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सस्तेलाल के लिए स्मार्ट फोन

September 29, 2007 · 9 Comments

पाँच-छह वर्ष पहले कॉलेज के दौरान मेरे जन्मदिन पर माँ ने मेरा पहला मोबाइल फोन, नोकिआ 3315, और मेरा मोबाइल कनेक्शन नंबर(जो आज भी वही है) मुझे उपहार स्वरूप दिया था। उस समय 3315 ही नोकिआ का सबसे सस्ता फोन उपलब्ध था जो कि चार हज़ार एक सौ रूपए देकर खरीदा था। मोबाइल फोनों के बारे में उस समय जानकारी बिलकुल नहीं थी(आज भी कोई खास नहीं है), फोन के साथ आए मैनुअल (manual) को पढ़कर एक घंटे के अंदर-२ फोन का पूर्ण प्रयोग करना सीखा था। उस समय अपनी मोबाइल ज़िंदगी श्वेत-श्याम ही थी, कुछ महीनों बाद एक क्लाइंट का नोकिआ 7250 फोन देखने को मिला था जिसमें रंगीन स्क्रीन थी, आकार छोटा था लेकिन कीमत (तकरीबन सत्ताईस हज़ार रूपए) बहुत बड़ी थी, वो बात अलग है कि ढाई वर्ष पूर्व 2005 में मैंने उसी का अगला वर्ज़न 7250i तकरीबन आठ हज़ार दो सौ रूपए में ब्रांड न्यू (brand new) लिया था जो आज भी मेरे पास है!! उसके कुछ समय बाद इससे भी महंगे और उच्च तकनीक वाले फोन मॉडलों के बारे में पता चला, इंटरनेट के माध्यम से उनके दर्शन भी किए और उनकी खूबियों के बारे में भी पढ़ा। स्मार्टफोन बाज़ार में थे लेकिन दाम बहुत उँचे थे!! हार्डवेयर के लगातर गिरते दामों को देख यह सांत्वना मन में थी कि कभी दाम इतने गिर जाएँगे कि ये अपने बजट में समा जाएँगे और ऐसा हुआ भी। पिछले वर्ष दिसंबर में जब मैं अपने लिए नया फोन देख रहा था तो नोकिआ एन सीरीज़ (n series) के एन70 म्यूज़िक एडिशन (N70 Music Edition) के कम दाम का पता चला तो उसे खरीद लिया, इस तरह यह मेरा पहला स्मार्ट फोन हुआ, लेकिन अधिकतर लोग जो कि आठ-नौ हज़ार से नीचे का ही बजट रखते हैं उनके लिए अभी भी दिल्ली दूर थी। इधर उन्नत होती तकनीक के कारण स्मार्ट फोन के मॉडलों का बाज़ार में जैसे सैलाब आ रहा हो, ओ२ हो या नोकिआ, मोटोरोला हो या सोनी-एरिक्सन, सभी अपने स्मार्ट फोन मॉडलों के उन्नत रूप कम दाम में बाज़ार में निकाल रहे हैं!! लेकिन ढंग के मॉडलों के दाम अभी भी दस हज़ार से ऊपर ही हैं।

Palm Centro
शायद इसी को भांपते हुए पॉम (palm) अपना नया स्मार्टफोन सेन्ट्रो (centro) बाज़ार में सबसे कम कीमत में निकालने जा रहा है। सौ अमेरिकी डॉलर ($100), यानि तकरीबन चार हज़ार रूपए, के इस फोन से पॉम आशा कर रहा है कि वह स्मार्टफोन बाज़ार में मौजूद महंगे प्रतिद्वंद्वियों आईफोन (iPhone) और मोटो क्यू (Moto Q) को तगड़ी टक्कर दे पाएगा। पॉम के अपने ऑपरेटिंग सिस्टम(वर्ज़न 5.4.9) से लैस इस स्मार्टफोन में आम मोबाइल फोन के अतिरिक्त आप ऐम(AIM), एमएसएन(MSN) तथा याहू(Yahoo) चैट की सुविधा तो उठा ही पाएँगे साथ ही अपने जीमेल(Gmail), एओएल(AOL) तथा याहू(Yahoo) ईमेल खातों द्वारा दूसरों के संपर्क में भी रह पाएँगे। ब्लेज़र(Blazer) वेब ब्राउज़र तो इसमें है ही, गूगल मैप भी है। इसमें रेडियो है, एक 1.3 मेगापिक्सल का कैमरा है(वैसे तो कुछ खास नहीं लेकिन कीमत के अनुसार काफ़ी वाजिब है), माइक्रो एसडी कार्ड (micro sd card) द्वारा आप इसकी स्टोरेज क्षमता 4 गीगाबाइट (GB) तक बढ़ा सकते हैं और इसमें टच स्क्रीन (touch screen) भी है। दाम को देखते हुए काफ़ी अच्छी फीचर इसमें पॉम वालों ने दी हैं और फिर चूंकि स्मार्ट फोन है तो पॉम ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए उपलब्ध ढेरों सॉफ़्टवेयर भी इस पर इंस्टॉल हो बहुत सी काम की सुविधाएँ भी प्रदान कर सकते हैं।

फिलहाल तीन महीनों के लिए पॉम का यह सस्ता स्मार्टफोन सिर्फ़ अमेरिकी टेलीकॉम प्रदाता स्प्रिंट (sprint) के ग्राहकों को ही उपलब्ध होगा। कम से कम इस बात से लोगों को राहत होगी कि सेब जैसी मूर्खता न दिखाते हुए पॉम ने यह निर्णय नहीं लिया कि उसका फोन सिर्फ़ एक मोबाइल सेवा प्रदाता के नेटवर्क पर ही कार्य करेगा। इस तरह सस्ते स्मार्टफोन आने के कारण वे लोग भी इसके लाभ उठा पाएँगे जो महंगे स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते। कदाचित्‌ जल्द ही यह भारत में भी उपलब्ध हो जाएगा। देखने वाली बात यह रहेगी कि इस स्मार्टफोन से कितनी जनता स्मार्ट होती है….. मतलब कितने लोग इसको अपनाते हैं!! ;)

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मोबाइल पर लिखी हिन्दी …..

