दोषहीन, निपुण, अद्वितीय प्रेमी!!

अब भई, अल्का ने मुझे टैग कर अपना शिकार बनाया है तो हर्जाने के रूप में मुझे भी उनके विषय “निपुण प्रेमी”(perfect lover) पर अपनी राय व्यक्त करनी है कि मेरे अनुसार मेरी निपुण अथवा अद्वितीय प्रेमिका कैसी हो, अथवा यूँ कहें कि मेरे मन में क्या छवि है एक आदर्श प्रेमिका की। इस खेल के कुछ नियम हैं जो मुझे अल्का द्वारा ही पता चले, और वे हैं:

  • टैग हुए शिकार को अपने निपुण प्रेमी के बारे में आठ बातें बतानी हैं।
  • अपने प्रेमी का लिंग बताना है।
  • आठ शिकार चुनने हैं जो कि इस खेल को आगे बढ़ाएँ और उनके ब्लॉग आदि पर टिप्पणी दर्ज कर उन्हे इस बात से अवगत कराना है।
  • यदि आपका दूसरी बार शिकार हुआ है(यानि कि आपको दूसरी बार टैग किया गया है) तो दोबारा खेलने की कोई आवश्यकता नहीं है।

हाँ तो विषय पर दोबारा आते हुए, मैं यही कहूँगा कि आज तक मैंने कभी इस पर विचार नहीं किया, मतलब कि कभी एकाध बार विचार अवश्य किया लेकिन अधिक तवज्जो न दी इस विषय पर क्योंकि इससे अधिक महत्वपूर्ण बहुत सी बातें रहीं हैं ध्यान देने के लिए, प्यार-मोहब्बत-इश्क आदि की ओर इसलिए कभी ध्यान ही नहीं दिया, और वैसे भी, अभी कौन सा बुढ़ापा आ गया है, अभी तो मात्र बाईस बसंत देखे हैं, सारी उम्र पड़ी है चोंच लड़ाने के लिए!! 😉

बहरहाल, अल्का ने कदाचित सोचा कि वे मुझे फ़ांस लेंगी इस विषय पर, परन्तु शायद वे यह नहीं जानती कि मेरी कल्पनाशक्ति की उड़ान अत्यधिक तीव्र है जिसकी पराकाष्ठा का स्वयं मुझे ज्ञान नहीं है, इसलिए मैं बहुत कुछ सोच सकता हूँ, अब क्या कहूँ(अधिक “अपने मुँह मिया-मिट्ठु” तो नहीं बन सकता न)। परन्तु हिन्दी से कई वर्ष परे रहने का दुष्परिणाम यह है कि मुझे अंग्रेज़ी में तो शब्द ज्ञात हैं परन्तु उनके समानार्थ शब्द हिन्दी में नहीं मिल रहे(लगता है अंग्रेज़ी से हिन्दी शब्दकोष लेना ही पड़ेगा)। खैर, तो ज्यादा बकवास न करके, शुरू करते हैं अपनी कल्पना की उड़ान!! मेरा प्रयत्न होगा कि अपनी आशाओं को यथार्थवादी ही रखूँ, उन्हें कल्पना की चोटियों तक न उड़ने दूँ कि वे विश्वसनीयता की सीमाओं को ही लांघ जाएँ!! 😉

तो मेरी प्रेमिका स्त्रीलिंग होगी, क्योंकि नवाबी शौक तो भई मैं रखता नहीं!! 😉

तो किसी विशेष क्रम में नहीं, मेरे अनुसार, मेरी प्रेमिका में निम्न विशेषताएँ होनी चाहिए:

