही लेट हुए, एक बजे की जगह मुझे टेलीफोन पर पाँच बजे का समय दिया लेकिन फिर पाँच बजे भी पहुँचने में असमर्थता जताई। यह सुन मैंने सोचा कि चलो बढ़िया है, मैं भी ऑफिस के कार्य में फंसा हुआ था इसलिए मेरा भी आना दिक्कत वाला कार्य लग रहा था, कम से कम मेरे सिर दोष नहीं मढ़ा जाएगा। ;) कोई अन्य भेंटवार्ता स्थल पर पहुँचा होगा इसकी कोई जानकारी नहीं है।

मिश्रा जी के पास अब एक ही दिन और था, परसों यानि कि 28 अगस्त 2007 का, क्योंकि 29 अगस्त की उनकी सुबह एक बजे की वापसी की उड़ान थी। इधर हुआ यूँ कि मिश्रा जी के लैपटॉप की हार्ड-डिस्क नाराज़ हो गई थी, इसलिए उनको वह भी दिखानी थी। अब मुझसे सलाह माँगी तो मैंने अपने कंप्यूटर हार्डवेयर वाले का नंबर और पता दे दिया और कह दिया कि मेरा नाम ले देना। रक्षाबंधन के कारण हार्डवेयर वाले का ऑफिस बंद था, लेकिन भई अब मेरे रेफ़रेन्स से आया था बंदा और मैंने भी फोन कर कह दिया था तो मेरी बात की उसने लाज रख ली और मिश्रा जी के लिए अगले ने आकर ऑफिस खोला। ;) सांयकाल चार बज रहे थे और मिश्रा जी मुझे बराबर रिपोर्ट दे रहे थे, इधर मुझे समय मिल गया तो मैं पहुँच गया हार्डवेयर वाले के ऑफिस। मिश्रा जी की पुरानी हार्ड-डिस्क तो बोल गई थी, नई वाली हार्डवेयर वाले को लेकर आनी थी, तो हमने सोचा कि कहीं चल कुछ भोजन आदि कर लिया जाए और फिर वापसी में हार्डवेयर वाले के घर से मिश्रा जी का लैपटॉप ले लिया जाएगा। तो मिश्रा जी मेरी मोटरसाइकल पर पीछे सवार हो चल दिए।

इरादा तो हमारा जनक पुरी के डिस्ट्रिक्ट सेन्टर वाले बर्कोस(Berco’s) में जाकर चाईनीज़ भोजन करने का था, लेकिन हर जगह इतना ट्रैफिक जाम था कि मानो पूरी दिल्ली के वाहन सड़क पर उतर आए हों। लेकिन ये ट्रैफिक जाम वाहनों की अधिकता के कारण नहीं थे वरन्‌ जगह-२ पुलिस द्वारा लगाए गए मार्ग अवरोधों के कारण थे और उनके बगल में खड़े पुलिस वाले किसी-२ के कागज़ात आदि जाँचते(और रोकड़ा वसूलते) दिखाई दे रहे थे। इस कारण मेरे शॉर्टकट भी काम न आए क्योंकि मुख्य मार्गों पर ट्रैफिक रूका होने के कारण वे भी भरे हुए थे!! इसलिए आखिरकार अपने घर के पास डॉमिनोस(Domino’s) में हम लोग पहुँचे और मिश्रा जी ने प्रसन्नचित्‌ हो पनीर वाला एक पिज़्ज़ा ऑर्डर किया। अब उनसे मैंने पूछा कि ऐसे प्रसन्न होने की क्या बात थी तो वे बोले कि इटली में यदि कहीं बाहर खाने जाते तो दो ही तरह के शाकाहारी पिज़्ज़ा मिलते थे, चीज़ पिज़्ज़ा(cheese pizza) और मशरूम(mushroom) वाला, इसलिए वे ये दो तरह के पिज़्ज़ा खाकर उक्ता गए थे और आखिरकार यहाँ ही उनको अलग तरह का शाकाहारी पिज़्ज़ा मिला। तो पिज़्ज़ा के आने के पहले और खाते समय इधर उधर की बातें हुई। समय बीत रहा था, छह बज गए थे और मिश्रा जी को वापस भी जाना था, नौ बजे हवाई अड्डे के लिए निकलना था, तो इसलिए उनको पहले नई हार्ड-डिस्क लगा उनका लैपटॉप दिलवाया और फिर उनको रोहिणी पूर्व के मेट्रो स्टेशन पर छोड़ मैं वापस हो लिया।

यादगार के तौर पर मिश्रा जी की निम्न तस्वीर ली।

R.C.Mishra

Categories: Blogger Meetups · asia · delhi · india · एशिया · दिल्ली · भारत

रेगुलर ब्लॉगर मीट - कुछ लम्हें …..

July 18, 2007 · 18 Comments

आज की (रेगुलर)ब्लॉगर भेंटवार्ता में जीतू भाई तो खैर आ ही गए, साथ ही श्रीश से भी पहली बार मिलना हुआ। प्रस्तुत हैं उसी भेंटवार्ता से कुछ लम्हें। :)

P1000464
( बाएँ से दाएँ - नीरज दादा, जगदीश जी )

P1000465
( जीतू भाई )

P1000466
( श्रीश )

P1000471
दोपहर का भोजन - सरवण भवन में
( बाएँ से दाएँ - श्रीश, सृजन शिल्पी जी, जगदीश जी )

P1000480
दोपहर के भोजन के पश्चात - कैफ़े कॉफी डे में
( बाएँ से दाएँ - सृजन शिल्पी जी, श्रीश )

दोपहर के भोजन के पश्चात वापस इंडिया कॉफी हाउस(मोहन सिंह प्लेस) गए, वहाँ नोटपैड वाली मैडम जी पहुँच चुकीं थी, गर्मी अधिक थी और काफी हाउस सस्ता बेतकल्लुफ़ी का अड्डा ठहरा जहाँ महँगी एयरकंडीशनिंग नहीं थी(पंखा चले था वही बहुत था), इसलिए उन्हीं के आग्रह पर कैफ़े कॉफी डे की ओर सब रवाना हुए, पहला भरा हुआ मिला, दूसरे में थोड़ी प्रतीक्षा के बाद एक टेबल मिल ही गई, बाजू की टेबल पर समीर जी से मिलती-जुलती शक्ल-सूरत वाले एक साहब बैठे थे, बेचारे इतने ब्लॉगरों को देख पतली गली से कट लिए। ;) थोड़ी देर बाद ही कैफ़े में नीलिमा जी आ गईं।

P1000484
( बाएँ से दाएँ - नोटपैड वाली मैडम जी, नीलिमा जी )

P1000488

P1000489

P1000490

इस भेंटवार्ता सहित अभी तक मैंने जिन ब्लॉगर भेंटवार्ताओं में भाग लिया है उन सभी की तस्वीरें यहाँ हैं।

Categories: Blogger Meetups · asia · delhi · india · एशिया · दिल्ली · भारत