September 28, 2007 · 8 Comments

पहले माँग थी कि मोबाइल पर हिन्दी चलनी चाहिए। जब इस वर्ष मई में मैंने मोबाइल फोन पर हिन्दी पाठ दिखा दिया तो उसके बाद मोबाइल फोन पर यूनिकोड हिन्दी में लिखने पर ज़ोर दिया जाने लगा। आज जगदीश जी ने अपने नए नवेले मोबाइल द्वारा जब अपने वर्डप्रैस.कॉम ब्लॉग पर हिन्दी लिख के दिखा दी तो मन बहुत प्रसन्न हुआ कि यह किला भी फतह हुआ। और जब उन्होंने लिखने का तरीका बताया तो मन और भी प्रसन्न हो गया, यह तरीका वही है जो मैंने अपने नोकिआ 7250i मोबाइल फोन पर प्रयोग किया था लेकिन पर्याप्त मेमोरी न होने के कारण उसमें एरर आ गया था और हिन्दी पोस्ट ब्लॉग पर प्रकाशित न हो पाई थी। चूंकि मैं निश्चित नहीं था कि इतने आसान तरीके से हिन्दी लिखी जा सकेगी, मैंने इस बात को तब तक किसी के साथ न बांटने का निश्चय किया जब तक मैं किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच जाता या कोई अन्य इस पर कुछ ठोस करके नहीं दिखाता। ब्लॉग पर पोस्ट नहीं हुई तो क्या हुआ, अभी-२ जगदीश जी को अपने नोकिआ 7250i से हिन्दी में एसएमएस(sms) भेजा और जगदीश जी ने तसदीक की कि उनको मेरे द्वारा हिन्दी में लिखा गया संदेश बिलकुल सही रूप में प्राप्त हुआ है और उनका उत्तर भी हिन्दी में आ गया जिसको मैं मोबाइल पर आराम से पढ़ पाया हूँ। :)

अब यह समझ आता है कि नोकिआ अंग्रेज़ी के अतिरिक्त अन्य भाषाएँ अपने फोन में उपलब्ध करवाने के लिए यूनिकोड का ही प्रयोग करता है, और जिन फोन मॉडलों में हिन्दी का विकल्प होता है उनमें हिन्दी की किसी भी यूनिकोड वेबसाइट को पढ़ा भी जा सकता है और हिन्दी में लिख पोस्ट भी किया जा सकता है। लेकिन मेरे ख्याल से पुराने फोन मॉडलों में मेमोरी का पंगा हो सकता है जैसा मेरे साथ हुआ था। नए फोन मॉडलों में पुराने मॉडलों के मुकाबले अधिक मेमोरी आ रही है इसलिए इनमें यह दिक्कत नहीं आएगी। जैसे जगदीश जी अपने मोबाइल फोन द्वारा पोस्ट करने में कामयाब हुए उसी तरह मुझे लगता है कि सृजनशिल्पी जी भी अपने नोकिआ 5700 एक्सप्रैस म्यूज़िक द्वारा(और वे सभी लोग जिनके नोकिआ मोबाइल फोन में हिन्दी भाषा का विकल्प है) हिन्दी में अपने ब्लॉग आदि पर लिख पोस्ट कर पाएँगे। :) बाकी किसी अन्य कंपनी के मोबाइल फोन के बारे में मैं विचार व्यक्त नहीं कर सकता। यदि कोई नोकिआ के अतिरिक्त किसी अन्य कंपनी का मोबाइल प्रयोग करता हो जिसमें हिन्दी भाषा का विकल्प है तो कृपया वह जाँच कर बताए। :)

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विजेट ही विजेट

August 22, 2007 · 5 Comments


इधर काफी समय हो गया था मोबाइल फोन से पंगे लिए, अभी-२ हाल ही में शायद इसलिए नाराज़ हो गया था!! ;) आज थोड़ा समय मिलने पर ट्विट्टर(twitter) देख रहा था और सोच रहा था कि मेरे लिए इसका क्या उपयोग हो सकता है। एक उपयोग जो दिमाग में आया वह यह था कि कहीं बाहर जाने पर या घूमने-फिरने जाने पर अपने ट्विट्टर को अपडेट किया जा सकता है, कोई अन्य पढ़े या ना पढ़े, अपने रिकॉर्ड के लिए भी यह काम का हो सकता है। लेकिन इसमें एक दिक्कत वाला कार्य यह है कि इसको मोबाइल से अपडेट करने का सरलतम तरीका एसएमएस(sms) द्वारा है और यह ब्रिटेन में बसी सेवा है, यानि कि इसका जो नंबर है(जिस पर मोबाइल से संदेश भेजना होगा) वह भी ब्रिटेन का है, यानि कि हर बार अंतर्राष्ट्रिय एसएमएस लगेगा। अब मेरा रेगुलर मोबाइल कनेक्शन एमटीएनएल(mtnl) का है और पोस्टपेड है, तो एक अंतर्राष्ट्रीय एसएमएस मुझे ढाई रूपए का पड़ता है। इस तरह तो कुछ बार अपडेट करने में मेरी वाट लग जाएगी, जेब में बड़े वाला छेद हो जाएगा, पहले से ही आने वाला कई पन्नों का बिल और बड़ा हो जाएगा!! :( और जिन लोगों का दूसरा कनेक्शन है उसमें तो और अधिक दर होगी अंतर्राष्ट्रीय एसएमएस की, एयरटेल वाले शायद चार रूपए काटते हैं, तो यदि किसी के पास उनका कनेक्शन है और वो इसको ऐसे अपडेट करता है तो उसकी तो और भी ज़्यादा वाट लगेगी!! तो कैसे बचा जाए वाट लगने से?