  1. प्रथम विशेषता तो उसमें यह होनी चाहिए कि उसे एक अच्छा मनुष्य होना चाहिए, जब वह मनुष्यता की न्यूनतम मापदण्ड पर नहीं खरी उतर सकती तो वह एक मनुष्य की अच्छी प्रेमिका कैसे होगी? भई हम सबसे पहले मनुष्य हैं, तदोपरान्त कुछ और, तो यदि हम मनुष्यता के मापदण्ड पर खरे नहीं उतर सकते तो कुछ और कैसे हो सकते हैं?
  2. उसकी रूचियाँ आदि मुझसे विपरीत होनी चाहिए, अंग्रेज़ी में कहावत है “ओपोज़िट्स अट्रैक्ट”(opposites attract) अर्थात विपरीत बिन्दु एक दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं, और जहाँ तक मैंने जाना है, वास्तविक जीवन में भी ऐसा होता है। कोई आवश्यक नहीं कि ऐसा हो, अखिरकार जीवन किसी मापदण्ड पर स्थिर नहीं है, परन्तु मैं यही चाहता हूँ कि मेरी प्रेमिका मुझसे भिन्न होनी चाहिए, क्योंकि मैं अपने जैसे एक और व्यक्ति को बर्दाश्त नहीं कर सकता, अपने को कर लेता हूँ, वही पर्याप्त है!!
  3. उसे सुन्दर होना चाहिए, केवल तन से ही नहीं अपितु मन से भी, किसी नकचढ़ी को कोई क्योंकर पसन्द करेगा, और मैं तो कदापि नहीं करूँगा क्योंकि ऐसे लोग तो मुझे कतई सहन नहीं होते।
  4. उसमें अधिक नहीं तो सामान्य स्तर की बुद्धि की अपेक्षा है, अगर आपने ब्लाँड्स पर चुटकले सुनें हैं तो आप समझ जाएँगे कि मैं ऐसा क्यों कह रहा हूँ, अंग्रेज़ी में कहा जाता है “ब्यूटी एण्ड ब्रेन्स, अ रेअर कांबिनेशन”(beauty and brains, a rare combination) अर्थात सौन्दर्य और बुद्धि का मेल दुर्लभ होता है। किन्तु मेरे इस नज़रिए को लैंगिकवाद का मुद्दा न बनाएँ, मैं लैंगिकवादी नहीं हूँ, क्योंकि वैसे यह नज़रिया लड़कों पर भी लागू हो सकता है, परन्तु अमूमन यह लड़कियों के बारे में अधिक कहा जाता है(अच्छा ठीक है, मैं क्रोध महसूस कर सकता हूँ इसलिए आगे इस पर नहीं कहूँगा)!! और जिन्होनें वे चुटकले न सुने न पढ़े हैं, अर्थात जो उनके बारे में नहीं जानते, उनका इस तर्क के बारे में जानना आवश्यक भी नहीं है!! 😉
  5. उसे अनुराग़ी भी होना चाहिए, भई यदि प्रेमी-प्रेमिका में अनुराग़ न हो फ़िर वे प्रेमी-प्रेमिका ही कैसे!! मैंने अपनी अभी तक की लघु जीवन यात्रा में यह भी देखा है कि कई बार प्रेमी प्रेमिका के बीच सब कुछ होता है सिवाय अनुराग़ के, तो ऐसा मैं नहीं चाहता!!
  6. मेरी प्रेमिका ऐसी होनी चाहिए कि वह दूसरों के(खासतौर से मेरे) सभी तर्कसंगत निर्णयों का आदर करे, उसमें आत्मसम्मान तो होना चाहिए परन्तु दूसरों के सम्मान का भी ध्यान रखना चाहिए।
  7. स्वत्वबोधक होना मैं समझता हूँ कि कोई बुरी बात नहीं है यदि एक सीमा में रहा जाए। अति हर चीज़ की बुरी होती है, इसलिए उसे यह ज्ञात हो कि कहाँ पर अति हो जाती है।
  8. यदि आपस में कुछ मन मुटाव हो जाता है तो मुँह फुला के एक कोने में बैठ कर मेरे मनाने की प्रतीक्षा न करे, ताली दो हाथों से बजती है, तो यह कहीं से तर्क संगत नहीं कि झगड़ा होने पर मैं ही मनाऊँ!! पर मैं यह नहीं कहता कि उसे मुझसे लड़ना या रूठना ही नहीं चाहिए, यह दो चीज़े अनुराग़ की ही भांति प्रेम जीवन के लिए अनिवार्य हैं।
  9. विषाद की शिकार अथवा नकारात्मक रवैया रखने वाले लोगों से मुझे चिढ़ है, इसलिए मैं ऐसा अपनी प्रेमिका में भी नहीं चाहता।
  10. कहते हैं कि यदि एक झूठ से किसी का जीवन बचता है तो वह झूठ अनेक सत्यों से ऊपर है, और यह भी कहा जाता है कि सत्य जानना सदैव हितकारी नहीं होता। तो जहाँ मैं यह चाहता हूँ कि उसे मुझे अपना मित्र जानकर राज़दार बनाना चाहिए और झूठ को हमारे बीच नहीं लाना चाहिए, वहीं मैं यह भी चाहता हूँ कि उसे इतनी समझ होनी चाहिए कि कब कहाँ क्या बोला जाता है, यानि कि न तो सदैव असत्य अथवा सत्य बोलना चाहिए, और न ही कान का कच्चा होना चाहिए कि कोई बात पेट में पचा ही न सके(यह भी एक खूबी है जो अमूमन स्त्रियों में नहीं पाई जाती)।
  11. हालांकि मैं स्वत्वबोध का अर्थ जानता हूँ, परन्तु मैं यह चाहता हूँ जब तक वो मेरी प्रेमिका है, तब तक केवल मैं ही उसका प्रेमी रहूँ, क्योंकि इस मामले में मैं मिल बाँट कर खाने में विश्वास नहीं रखता!! 😉

