पाँच-छह वर्ष पहले कॉलेज के दौरान मेरे जन्मदिन पर माँ ने मेरा पहला मोबाइल फोन, नोकिआ 3315, और मेरा मोबाइल कनेक्शन नंबर(जो आज भी वही है) मुझे उपहार स्वरूप दिया था। उस समय 3315 ही नोकिआ का सबसे सस्ता फोन उपलब्ध था जो कि चार हज़ार एक सौ रूपए देकर खरीदा था। मोबाइल फोनों के बारे में उस समय जानकारी बिलकुल नहीं थी(आज भी कोई खास नहीं है), फोन के साथ आए मैनुअल (manual) को पढ़कर एक घंटे के अंदर-२ फोन का पूर्ण प्रयोग करना सीखा था। उस समय अपनी मोबाइल ज़िंदगी श्वेत-श्याम ही थी, कुछ महीनों बाद एक क्लाइंट का नोकिआ 7250 फोन देखने को मिला था जिसमें रंगीन स्क्रीन थी, आकार छोटा था लेकिन कीमत (तकरीबन सत्ताईस हज़ार रूपए) बहुत बड़ी थी, वो बात अलग है कि ढाई वर्ष पूर्व 2005 में मैंने उसी का अगला वर्ज़न 7250i तकरीबन आठ हज़ार दो सौ रूपए में ब्रांड न्यू (brand new) लिया था जो आज भी मेरे पास है!! उसके कुछ समय बाद इससे भी महंगे और उच्च तकनीक वाले फोन मॉडलों के बारे में पता चला, इंटरनेट के माध्यम से उनके दर्शन भी किए और उनकी खूबियों के बारे में भी पढ़ा। स्मार्टफोन बाज़ार में थे लेकिन दाम बहुत उँचे थे!! हार्डवेयर के लगातर गिरते दामों को देख यह सांत्वना मन में थी कि कभी दाम इतने गिर जाएँगे कि ये अपने बजट में समा जाएँगे और ऐसा हुआ भी। पिछले वर्ष दिसंबर में जब मैं अपने लिए नया फोन देख रहा था तो नोकिआ एन सीरीज़ (n series) के एन70 म्यूज़िक एडिशन (N70 Music Edition) के कम दाम का पता चला तो उसे खरीद लिया, इस तरह यह मेरा पहला स्मार्ट फोन हुआ, लेकिन अधिकतर लोग जो कि आठ-नौ हज़ार से नीचे का ही बजट रखते हैं उनके लिए अभी भी दिल्ली दूर थी। इधर उन्नत होती तकनीक के कारण स्मार्ट फोन के मॉडलों का बाज़ार में जैसे सैलाब आ रहा हो, ओ२ हो या नोकिआ, मोटोरोला हो या सोनी-एरिक्सन, सभी अपने स्मार्ट फोन मॉडलों के उन्नत रूप कम दाम में बाज़ार में निकाल रहे हैं!! लेकिन ढंग के मॉडलों के दाम अभी भी दस हज़ार से ऊपर ही हैं।

शायद इसी को भांपते हुए पॉम (palm) अपना नया स्मार्टफोन सेन्ट्रो (centro) बाज़ार में सबसे कम कीमत में निकालने जा रहा है। सौ अमेरिकी डॉलर ($100), यानि तकरीबन चार हज़ार रूपए, के इस फोन से पॉम आशा कर रहा है कि वह स्मार्टफोन बाज़ार में मौजूद महंगे प्रतिद्वंद्वियों आईफोन (iPhone) और मोटो क्यू (Moto Q) को तगड़ी टक्कर दे पाएगा। पॉम के अपने ऑपरेटिंग सिस्टम(वर्ज़न 5.4.9) से लैस इस स्मार्टफोन में आम मोबाइल फोन के अतिरिक्त आप ऐम(AIM), एमएसएन(MSN) तथा याहू(Yahoo) चैट की सुविधा तो उठा ही पाएँगे साथ ही अपने जीमेल(Gmail), एओएल(AOL) तथा याहू(Yahoo) ईमेल खातों द्वारा दूसरों के संपर्क में भी रह पाएँगे। ब्लेज़र(Blazer) वेब ब्राउज़र तो इसमें है ही, गूगल मैप भी है। इसमें रेडियो है, एक 1.3 मेगापिक्सल का कैमरा है(वैसे तो कुछ खास नहीं लेकिन कीमत के अनुसार काफ़ी वाजिब है), माइक्रो एसडी कार्ड (micro sd card) द्वारा आप इसकी स्टोरेज क्षमता 4 गीगाबाइट (GB) तक बढ़ा सकते हैं और इसमें टच स्क्रीन (touch screen) भी है। दाम को देखते हुए काफ़ी अच्छी फीचर इसमें पॉम वालों ने दी हैं और फिर चूंकि स्मार्ट फोन है तो पॉम ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए उपलब्ध ढेरों सॉफ़्टवेयर भी इस पर इंस्टॉल हो बहुत सी काम की सुविधाएँ भी प्रदान कर सकते हैं।