जब मैंने देखा कि इन लोगों की API भी है तो सोचा किसी न किसी ने सॉफ़्टवेयर, प्लगिन आदि बनाए होंगे इसके लिए। आशा थी कि मोबाइल के लिए भी कोई न कोई सिम्बिअन या जावा का सॉफ़्टवेयर होगा जिससे एसएमएस के पैसे बचेंगे, मोबाइल पर इंटरनेट जितना मर्ज़ी प्रयोग हो उसकी टेन्शन नहीं, क्योंकि मोबाइल पर मेरा असीमित उपयोग(unlimited usage) वाला प्लान है, जितना मर्ज़ी इंटरनेट पेलो, सुबह-शाम रात दिन चौबीसों घंटे!! ;) वैसे भी मैं सोचता रहता हूँ कि किस तरह नियमित उपयोग कर एमटीएनएल वालों से जीपीआरएस(gprs) का साढ़े तीन सौ रूपए माहवार वसूला जाए। तो ढूँढते-२ पहुँच गया विडसैट्स.कॉम(widsets.com) पर। यह जावा में बना एक झकास सा फोकटी सॉफ़्टवेयर है जिसके लिए कई तरह की विजेट उपलब्ध हैं जो तमाम तरह की वेब-सेवाओं(web services) के साथ कार्य कर सकती हैं। इसको कुछ-२ याहू विजेट जैसा समझ सकते हैं मोबाइल के लिए!! वैसे जिन लोगों के जीपीआरएस प्लान असीमित उपयोग वाले नहीं हैं उनको भी टेन्शन लेने की कोई खास आवश्यकता नहीं है, विडसैट्स सेवा आपको डॉटा ट्रान्स्फ़र मीटर(data transfer meter) में यह भी दिखाएगी कि अब तक आपने कितना डॉटा आर-पार किया है, ताकि आपको पता रहे कि कितने पैसे अब तक आप फूँक चुके हो!! ;)


बस फिर क्या था, तुरंत ट्विट्टर और विडसैट्स पर खाते खोले, विडसैट्स को मोबाइल पर डाऊनलोड कर इंस्टॉल कर डाला। विडसैट्स पर रजिस्टर करने के बाद डाऊनलोड के कई विकल्प होते हैं; वे एसएमएस द्वारा आपके लिए लिंक भेज देंगे जिससे आप डाऊनलोड कर सकें, या वो लिंक आपको कंप्यूटर स्क्रीन पर दिखा देंगे ताकि आप मोबाइल पर सीधे ही उसको खोल सकें या फिर कंप्यूटर पर डाऊनलोड कर अपने मोबाइल पर स्थानांतरित भी कर सकते हैं। आप जो भी विजेट विडसैट्स.कॉम पर चुनेंगे उनको अपने मोबाइल पर वहीं से सिंक्रोनाइज़(synchronise) कर सकते हैं और वे अपने आप आपके मोबाइल पर रिफ्रेश हो जाएँगी।


विडसैट्स.कॉम पर (उनके कथन अनुसार)1000 से भी अधिक तरह-२ की विजेट विभिन्न श्रेणियों में उपलब्ध हैं। विकिपीडिया(wikipedia), ईबे(ebay), फोरेका वेदर(foreca weather) द्वारा मौसम की जानकारी, ट्विट्टर(twitter), बीबीसी न्यूज़(bbc news), फ्लिकर(flickr) आदि कई वेब-सेवाओं के विजेट तो हैं ही, खेल आदि के विजेट भी हैं जिनके द्वारा आप खेलकर अपना मनोरंजन या टाइमपास कर सकते हैं। ;) और यदि आपको अपनी पसंद की वेब-सेवा का विजेट नहीं मिलता तो आप उसको विडसैट्स स्टूडियो(widsets studio) में स्वयं बना सकते हैं या पहले से बनी किसी भी विजेट को अपने अनुसार बदल भी सकते हैं। इनमें कई काम की विजेट भी हैं, जैसे ईमेल विजेट(email widget) द्वारा आप अपनी जीमेल और अन्य pop3 और imap ईमेल पढ़ सकते हैं और उनके उत्तर भी दे सकते हैं। ट्विट्टर की तरह ही एक अन्य वेब-सेवा है जाएकू(jaiku) जिसके लिए भी एक विजेट उपलब्ध है जिसके द्वारा जाएकू पर आप अपने मित्रों आदि के जाएकू देख भी सकते हैं और अपने जाएकू पोस्ट भी कर सकते हैं।


तो मैंने भी अपने मोबाइल पर विडसैट्स को इंस्टॉल कर अपने ट्विट्टर पर पोस्ट डाल देख लिया कि यह वाकई काम करता है कि यूं ही खामखा का शोर है। काम तो बकायदा करता है, कोई शक नहीं। :D

जैसा कि कई वेब-सेवाओं आदि में होता है कि आपको एक लिंक थमा देते हैं जिससे आप अपने मित्रों आदि को उस सेवा के बारे में ईमेल द्वारा बता सको, तो कुछ-२ वैसा ही इसमें भी है। इसमें आप किसी भी विजेट को अपने मित्र को भेज सकते हैं। किसी भी विजेट को(जिसे आप भेजना चाहते हैं) सेलेक्ट(select) कीजिए और अपने मित्र का मोबाइल फोन नंबर डालिए और आपके मित्र के पास वह विजेट पहुँच जाएगी जिसको वह इंस्टॉल कर सकता है। यह तरीका खास तौर पर सहयोगी है प्राईवेट चैट(private chat) नामक विजेट के लिए जिसमें आप अपना एक चैटरूम(chatroom) बना उस विजेट को अपने मित्र के पास भेज सकते हैं और फिर दोनों आराम से बात कर सकते हैं। वैसे इस इतना ताम-झाम करने का लाभ तभी है जब आप किसी अन्जान से कुछ बातचीत तुरत-फुरत करना चाहते हों, अन्यथा ये सब तो याहू(yahoo), जीटॉक(gtalk), ऐओएल(aol), आईसीक्यू(icq) जैसे किसी इंस्टेन्ट मैसेन्जर(instant messenger) द्वारा भी हो सकता है।

वैसे कुछ भी हो, इन सोशल नेटवर्किंग(social networking) वेब-सेवाओं के चलते कई नई चीज़ें आ रही हैं, टेक्नॉलोजी का बढ़िया उपयोग हो रहा है और यह सिर्फ़ कंप्यूटर पर ही नहीं, मोबाइल पर भी हो रहा है। तो आप भी इस फ्री के जुगाड़ का लाभ उठाईये और यदि तकनीकी पंगेबाज़ हैं तो कुछ विजेट वगैरह बना डालिए। :)

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बैकअप जो लिया होता …..