मेरा अनुमान है कि अब कुछ अति ही हो गई है, आठ की जगह ग्यारह बातें बता दीं, परन्तु मेरा मानना है कि “परफ़ैक्ट” जैसी कोई चीज़ नहीं होती, कहीं न कहीं कोई कमी रह ही जाती है। कमियों को सुधारना ही जीवन लक्ष्य होना चाहिए!! इसलिए ये न सोचें कि मैंने “परफ़ैक्ट” अनुमोदन करते हुए अपनी आशाएँ व्यक्त की हैं, मैंने अपनी अपेक्षाओं को इस मामले में बहुत ही सरल रखने का प्रयत्न किया है ताकि ये यथार्थवादी ही रहें, जोकि सार्थक हो सकें। यदि इनमें से आधी से ज्यादा अपेक्षाएँ पूर्ण हो जाएँ, तो मैं यकीनन अपने को धन्य मानूँगा(तो कोई है?)!! 🙂

और अब समय है अपनी हिट लिस्ट को व्यक्त करने का!! तो (किसी क्रम में नहीं)वे (दुर्)भाग्यशाली व्यक्ति हैं:

  1. सुर — अभी तक जितना मैंने इन्हे पढ़ा है, एक कड़ा रवैया पाया है, इस बारे में इनके कोमल विचार जानने के लिए उत्सुक हूँ!!
  2. साँझ परी — ट्वाईलाईट फ़ेयरी(twilight fairy) के नाम से लिखने वाली मोहतरमा, अल्का के विचारों पर बढ़िया टिप्पणियाँ दी थी, जानने के लिए उत्सुक हूँ कि इनके अपने विचार क्या हैं!!
  3. प्रत्यक्षा — अधिक तो इनके बारे में नहीं जानता, पढ़ना भी इनको हाल ही में शुरू किया परन्तु इनकी लिखने की शैली सरल और अच्छी लगती है, तो इनके विचार जानना भी रोचक रहेगा।
  4. तरूण — इनके विचार सदैव ही पठनीय होते हैं, देखें ये क्या कहते हैं!!
  5. ई-स्वामी — स्वामी जी ईलेक्ट्रानिक युग के, आगे कहने की नहीं, इनके विचार जानने की आवश्यकता है। 😉
  6. जीतू — अब इनकी क्या कहें, इनके विचार पढ़ने से ही बात बनेगी!! 🙂
  7. साकेत — एक बार मिलने का अवसर मिला था, चीज़ों के प्रति इनके विचार मुझे कुछ अलग लगते हैं, तो इस बारे में भी इनका क्या सोचना है, वो तो जानना ही चाहिए।
  8. शिवम — इनसे भी एक बार मुलाकात हुई, आगे भी होगी, तो जानें कि क्या सोच है इस विषय पर, पढ़ना अवश्य रोचक होगा!!
  9. विनी — एक खास शिकार, विनी के किसी भी विषय के प्रति विचार जानना मुझे सदैव ही ज्ञानवर्धक लगा है, तो देखें वह इस बारे में क्या कहता है।
    (english translation: one special victim, Vinnie. knowing Vinnie’s thoughts about any topic has always sort of added to my knowledge, so it’ll be quite interesting to see what he has to say on this one!! so Vinnie, will it be Cathy or …..)