फिलहाल तीन महीनों के लिए पॉम का यह सस्ता स्मार्टफोन सिर्फ़ अमेरिकी टेलीकॉम प्रदाता स्प्रिंट (sprint) के ग्राहकों को ही उपलब्ध होगा। कम से कम इस बात से लोगों को राहत होगी कि सेब जैसी मूर्खता न दिखाते हुए पॉम ने यह निर्णय नहीं लिया कि उसका फोन सिर्फ़ एक मोबाइल सेवा प्रदाता के नेटवर्क पर ही कार्य करेगा। इस तरह सस्ते स्मार्टफोन आने के कारण वे लोग भी इसके लाभ उठा पाएँगे जो महंगे स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते। कदाचित् जल्द ही यह भारत में भी उपलब्ध हो जाएगा। देखने वाली बात यह रहेगी कि इस स्मार्टफोन से कितनी जनता स्मार्ट होती है….. मतलब कितने लोग इसको अपनाते हैं!!







अचानक ही एक दिन घूमते-घामते
मैंने सोचा कि पक्का कर लिया जाए और स्पाईसी आइस पर मैंने अपनी
मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और मैंने कहा कि दो दिन पहले तो खुल रही थी, अब क्या फोन में भूत घुस गया। वो मेरे से ऐसे बात कर रहा था कि जैसे कोई समझदार किसी मूढ़ की मूढ़ता पर खीज के बात करता हो, जबकि था इसके ठीक विपरीत, झेल उसे मैं रहा था। मैंने आगे कहा कि उनको अपनी जानकारी अपडेट करनी चाहिए और वह नोकिआ की वेबसाइट खोल के देख ले, यदि वहाँ लिखा है कि नोकिआ 7250i फोन में एक्सएचटीएमएल(xHTML) ब्राउज़र नहीं है तो जो वो बोले वो मन्जूर। ऐसा सुन उसने खीज के कहा कि अपनी जानकारी वो अपडेट कर लेंगे और फिर बात पलटते हुए बोला कि एचटीएमएल(HTML) हो न हो, लेकिन उनके यहाँ से मेरे फोन के लिए एचटीएमएल सपोर्ट नहीं है। मैंने कहा कि उनके यहाँ से सपोर्ट क्या करेगा, दो दिन में बदल गया है क्या, जब दो दिन पहले खुल रही थी तो अब क्यों नहीं खुलेगी। मैंने आगे कहा कि मैं भी एक तकनीकज्ञ हूँ(और कदाचित् उससे अधिक ही समझ रखता हूँ)। कलप के वो बन्दा बोला कि मैं बेशक तकनीकज्ञ रहूँ, दो दिन पहले वेबसाइट खुल रही थी कि नहीं वह अभी नहीं देखा जा सकता, अभी की बात यह है कि मेरे फोन के लिए उनके पास सिर्फ़ वैप की सैटिंग है, क्या वो दोबारा भेजे। मैंने सोचा कि इस मूर्ख से झक मारने का कोई लाभ नहीं है, पता इसको कुछ नहीं है और खामखा अपनी तले जा रहा है। तो मैंने कहा कि भेज दे भई, जो है उसी को भेज दे।
थोड़ी देर में ही सैटिंग आ गई, मैंने फोन में सेव कर फोन बंद कर दोबारा चालू किया और आईडिया वालों की वैप साईट खोली। खुल गई तो फिर मैंने गूगल की आम एचटीएमएल(HTML) वेबसाइट ट्राई मारी और बिना किसी टेन्शन के कुछ मिनट में खुल गई।