August 14, 2007 · 14 Comments

कल मेरे मोबाइल को पता नही क्या हुआ, रेडियो सुनते-२ अचानक अटक गया। मैंने सोचा कि बंद कर दोबारा चालू कर लेता हूँ, तो बंद किया, लेकिन बंद होते के बाद चालू न हो कर दिया और एरर(error) संदेश टिका दिया स्क्रीन पर कि फोन चालू होने में समस्या है और मुझे रिटेलर(retailer) को संपर्क करना चाहिए। फोन लेकर मैं नोकिआ के उस डीलर(dealer) के पास पहुँचा जिससे फोन पिछले दिसंबर में लिया था, फोन जाँचने के बाद उसने कहा कि पास ही स्थित नोकिआ केयर(nokia care) में ले जाना चाहिए, फोन के सॉफ़्टवेयर में दिक्कत है जिसको वे कुछ ही मिनट में ठीक कर दे देंगे। यानि कि फोन के सिम्बिअन ऑपरेटिंग सिस्टम(symbian operating system) में कुछ लफ़ड़ा हो गया था। शायद मैंने कुछ दिन पहले जो फर्मवेयर अपडेट(firmware update) किया था वह सही से नहीं हुआ था।

बहरहाल, मैं फोन लेकर नोकिआ केयर में पहुँचा तो मुझे वहाँ बोला गया कि मामला कुछ ही मिनट में वे सही कर देंगे लेकिन फोन की मेमोरी में जो है वो सब मिट जाएगा, यानि कि पूरी एड्रेस बुक(address book), एसएमएस संदेश(sms messages), नोट्स(notes) आदि!! मैंने उनसे कहा कि यदि वे बैकअप ले सकते हैं तो कृपया ले लें लेकिन उन्होंने असमर्थता जताई। कोई और चारा न था, सो मैंने कह दिया कि जो कर सकें कर दें। दस मिनट बाद फोन चालू हालत में फर्मवेयर अपडेट के साथ मुझे सौंप दिया गया, बिना किसी डाटा के!! अब एक बात का शुक्र यह था कि लगभग पूरी एड्रेस बुक मेरे सिम कार्ड में भी थी, तो वे नंबर तो वहाँ से कॉपी हो गए, जो नए नंबर हाल ही में पिछले तीन महीनों में डाले थे वे उड़ गए थे!! एसएमएस संदेश और नोट्स का कोई बैकअप नहीं था, इसलिए वे हमेशा के लिए चले गए। नोट्स तो कोई खास नहीं थे लेकिन 200 एसएमएस संदेशों में कुछ काम के थे। सॉफ़्टवेयर आदि भी उड़ गए, लेकिन उनको तो दोबारा डाल लिया।

Backup!!

सबक: अपने फोन में मौजूद डाटा का भी बैकअप लेकर रखें, खासतौर से एड्रेस बुक और एसएमएस संदेशों का। यदि आपके फोन में मेमोरी कार्ड लगता है तो आप फोन मेमोरी का बैकअप वहाँ भी रख सकते हैं, लेकिन मेरा सुझाव है कि इन दोनों(फोन मेमोरी और मेमोरी कार्ड) का बैकअप अपने कंप्यूटर पर भी अवश्य रखें।

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चल गई ….. चल गई …..

May 8, 2007 · 8 Comments

अभी हाल ही की अपनी पोस्ट में मैंने अपने मोबाईल(नोकिआ एन 70) पर हिन्दी न चलने की समस्या के बारे में लिखा था। मेरे दूसरे मोबाईल, नोकिआ 7250i, में भी हिन्दी भाषा का विकल्प होने के बावजूद यूनिकोड हिन्दी ब्राउज़र में नहीं दिख रही थी।

Spicy Ice blog on Nokia 7250i अचानक ही एक दिन घूमते-घामते ऑपरा मिनी की वेबसाइट पर पहुँच गया। यह जावा में लिखा ऑपरा का मोबाईल के लिए फोकट वाला ब्राउज़र है, अन्यथा इसका रेगुलर ब्राउज़र फोकट नहीं है। जब देखा कि ऑपरा मिनी मेरे नोकिआ 7250i के लिए भी उपलब्ध है तो तुरंत इसको मोबाईल पर डाऊनलोड कर इंस्टॉल किया। सब हो चुकने के बाद मैंने सोचा कि इसमें भी ट्राई मार लिया जाए। मैंने स्पाईसी आइस ब्लॉग खोला और आश्चर्य, घोर आश्चर्य, जीतू भाई की टुन्डेनवाब वाली पोस्ट एकदम मस्त तरीके से दिखाई दे रही थी!!! Spicy Ice blog on Nokia 7250i मैंने सोचा कि पक्का कर लिया जाए और स्पाईसी आइस पर मैंने अपनी चाईनीज़ खाने वाली पोस्ट खोल कर देखी तो चित्र सहित वह एकदम सही दिखाई दे रही थी, कहीं कोई टूटा-फ़ूटा यूनिकोड नहीं दिखाई दे रहा था। पढ़ रहे हैं ना मिश्रा जी?? हिन्दी या तो बिलकुल नहीं दिखाई देती और यदि दिखाई देती है तो एकदम टनाटन!! ई है नोकिआ….. ई है नोकिआ….. ई है नोकिआ मेरी ऽऽऽ जान!! ;) :D