तौबा, इस हिट लिस्ट को बनाना बड़ा ही दुष्कर सिद्ध हुआ, अपनी आदर्श प्रेमिका के बारे में लिखने से भी अधिक दुष्कर!! अब इतने सारे व्यक्ति हैं, किसको अपना निशाना बनाउँ, किसको बक्श दूँ, समझ नहीं आ रहा था!! पर आखिरकार इस बाधा को भी सफ़लतापूर्वक पार कर ही लिया!! 😀 अब प्रतीक्षा है अपने शिकारों की प्रतिक्रिया का!! 😉

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21 responses to “दोषहीन, निपुण, अद्वितीय प्रेमी!!

  1. वाह, गुरू आप तो प्रेमिका की नहीं किसी टीवी-टेप-रेडियो-एमपी३प्लेयर-मोबाइलफ़ोन कॉम्बीनेशन की बातें कर रहे हैं.

    ऐसी गुणों वाली कन्या कहीं कल्पना में भी मिले तो खबर करियो.

    दर्शन लाभ ही ले लेंगे 🙂

  2. Guruji, Well done. I WILL tag you frequently. 🙂

  3. वाह, गुरू आप तो प्रेमिका की नहीं किसी टीवी-टेप-रेडियो-एमपी३प्लेयर-मोबाइलफ़ोन कॉम्बीनेशन की बातें कर रहे हैं.

    भई, आजकल कॉम्बीनेशन का ही ज़माना है, एक ही कार्य करने वाली चीज़ कोई पसन्द नहीं करता!! 😉

    ऐसी गुणों वाली कन्या कहीं कल्पना में भी मिले तो खबर करियो.

    क्यों भई, कुछ ज्यादा हो गया क्या? मैंने तो केवल सांसारिक गुणों की आशा रखी है, अब इतना भी बुरा समय नहीं आया है कि इनमे से आधे से भी ज्यादा मापदण्डों पर कोई खरा न उतर सके!! 🙂

    और यदि कुछ अधिक ही हो गया है, तो मैं अपने पक्ष में यही कहूँगा कि बात यहाँ पर निपुण, अद्वितीय प्रेमी की हो रही थी, और यदि ऐसी मिल जाए तो फ़िर कहने ही क्या हैं!! 😉

    Guruji, Well done. I WILL tag you frequently.

    तौबा!! अल्का जी, भुगतान करने के लिए अपनी राय देने तक तो (किसी तरह)ठीक है परन्तु अन्य लोगों को शिकार बनाना टेढ़ी खीर है!! यदि मेरे आधे शिकार भी अपनी राय व्यक्त कर भुगतान कर दें, तो गनीमत होगी!!

  4. wah janaab, pehle toh mujhe apni aankhen phaad phaad kar padna pada kee akhir yeh likha kya gaya hai. hindi mein kissi zamane mein acche lekh likhne ke baavjood (keval pariksha tak seemit), mujhe ab zyada kuch yaad hee nahi hai apni matribhasha ke baare mein, aur yeh bahut sharmdaayak hai.
    khair kal aap blog meet mein padhaare nahi, nahi toh mein aapko ussi waqt, lage haath, apne uttar suna detee.. teen logon ne issi vishaya par tag kar diya hai, ab yeh kuch dharam sankat kee baat ho gayee hai. Khair kuch soch kar, aur likh kar, mein aapse dubara vartalaap karoongee.

  5. aur yeh bahut sharmdaayak hai.

    आपके कहने का अर्थ है कि बहुत “शर्मनाक” है? 😉

    khair kal aap blog meet mein padhaare nahi, nahi toh mein aapko ussi waqt, lage haath, apne uttar suna detee..

    किसने कहा कि मैं नहीं आया? यहाँ पढ़िए, मैं बिरादरी के मेंम्बरान को दर्शन देने पहुँचा तो था परन्तु पहुँचते-पहुँचते पाँच बज ही गए थे। 😉 क्या भेंटवार्ता का स्थान, “कॉफ़ी कैफ़े डे”, वही था जो एन ब्लॉक के बरिस्ता के पास है? मैंने यहाँ भेंटवार्ता की घोषणा पर पूछा भी था कि कौन सा “कॉफ़ी कैफ़े डे” है, परन्तु मुझे कोई उत्तर न मिला। कहना पड़ेगा कि आप लोग नए बंधुओं से मिलने में कोई रूचि नहीं रखते, क्योंकि यदि ऐसा न होता तो नए लोगों के लिए आपने कुछ अधिक जानकारी दी होती!! मेरी पहली ब्लॉगर भेंटवार्ता में ऐसा न था, मेज़बान ने निश्चित स्थान पर पहुँचने के लिए आवश्यक निर्देश दिए थे। बहरहाल, मैं लगभग पाँच बजे पहुँचा परन्तु कोई नज़र ही न आया, इसलिए मैं वापस लौट लिया!! 🙂