आजकल तकनीक काफ़ी तरक्की पर है, कब कौन सा गुल देखने को मिल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी कुछ दिन पहले ऐसे ही अपने सिम्बियन मोबाईल संबन्धी गूगल पर खोज कर रहा था कि यह एक मज़ेदार सॉफ़्टवेयर मिल गया जिसका नाम है मोस्कीटो नेट(mosquito net) यानि कि मच्छरदानी। अब यह सॉफ़्टवेयर मज़ेदार इसलिए नहीं है कि इसका नाम बढ़िया है बल्कि इसलिए है क्योंकि इसका काम रोचक है। यह आपके सिम्बियन फोन को मच्छर भगाने की मशीन बना देता है। कैसे?? बहुत ही सीधा सा वैज्ञानिक फ़न्डा है।
बहरहाल, मैंने अपना पहला सिम्बियन एस60 फोन(नोकिआ एन 70 म्यूज़िक एडिशन) पिछले दिसम्बर में लिया जिसमें याहू गो पहले से डला हुआ आया था। कुछ क्लिक में वह इंस्टॉल हुआ और मैंने पहली बार जब उसे चलाया तो प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाया। याहू मेसेन्जर तो एकदम बढ़िया चल रहा था और ईमेल भी चका-चक चल रही थी। लेकिन एक-दो बार चलाने के बाद मैं उसको कुछ समय तक दोबारा प्रयोग नहीं कर पाया और अब जब हाल ही में कुछ दिन पहले उसे प्रयोग करने की कोशिश की तो उसे मेरा मोबाईल ऑपरेटर पसंद नहीं आया(पिछली बार मैंने दूसरे फोन से चिप निकाल चलाई थी क्योंकि मेरे रेगुलर नंबर पर जीपीआरएस सेवा उपलब्ध नहीं थी)। तो नए वर्जन को ढूँढने की गरज से मैं पहुँचा याहू गो की वेबसाईट पर तो पता चला कि सीमित संख्या में 2.0 गामा वर्जन(यह भी अभी टैस्ट वर्जन है) उपलब्ध है।
अपने मोबाईल पर इसको डाऊनलोड करने के लिए लिंक भिजवाया और बिना किसी दिक्कत के सॉफ़्टवेयर डाऊनलोड हो गया। जावा में बने इस सॉफ़्टवेयर को तुरंत इंस्टॉल कर चालू किया।
पर जिस सेवा की कमी लोगों को सबसे अधिक खलेगी(मुझे भी) वह है चैट सुविधा, जिसको पाने के लिए मैं समझता हूँ अधिकतर लोग(मैं भी) अन्य नगण्य सेवाओं जैसे वित्त समाचार और खेल समाचार आदि का भी त्याग करने को तैयार हो जाएँगे।
लेकिन कुछ लोग कदाचित् सोच रहे होंगे कि गूगल कहाँ गया?? टेन्शन नहीं लेने का, सबसे बड़ा सर्चइन्जन अधिक पीछे नहीं है। अभी हाल ही में गूगल वालों ने भी याहू की तरह अपना पोर्टल बाज़ार में उतार दिया है और थोड़े समय पहले उन्होंने जीमेल के लिए मोबाईल सॉफ़्टवेयर भी निकाला था। बस अपने मोबाईल के ब्राऊज़र में
सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करने के बाद आप उसके द्वारा अपने जीमेल में लॉग-इन कर सकते हैं और जावा में बने इस सॉफ़्टवेयर में जीमेल की पहचान, एक साफ़ सुथरा और हल्का इंटरफेस लोड हो जाएगा जो आपको आपका इन्बॉक्स तो दिखाता ही है साथ ही आपको लेबल आदि द्वारा अपनी ईमेल छांटने भी देता है। ईमेल लिखने वाली स्क्रीन साज-सज्जा की दृष्टि से न्यूनतम है जो आपको तुरत-फुरत ईमेल लिख भेजने देती है। यह सॉफ़्टवेयर एकदम साधारण है, इसमें कोई अधिक साज-सज्जा नहीं है लेकिन एक लाभ यह है कि यह सुस्त नहीं है और अनावश्यक बाइट्स डाऊनलोड नहीं करता जो कि उन लोगों के लिए बहुत आवश्यक है जो जीपीआरएस के लिए प्रति किलोबाइट पैसे देते हैं। वैसे गूगल के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाला यह अनुमान लगा सकता है कि यह सॉफ़्टवेयर भविष्य में अधिक सुविधाओं और फ़ीचर के साथ आएगा और याहू गो जैसा सुईट बन जाएगा, गूगल वाले शुरुआत साधारण करते हैं लेकिन फिर छक्के मारने में पीछे नहीं रहते!! 