संजय भाई ने टिप्पणी में कहा था कि मोबाइल पर हिन्दी तभी दिखाई देगी जब मोबाइल पर आने से पहले मोबाइल कंपनी के वेबसर्वर पर यूनिकोड का मोबाइल वाले हिन्दी फोन्ट में परिवर्तन हो जाएगा। अब यह बात कितनी सही है यह मैं नहीं जानता, इस बारे में मेरा ज्ञान अधिक नहीं है, पंकज भाई ने भी अपनी टिप्पणी में संजय भाई की बात का समर्थन करते हुए कहा कि उनके टी-मोबाइल कनेक्शन में हिन्दी सही नहीं दिखाई देती क्योंकि टी-मोबाइल के यहाँ उसकी ऐसी-तैसी फिर जाती है। यह सब ध्यान में आते ही मैंने सोचा कि यदि ऐसा है तो मेरे एन 70 में काहे हिन्दी नहीं दिखाई दे रही जबकि 7250i में एकदम चकाचक दिख रही है। कनेक्शन भी मैं अदल-बदल देख चुका हूँ, जिससे यह तो साबित हो ही जाता है कि आइडिया और महानगर टेलीफोन निगम, दोनो ही के यहाँ यूनिकोड सपोर्ट है। और तो और, आइडिया वाला कनेक्शन तो मैं अपने कंप्यूटर से मोबाइल जोड़ कर भी चला चुका हूँ और परिचर्चा, नारद जैसी सभी वेबसाइट एकदम मस्त खुलती हैं। तो इसका अर्थ यही है कि गड़बड़ कहीं और नहीं वरन्‌ मोबाइल फोन की है। अपने 7250i के नोकिआ वाले ब्राउज़र में मैंने हिन्दी वेबसाइट खोल देखी तो मुझे अभी भी बक्से ही दिखाई दिए, यानि कि उसमें हिन्दी नहीं दिख रही, लेकिन वही वेबसाइट ऑपरा मिनी में खोलने पर एकदम बढ़िया दिखाई देती है। यानि कि ब्राउज़र का भी पंगा है, क्योंकि मैंने एन 70 पर भी ऑपरा मिनी डाल कर देखा लेकिन उसमें बात नहीं बनी। :(

तो अपने इन अनुभवों से मैं यह निष्कर्ष निकाल सकता हूँ:

  1. मोबाइल पर हिन्दी देखने के लिए सबसे पहली आवश्यकता यह है कि आपके मोबाइल में हिन्दी भाषा का विकल्प हो।
  2. ब्राउज़र यूनिकोड को सपोर्ट करने वाला होना चाहिए।

यदि ब्राउज़र यूनिकोड वाला नहीं भी डला हुआ आता है तो उसका समाधान ऑपरा मिनी डाल कर किया जा सकता है यदि आपके फोन में जावा सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल हो सकता है तो।

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मूर्ख समझदार ??!!

May 3, 2007 · 8 Comments

क्या मेरा अनुभव ही ऐसा रहा है या वाकई में कॉल सेन्टर वाले और तकनीकी सपोर्ट वाले सभी लगभग मूर्ख होते हैं? कुछ सप्ताह पूर्व मैंने किसी पत्रिका में महानगर टेलीफोन निगम का विज्ञापन देखा था कि उनके जिन मोबाइल सेवा ग्राहकों ने जीपीआरएस सुविधा ले रखी है उनको एज्ज(EDGE) सेवा पर मुफ़्त अपग्रेड किया जाएगा। तो पहले तो मैं इस बारे में कुछ खास उत्साहित नहीं था क्योंकि मुझे लगा कि मेरे नोकिआ एन70 में यह तकनीक है ही नहीं, बेशक महानगर टेलीफोन निगम यह सुविधा प्रदान करने वाली भारत में पहली कंपनी होती। लेकिन कुछ दिन पहले मैंने नोकिआ की वेबसाइट पर देखा कि नोकिआ एन70 म्यूज़िक एडिशन(Nokia N70 Music Edition) में यह तकनीक है और मेरा फोन भी यही है, तो मैंने महानगर टेलीफोन निगम के कॉलसेन्टर में फोन लगाया यह पूछने के लिए कि यह सुविधा अपने आप चालू होती है या करवानी पड़ती है।

( कॉलसेन्टर में फोन लगते ही बेकार संगीत सुनाई देता है, अब तक मुझे भी रट चुका मेनू को पूरा सुने बिना हिन्दी भाषा और ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करने का विकल्प चुना। )
( आपकी कॉल कतार में है….. प्रतीक्षा समय 35 सेकन्ड…..
प्रतीक्षा करते हुए 2 मिनट बीतते हैं
4 मिनट…..
5 मिनट…..
आखिरकार बन्दा लाइन पर आता है
)
अधिकारी: नमस्कार, मैं पोजिशन नंबर दस से बोल रहा हूँ, आपकी क्या सहायता कर सकता हूँ?
मैं: मुझे आपकी एज्ज सर्विस के बारे में पूछना है। क्या वह अपने आप चालू हो जाती है या करवानी पड़ती है?
अधिकारी: जी एज्ज?
मैं: हाँ, E-D-G-E, एज्ज।
( फोन काट दिया जाता है )

( आश्चर्य, मैं चार गालियाँ देता हूँ उस अधिकारी को और फिर फोन मिलाता हूँ )

( पुनः बेकार संगीत सुनाई देता है, मेनू को पूरा सुने बिना हिन्दी भाषा और ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करने का विकल्प चुना। )
( आपकी कॉल कतार में है….. प्रतीक्षा समय 50 सेकन्ड…..
प्रतीक्षा करते हुए 4 मिनट बीतते हैं
5 मिनट…..
8 मिनट…..
आखिरकार एक मोहतरमा लाइन पर आती हैं
)
अधिकारी: नमस्कार, मैं पोजिशन नंबर पैंतालीस से बोल रही हूँ, आपकी क्या सहायता कर सकती हूँ?
मैं: मुझे आपकी एज्ज सर्विस के बारे में पूछना है। क्या वह अपने आप चालू हो जाती है या करवानी पड़ती है?
अधिकारी: जी क्या?
मैं: एज्ज सुविधा, E-D-G-E, एज्ज। जैसे जीपीआएस होता है वैसे एज्ज होता है।
अधिकारी: हाँ जी बोलिए?
मैं: यह सुविधा क्या अपने आप चालू हो जाती है या करवानी पड़ती है?
( फोन पुनः काट दिया जाता है )

( आश्चर्य, मैं चार गालियाँ इसको भी देता हूँ और फिर फोन मिलाता हूँ )