    और एक बात, यदि हिन्दी में लिखना है तो कृपया देवनागरी लिपि का प्रयोग करें, अन्यथा अंग्रेज़ी में ही लिखें, यूँ रोमन लिपि में हिन्दी न लिखें, पढ़ने में दिक्कत होती है!! 🙂

  6. No I mean sharmdaayak.. i think it’s a right word :).. sharam deni wali baat (sandhi vicched to kijiye :D)

    You came! now that’s really really unfortunate.. yes cafe coffee day was that one only.. explicit directions kya, there’s only one in CP (on outer circle)..i think that was bad luck.. yesterday these guys went to CCD first, but there was some construction going on inside the building so they changed the venue (I know its a bad move, but was unavoidable) and a message was left with the manager there to direct anyone asking for a bloggers meet to come to Cafe costa (near Nirula’s , again on outer circle)..
    This is quite unfortunate..there were loads of newbies..but somehow you missed it.. you can write to me at my mail id and i’ll give you my number, which you can call on, next time you are unsure about anything to do with the DBM..

  7. This is really unfortunate…nothing is more valuable to me as the coordinator of the meet than to have another Blogger participant…I had decided CCD as the venue but it was too noisy and congested. I personally left a message with the CCD guys, made them write down the details of Costa Coffee on a piece of paper and told them 3-4 times to pass the message to anybody who comes for the meet…Don’t why they didn’t guide you properly…

    I read your query regarding which CCD at the comment section after i came back from the meet…Why didn’t you mail me Amit? Anyway bad luck for us…

    There were 15 of us, it went on till 8.30 and was a good one, we would be soon uploading the pics and the write ups on how did it go…would keep you updated…:-) For more curious questions popping up in your mind…contact me on Y IM samyukta_basu or GTalk samyukta.basu

    Smiles

  8. No I mean sharmdaayak.. i think it’s a right word 🙂 .. sharam deni wali baat (sandhi vicched to kijiye 😀 )

    यदि मेरा हिन्दी ज्ञान सही है तो “शर्मदायक” जैसा कोई शब्द नहीं है, “शर्म देने वाली बात” तो हम ऐसे ही भाषा के बिगड़े रूप में कह देते हैं। सही शब्द “शर्मनाक” ही है, चाहें तो शब्दकोष में देख सकती हैं!! 🙂

    yes cafe coffee day was that one only.. explicit directions kya, there’s only one in CP (on outer circle)

    हाँ, बाहरी चक्र में तो वही है, क्योंकि मेरे अनुमानुसार एक भीतर के चक्र में भी है, पूर्ण विश्वास के साथ नहीं कह सकता परन्तु मुझे लगता है कि मैंने एक वहाँ भी देखा है!!

    सांझ परी और सन्जुक्ता, यह वाकई अनपेक्षित था, “कॉफ़ी कैफ़े डे” के काऊँटर पर मैंने “दिल्ली ब्लॉगर्स मीट” के बारे में पूछा था, वहाँ दो लोग थे और उन्होने कहा कि इस बारे में उन्हे कुछ नहीं पता, तो तब मैंने पूछा कि क्या कोई तीन-चार लोगों का समूह चार बजे के आस पास एकत्र हुआ था तो तब एक ने कहा कि कुछ लोगों का समूह एकत्र तो हुआ था परन्तु मेरे आने के पाँच-दस मिनट पहले ही वे लोग चले गए!! हालांकि मुझे संदेह था कि वह समूह आप लोगों का था कि नहीं, परन्तु फ़िर भी वहाँ रूक कर प्रतीक्षा करना मैंने व्यर्थ समझा। क्योंकि मैं एक घंटा देरी से आया था, इसलिए किसी और को दोष भी नहीं दिया जा सकता!! 🙂

    Why didn’t you mail me Amit?