( इस बार मेनू में अंग्रेज़ी भाषा और ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करने का विकल्प चुना। )
( युअर कॉल इज इन क्यू….. युअर वेट टाईम इज 20 सेकन्ड…..
प्रतीक्षा करते हुए 2 मिनट बीतते हैं
4 मिनट…..
7 मिनट…..
9 मिनट…..
आखिरकार बन्दा लाइन पर आता है
)
अधिकारी: हैलो, आई एम XXX फ्राम पोजिशन नंबर थर्टी टू। हाऊ में आई हेल्प यू?
मैं: आई वांट टू नो अबाउट युअर एज्ज सर्विस। डू यू नो अबाउट एज्ज?
अधिकारी: येस सर?
मैं: इज दिस सर्विस एक्टिवेटिड बाई यू ऑटोमैटिकली और डू आई हैव टू आस्क फॉर इट?
अधिकारी: सर दिस सर्विस इज नॉट अवेलेबल येट।
मैं: बट आई रैड अबाउट दिस सर्विस इन एन ऐड ऑफ़ युअर्स एंड इट सैड दैट फॉर मोर इन्फोरमेशन आई नीड टू कॉन्टेक्ट कस्टमर केअर।
अधिकारी: यस सर बट दिस सर्विस हैज़ नॉट बीन स्टार्टिड यैट। वी ऑल्सो हैव नॉट गॉट मोर इन्फोरमेशन अबाउट इट येट।
मैं: ओके, थैंक्स।
अधिकारी: थैंक यू फॉर कॉलिंग कस्टमर केअर सर, हैव अ गुड डे।
( फोन इस बार मैंने बात समाप्त कर काटा )

इस सारे प्रकरण में मैंने चार बार हिन्दी का विकल्प लिया(यहाँ केवल दो बार के बारे में ही लिखा है), कई मिनट होल्ड करने के पश्चात फोन उठाया गया और हर बार मेरा फोन काट दिया गया। पाँचवीं बार अंग्रेज़ी का विकल्प लिया और उस बार के ग्राहक सेवा अधिकारी को वो बात मुझे बताने में केवल एक मिनट लगा जो बाकी चार के पल्ले ही नहीं पड़ी। उन चार में से तीन को तो यही नहीं पता था कि जीपीआरएस कौन सी सेवा है(तो यदि उसमें कोई समस्या होती तो क्या खाक सपोर्ट देते)।

बहरहाल यहाँ तक तो ठीक है, अज्ञान और बद्‍तमीज़ी का मामला है(ग्राहक की पूरी बात सुने बिना फोन काट देना और क्या है?), लेकिन आज एक ऐसा वाक्या हुआ जिसमें मेरा पाला एक मूर्ख से हुआ जो अपने को बहुत समझदार बन रहा था।

पिछले दो दिन से मेरे दूसरे फोन(जिसमें आईडिया का कनेक्शन है) में जीपीआरएस में दिक्कत थी, कोई वेबसाइट खुल नहीं रही थी। तो इसके लिए मैंने कल आईडिया केअर में फोन कर अपनी समस्या बताई। उन्होंने मेरे फोन आदि के बारे में जानकारी लेकर कहा कि मेरी समस्या नोट कर ली है, जल्द ही उनका कोई तकनीकी बन्दा मेरे को फोन करेगा। आज सुबह आईडिया वालों का फोन आया, बन्दे ने मेरे से मेरे फोन का मॉडल आदि कन्फ़र्म किया और फिर पूछा कि मैं कौन सी वेबसाइट खोलने की कोशिश कर रहा हूँ। मैंने कहा कि कोई भी वेबसाइट नहीं खुल रही, न ही गूगल न कोई और। तो उसने कहा कि मेरा फोन आम एचटीएमएल(HTML) वाली वेबसाइट नहीं खोल सकता, सिर्फ़ वैप(WAP) वाली खोल सकता हूँ।

HTML website of Google on Nokia 7250i मुझे बहुत आश्चर्य हुआ और मैंने कहा कि दो दिन पहले तो खुल रही थी, अब क्या फोन में भूत घुस गया। वो मेरे से ऐसे बात कर रहा था कि जैसे कोई समझदार किसी मूढ़ की मूढ़ता पर खीज के बात करता हो, जबकि था इसके ठीक विपरीत, झेल उसे मैं रहा था। मैंने आगे कहा कि उनको अपनी जानकारी अपडेट करनी चाहिए और वह नोकिआ की वेबसाइट खोल के देख ले, यदि वहाँ लिखा है कि नोकिआ 7250i फोन में एक्सएचटीएमएल(xHTML) ब्राउज़र नहीं है तो जो वो बोले वो मन्जूर। ऐसा सुन उसने खीज के कहा कि अपनी जानकारी वो अपडेट कर लेंगे और फिर बात पलटते हुए बोला कि एचटीएमएल(HTML) हो न हो, लेकिन उनके यहाँ से मेरे फोन के लिए एचटीएमएल सपोर्ट नहीं है। मैंने कहा कि उनके यहाँ से सपोर्ट क्या करेगा, दो दिन में बदल गया है क्या, जब दो दिन पहले खुल रही थी तो अब क्यों नहीं खुलेगी। मैंने आगे कहा कि मैं भी एक तकनीकज्ञ हूँ(और कदाचित्‌ उससे अधिक ही समझ रखता हूँ)। कलप के वो बन्दा बोला कि मैं बेशक तकनीकज्ञ रहूँ, दो दिन पहले वेबसाइट खुल रही थी कि नहीं वह अभी नहीं देखा जा सकता, अभी की बात यह है कि मेरे फोन के लिए उनके पास सिर्फ़ वैप की सैटिंग है, क्या वो दोबारा भेजे। मैंने सोचा कि इस मूर्ख से झक मारने का कोई लाभ नहीं है, पता इसको कुछ नहीं है और खामखा अपनी तले जा रहा है। तो मैंने कहा कि भेज दे भई, जो है उसी को भेज दे।

HTML website of Google on Nokia 7250iथोड़ी देर में ही सैटिंग आ गई, मैंने फोन में सेव कर फोन बंद कर दोबारा चालू किया और आईडिया वालों की वैप साईट खोली। खुल गई तो फिर मैंने गूगल की आम एचटीएमएल(HTML) वेबसाइट ट्राई मारी और बिना किसी टेन्शन के कुछ मिनट में खुल गई।

अब उस मूढ़ पर खुन्नस इतनी आ रही थी कि यदि सामने होता तो दस गालियाँ सुना उससे पूछता कि ये वेबसाइट अब कैसे खुल गई!! यह अभी कोई नया अनुभव नहीं है, पहले भी अधिकतर अलग-२ कंपनियों के झल्ले कॉल सेन्टर वालों और मूढ़ तकनीकी सपोर्ट वालों से पाला पड़ चुका है। कॉल सेन्टर वालों की तो छोड़ो खैर, अधिकतर वहाँ अर्ध-शिक्षित युवा क्विक मनी(जल्दी पैसे कमाने) के लिए भर्ती होते हैं, लेकिन तकनीकी सपोर्ट वालों का यह हाल देख बहुत कोफ़्त होती है, ये लोग आईटी इंडस्ट्री का कबाड़ हैं जिनको इस इंडस्ट्री में रहने का कोई अधिकार नहीं!!!

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अब मोबाईल से भगाएँ मच्छर

April 19, 2007 · 9 Comments

आजकल तकनीक काफ़ी तरक्की पर है, कब कौन सा गुल देखने को मिल जाए कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी कुछ दिन पहले ऐसे ही अपने सिम्बियन मोबाईल संबन्धी गूगल पर खोज कर रहा था कि यह एक मज़ेदार सॉफ़्टवेयर मिल गया जिसका नाम है मोस्कीटो नेट(mosquito net) यानि कि मच्छरदानी। अब यह सॉफ़्टवेयर मज़ेदार इसलिए नहीं है कि इसका नाम बढ़िया है बल्कि इसलिए है क्योंकि इसका काम रोचक है। यह आपके सिम्बियन फोन को मच्छर भगाने की मशीन बना देता है। कैसे?? बहुत ही सीधा सा वैज्ञानिक फ़न्डा है।

ड्रेगन फ़्लाई और चमगादड़ मच्छरों के पैदाईशी शत्रु होते हैं। यह सॉफ़्टवेयर फोन के स्पीकर द्वारा दोनों ही की अल्ट्रासोनिक ध्वनि निकाल सकता है जिसे सुन मच्छर भाग खड़े होते हैं। इतना ही नहीं, यह सॉफ़्टवेयर नर मच्छर की भी ध्वनि निकाल सकता है। अब आप कदाचित्‌ पूछें कि नर मच्छर की ध्वनि से क्या लाभ? तो(सॉफ़्टवेयर की वेबसाइट के अनुसार) बात ये है कि यह नर मच्छर की 12.3 किलो हर्ड़्ज पर ध्वनि निकालता है। ऐसी ध्वनी नर मच्छर मादा को आकर्षित करने के लिए निकालते हैं। नर के साथ संसर्ग द्वारा गर्भवती होने के बाद यह ध्वनि मादा को बहुत अप्रिय हो जाती है। और यह वैज्ञानिक सिद्धांत है कि खून गर्भवती मादा मच्छर ही पीती है। तो इस ध्वनि को सुनने से खून पीने वाली मादा मच्छर आसपास नर मच्छर की उपस्थिति जान दूर भागेगी, यानि कि किला फ़तह!!! :D

सॉफ़्टवेयर की वेबसाइट पर मौजूद इसके प्रयोगकर्ताओं के अनुभव अनुसार यह तीसरा तरीका वाकई कारगर है। तो फिर सोच क्या रहे हैं, यदि आपके पास सिम्बियन फोन है तो धूप-बत्ती आदि का प्रयोग बंद कर अपने नथुनों को राहत दीजिए और इस सॉफ़्टवेयर से लाभ उठाईये। अधिक जानकारी के लिए सॉफ़्टवेयर की वेबसाइट यहाँ देखें। :)

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फैलता हुआ युद्धक्षेत्र

April 10, 2007 · 16 Comments

इंटरनेट पर सबसे अधिक प्रयोग होने वाला पोर्टल बनने की होड़ में सबसे आगे हैं तीन महारथी; याहू, गूगल और एमएसएन। अभी तक इनका युद्धक्षेत्र कंप्यूटरों तक ही सीमित था परन्तु नित नई तकनीक वाले मोबाईल फोनों के बाज़ार में उतरने और प्रयोगकर्ताओं के मोबाईल सेवाओं के प्रति जागृत होने से अब इस युद्धक्षेत्र का दायरा बढ़ रहा है और अब युद्ध मोबाईल फोनों पर भी होगा।

तकरीबन एक वर्ष पहले याहू ने Y!Go(याहू गो) बाज़ार में उतारा, इसका मोबाईल सॉफ़्टवेयर एकदम मुफ़्त और उसमें उसने ईमेल, चैट आदि सेवाएँ उपलब्ध करा लोगों को याहू सेवाएँ उनके मोबाईल फोन पर ही दे डालीं। अब यह सॉफ़्टवेयर बीटा में था, लोगों की इसके प्रति मिली-जुली प्रतिक्रिया थी, लेकिन कुछ तो अपनी विकृत मानसिकता के चलते खामखा इसके पीछे पड़ गए, सॉफ़्टवेयर की गलतियाँ कम गिनाई उसके निर्माताओं की अधिक। :roll:

Y!Go की पहली स्क्रीन बहरहाल, मैंने अपना पहला सिम्बियन एस60 फोन(नोकिआ एन 70 म्यूज़िक एडिशन) पिछले दिसम्बर में लिया जिसमें याहू गो पहले से डला हुआ आया था। कुछ क्लिक में वह इंस्टॉल हुआ और मैंने पहली बार जब उसे चलाया तो प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाया। याहू मेसेन्जर तो एकदम बढ़िया चल रहा था और ईमेल भी चका-चक चल रही थी। लेकिन एक-दो बार चलाने के बाद मैं उसको कुछ समय तक दोबारा प्रयोग नहीं कर पाया और अब जब हाल ही में कुछ दिन पहले उसे प्रयोग करने की कोशिश की तो उसे मेरा मोबाईल ऑपरेटर पसंद नहीं आया(पिछली बार मैंने दूसरे फोन से चिप निकाल चलाई थी क्योंकि मेरे रेगुलर नंबर पर जीपीआरएस सेवा उपलब्ध नहीं थी)। तो नए वर्जन को ढूँढने की गरज से मैं पहुँचा याहू गो की वेबसाईट पर तो पता चला कि सीमित संख्या में 2.0 गामा वर्जन(यह भी अभी टैस्ट वर्जन है) उपलब्ध है। Y!Go पर दिखता नई दिल्ली का मौजूदा तापमान अपने मोबाईल पर इसको डाऊनलोड करने के लिए लिंक भिजवाया और बिना किसी दिक्कत के सॉफ़्टवेयर डाऊनलोड हो गया। जावा में बने इस सॉफ़्टवेयर को तुरंत इंस्टॉल कर चालू किया।