    अब क्या कहें। मैंने तीन दिन पहले अपनी टिप्पणी दर्ज की थी!! एक नियमित ब्लॉगर(या ब्लॉगर भेंटवार्ता के आयोजक) के लिए यह वाकई आश्चर्यजनक बात है कि वह अपने ब्लॉग(या भेंटवार्ता की घोषणा) को नई टिप्पणियों के लिए 24-48 घंटे में कम से कम एक बार भी नहीं देखते!! पर अब मैं और अधिक नहीं कहूँगा, हम सभी मनुष्य हैं और गलती किसी से भी हो सकती है। 🙂 आशा है कि ऐसा भविष्य में न होगा, मेरा इशारा ऐन मौके पर भेंटवार्ता का स्थान बदलने से है!! 🙂 अन्यथा आप अपने मोबाईल फ़ोन का नंबर घोषणा के साथ दे सकती हैं ताकि आवश्यकता पड़ने पर आपसे संपर्क स्थापित किया जा सके। 😉

    Anyway bad luck for us…

    कह नहीं सकता कि किसके लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण था, क्योंकि मुझे लगता है कि “कॉफ़ी कैफ़े डे” के काऊँटर पर उपस्थित व्यक्ति के अनुसार जो समूह मेरे आने से पाँच-दस मिनट पहले निकला था, वह कदाचित् आप लोगों का ही था!!

    There were 15 of us, it went on till 8.30 and was a good one, we would be soon uploading the pics and the write ups on how did it go…would keep you updated…:-)

    बढ़िया, प्रतीक्षा में…..
    वैसे आप लोग कितने समय के अंतराल पर मिलते हैं? और इसकी घोषणा हर बार एक ही जगह(ब्लॉग) पर होती है या फ़िर अलग अलग?

  9. the blog meets have no specific time interval.. whenever the ppl in the mailing list (we have one here), start feeling the need for one and we have a person willing to do the “choose a venue, time, date, tell everyone” routine, we have one. We always use one blog only where all these things are updated (delhiblogmeet.rediffblogs.com) but this time somehow the person who updates it was out of town and it couldnt be updated.

  10. So you tagged me, will write later about this. I assume you tagged me from hindi blog in hindi blog so I have to write in hindi. I read your thoughts about PL, I will say one thing never go to any girl with that list becuase before you finish she will be gone with someone else 😉

  11. the blog meets have no specific time interval.. whenever the ppl in the mailing list, start feeling the need for one and we have a person willing to do the “choose a venue, time, date, tell everyone” routine, we have one.

    आह, भई यह तो सही नहीं है, भेंटें तो नियमित रूप से होनी चाहिए, और यह अधिक संगठित रूप से होना चाहिए, यह नियमित ब्लॉग की जगह दूसरे ब्लॉग पर घोषणा करने वाली बात जमी नहीं। इस बारे में मेरे पास एक विचार है, परन्तु उस पर कुछ कार्य करने के बाद ही मैं उसे अनावरित करूँगा!! 🙂

    तरूण, जी हाँ, मैंने आपको “टैग” किया था, हिन्दी ब्लॉग से आपके हिन्दी ब्लॉग पर किया था, वैसे तो आप अपनी राय किसी भी भाषा में व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं परन्तु मैं यही कहूँगा कि यदि हिन्दी में करें तो बढ़िया होगा, आगे आपकी इच्छा!! 🙂

    never go to any girl with that list becuase before you finish she will be gone with someone else

    क्यों भई, क्या लड़कियाँ इतनी गई-गुज़री होती हैं कि वे इन साधारण मापदण्डों पर भी खरी नहीं उतर सकती?? 😉 हम लोगों से तो लड़कियाँ इन सबसे कुछ ज्यादा ही अपेक्षाएँ रखती हैं!! 🙂

    और वैसे भी, किसी लड़की के पास यह सूचि लेकर जाना मूर्खता होगी, यदि लड़की इन मापदण्डों पर खरी नहीं उतरती तो आपको पता चल ही जाएगा और आपको पसन्द नहीं, तो आप अपने रास्ते और वह अपने रास्ते, विवाद का कोई प्रश्न ही नहीं। 😉