चालू होते ही इसने जीपीआरएस का एक्सेस प्वायंट चुनने को कहा और उसके बाद यह पूर्ण रूप से लोड हो गया। पहली नज़र में ही इसके इंटरफेस ने प्रभावित किया, इसमें अलग-२ सेवाओं को चुनने के लिए स्क्रीन पर नीचे एक पट्टी नज़र आती है जिसमें दाएँ-बाएँ स्क्रॉल कर अलग-२ सेवाओं को चुना जा सकता है। अभी याहू गो में सर्च, ईमेल, मौसम, खेल समाचार, वित्त समाचार, नक्शे, समाचार, मनोरंजन की सेवाएँ हैं। साथ ही इसमें प्रसिद्ध फ़्लिकर सेवा को भी जोड़ दिया है। Y!Go पर दिखते खेल समाचार पर जिस सेवा की कमी लोगों को सबसे अधिक खलेगी(मुझे भी) वह है चैट सुविधा, जिसको पाने के लिए मैं समझता हूँ अधिकतर लोग(मैं भी) अन्य नगण्य सेवाओं जैसे वित्त समाचार और खेल समाचार आदि का भी त्याग करने को तैयार हो जाएँगे। ;) इसकी ईमेल सुविधा साधारण है लेकिन कंप्यूटर से दूर आवश्यक ईमेल पढ़ने और उनका उत्तर आदि देने के लिए बहुत अच्छी है, खासतौर से जब आप यात्रा कर रहे हैं। खेल और अन्य समाचार आपको दीन-दुनिया से बेखबर नहीं होने देंगे चाहे आप कहीं भी हों(यदि आपका मोबाईल नेटवर्क पकड़ रहा है तो)। और तो और, यदि आपने अपने मोबाईल फोन के कैमरे से कोई फोटो खींची है तो उसे भी तुरंत आप अपने फ़्लिकर पर डाल सकते हैं और अपनी पिछली तस्वीरों पर लोगों द्वारा छोड़ी गई टिप्पणियाँ आदि भी देख सकते हैं। चूंकि यह सेवा और सॉफ़्टवेयर अभी टैस्टिंग के दौर से गुजर रहे हैं, मैं समझता हूँ कि आने वाले समय में इनमें और अधिक सुधार आएगा।

मोबाईल पर जीमेल का इन्बॉक्स लेकिन कुछ लोग कदाचित्‌ सोच रहे होंगे कि गूगल कहाँ गया?? टेन्शन नहीं लेने का, सबसे बड़ा सर्चइन्जन अधिक पीछे नहीं है। अभी हाल ही में गूगल वालों ने भी याहू की तरह अपना पोर्टल बाज़ार में उतार दिया है और थोड़े समय पहले उन्होंने जीमेल के लिए मोबाईल सॉफ़्टवेयर भी निकाला था। बस अपने मोबाईल के ब्राऊज़र में gmail.com/app पते पर जाएँ और यदि आपके मोबाईल को गूगल सपोर्ट करता है तो आपको सॉफ़्टवेयर डाऊनलोड करने दिया जाएगा। Gmail app's options सॉफ़्टवेयर इंस्टॉल करने के बाद आप उसके द्वारा अपने जीमेल में लॉग-इन कर सकते हैं और जावा में बने इस सॉफ़्टवेयर में जीमेल की पहचान, एक साफ़ सुथरा और हल्का इंटरफेस लोड हो जाएगा जो आपको आपका इन्बॉक्स तो दिखाता ही है साथ ही आपको लेबल आदि द्वारा अपनी ईमेल छांटने भी देता है। ईमेल लिखने वाली स्क्रीन साज-सज्जा की दृष्टि से न्यूनतम है जो आपको तुरत-फुरत ईमेल लिख भेजने देती है। यह सॉफ़्टवेयर एकदम साधारण है, इसमें कोई अधिक साज-सज्जा नहीं है लेकिन एक लाभ यह है कि यह सुस्त नहीं है और अनावश्यक बाइट्स डाऊनलोड नहीं करता जो कि उन लोगों के लिए बहुत आवश्यक है जो जीपीआरएस के लिए प्रति किलोबाइट पैसे देते हैं। वैसे गूगल के बारे में थोड़ी बहुत जानकारी रखने वाला यह अनुमान लगा सकता है कि यह सॉफ़्टवेयर भविष्य में अधिक सुविधाओं और फ़ीचर के साथ आएगा और याहू गो जैसा सुईट बन जाएगा, गूगल वाले शुरुआत साधारण करते हैं लेकिन फिर छक्के मारने में पीछे नहीं रहते!! ;) लेकिन एक दिक्कत जो अपने हिन्दी चिट्ठाकारों को आएगी वह यह कि हिन्दी में लिखी गई ईमेल कदाचित्‌ नहीं पढ़ पाएँगे क्योंकि यह मोबाईल और उस पर डले ऑपरेटिंग सिस्टम पर निर्भर करता है कि वह यूनिकोड दिखाएगा कि नहीं। फिलहाल मेरा सिम्बियन एस60 द्वितीय वर्जन वाला मोबाईल यूनिकोड हिन्दी नहीं दिखाता।

एमएसएन को अभी इस फैलते युद्धक्षेत्र में कदम रखना है। जितना मुझे पता है उसके अनुसार अभी वह विन्डोज़ मोबाइल तक ही सीमित है परन्तु यदि उसे जीतने के लिए खेलना है तो एक से अधिक प्लेटफ़ॉर्म सपोर्ट करने होंगे जिनमें सिम्बियन को नज़रांदाज़ करना उसके लिए हानिकारक होगा। वैसे कुछ भी हो, इस मुकाबले को कोई भी जीते,उपभोगता तो सदैव ही विजेता रहेगा, प्रतियोगिता ज़िन्दाबाद!! :D

(इस लेख को अंग्रेज़ी में यहाँ पढ़ें)

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