  12. Amit jee, niyamit roop se blog meets kar pana behad mushkil hota hai. Do saal se accha khaasa andaza hai mujhe iska. Agar ek vyakti apna waqt in cheezon mein niyamit roop se lagaye to alag baat hai, kintu, aisa nahi ho pata. Doosre blog par ghoshna majbooran karnee padee jaisa kee meine pehle likha thaa. Waise bhee aapne jo pehle meet attend kee thee wahan toh har baar alag blog par yahee thaa! yahan toh ek baar kee ghatna hai yeh. khair ab aap dheere dheere jaan hee jaayenge kyon ki aglee bhent aap hee ghoshit karenge 🙂

  13. and I wrote that comment in hindi phonetically, coz you write to me in hindi. ajeeb lagta hai ek bhasha ka jawaab doosri mein dena 🙂

  14. नियमित रूप से भेंटवार्ताएँ करना कोई कठिन नहीं है, क्योंकि यदि यह महीने में एक बार की जाए तो शुरू में बेशक कुछ कठिन लगे पर यह फ़िर एक रूटीन बन जाता है!! रही बात अन्य भेंटवार्ता की जिसमें मैंने शिरकत की थी, तो हाँ, वहाँ पर एक ही जगह घोषणा नहीं होती, वहाँ पर मेज़बान अपने ब्लॉग पर घोषणा करता है, परन्तु फ़िर भी पता चल ही जाता है क्योंकि कुछ अन्य मेम्बरान भी अपने अपने चिट्ठों पर घोषणा कर देते हैं। एक जगह घोषणा करना फ़िर भी ज्यादा बढ़िया है, यह मैं मानता हूँ!! 🙂

    khair ab aap dheere dheere jaan hee jaayenge kyon ki aglee bhent aap hee ghoshit karenge

    क्या!!! 😮
    क्यों भई, नए बन्दे को ही बली का बकरा बनाया जाता है? 😉 बहरहाल, मुझे कोई आपत्ति नहीं है। बस इतना बता देना कि करना क्या है। 🙂

    and I wrote that comment in hindi phonetically, coz you write to me in hindi. ajeeb lagta hai ek bhasha ka jawaab doosri mein dena

    तभी तो मैंने कहा था, यदि हिन्दी लिखनी है तो देवनागरी में लिखें, यूँ रोमन लिपि में न लिखें। कोई कठिन कार्य भी नहीं है, बस यहाँ चर्चित सॉफ़्टवेयरों में से एक को पकड़ें और शुरू हो जाएँ हिन्दी में लिखना, अधिकतर में हिन्दी लिखना बहुत ही सरल है, जिस तरह रोमन लिपि में हिन्दी लिख रहीं हैं, बस उसी तरह लिखनी है और सॉफ़्टवेयर अपने आप देवनागरी लिपि में उसे बदल देगा। 🙂

  15. ok I guess we can move that discussion to personal mails now.. coz after all, this was the “perfect lover” post and slowly its becoming “perfect way of arranging blog meets” :p. BTW once a routine is set, it’s certainly not difficult, only there are never volunteers for the same. If you are willing to be the one who would arrange for a monthly rendezvous, you are most welcome :). I, for one, would also back out of such a thing coz I have a lot of other activities to participate in and cant do this every month.

  16. aap ke vichar ‘nipur premi’ ki baare main bahut behtareen likhe gaye hain.

  17. @सांझ परी:

    ok I guess we can move that discussion to personal mails now.. coz after all, this was the “perfect lover” post and slowly its becoming “perfect way of arranging blog meets”

    सही कहा, हम विषय से बुरी तरह भटक गए हैं। आपकी टिप्पणी का उत्तर मैं विद्युत-पत्र से दूँगा, प्रतीक्षा करें। 🙂

    @सुन्दर जीवन(ब्यूटिफ़ुल लाईफ़):

    aap ke vichar ‘nipur premi’ ki baare main bahut behtareen likhe gaye hain

    धन्यवाद। कृपया हिन्दी देवनागरी में लिखें अन्यथा अंग्रेज़ी में टिप्पणी दें। 🙂

  18. पिंगबैक: ई-स्वामी » आदर्श प्रेमिका के गुण, और एक किस्सा

  19. पिंगबैक: my Feeds » Blog Archive » आवारा पागल दीवाना यानि परफेक्‍ट लवर

  20. पिंगबैक: world from my eyes - दुनिया मेरी नज़र से!!

  21. पिंगबैक: निठल्ला चिन्तन » आवारा पागल दीवाना यानि परफेक्‍ट लवर

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